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सारांशः पांच भारतीय फ़ंड Nasdaq 100 को ट्रैक करते हैं. इनमें से चार का साल भर का रिटर्न डेढ़ प्रतिशत के दायरे में सिमटा है. पांचवां लगभग दोगुना आगे है. और वो आगे क्यों है, इसका Nasdaq के प्रदर्शन से कोई लेना-देना नहीं.
16 सितंबर को Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF की एक यूनिट NSE पर ₹275.28 पर बंद हुई. उसके अंदर मौजूद शेयरों की क़ीमत थी ₹116.69. यानी हर ₹275 में से ₹159 ने कुछ भी नहीं ख़रीदा. न कोई कंपनी, न कमाई, न डिविडेंड.
पिछले हफ़्ते हमने इसी फ़ासले पर लिखा था, तब ये 73 प्रतिशत था. अब ये 135.9 प्रतिशत है, किसी भी भारतीय इंटरनेशनल ETF के लिए अब तक का सबसे बड़ा प्रीमियम.
Q50 का प्रीमियम क़रीब दोगुना, बाक़ी सुस्त पड़े
| ETF | NAV (₹) | क़ीमत (₹) | प्रीमियम 10 सितंबर (%) | प्रीमियम 16 सितंबर (%) | औसत प्रीमियम (%) | ट्रेड हुए (₹ करोड़) | सामान्य तौर पर रोज़ (₹ करोड़) |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| Motilal Oswal Nasdaq Q50 | 116.69 | 275.28 | 72.8 | 135.9 | 14.8 | 35.9 | 1.4 |
| Mirae Asset S&P 500 Top 50 | 66.66 | 98.65 | 43.6 | 48 | 19.5 | 7.3 | 1.5 |
| Mirae Asset NYSE FANG+ | 173.63 | 232.48 | 31.1 | 33.9 | 19.7 | 17.4 | 5.6 |
| Mirae Asset Hang Seng TECH | 17.81 | 21.5 | 25.3 | 20.7 | 19.7 | 2.2 | 2.4 |
| Motilal Oswal NASDAQ 100 | 271.53 | 326.77 | 22.7 | 20.3 | 11 | 22.5 | 23.5 |
| Nippon India Hang Seng BeES | 450.28 | 464.42 | 3.1 | 3.1 | 14.4 | 2.7 | 8.1 |
| 16 सितंबर, 2026 को उसी दिन के NAV पर NSE का क्लोज़िंग भाव. औसत: 10 सितंबर, 2025 से 3 सितंबर, 2026 तक. | |||||||
4 सितंबर को इन छह में से पांच NAV से 19 से 19.6 प्रतिशत ऊपर बने हुए थे. SEBI के नए प्राइस बैंड के दो सेशन के अंदर ही इन सबमें उछाल आ गया. ज़्यादातर तब से वापस नीचे आ चुके हैं. Q50 नहीं आया. अकेले 16 सितंबर को ये 19.8 प्रतिशत चढ़ा, जबकि इसका NAV 0.3 प्रतिशत गिरा और इसमें ₹35.9 करोड़ का कारोबार हुआ, जबकि आम दिनों में ये ₹1.4 करोड़ रहता है. यानी उछाल सबमें आया. लेकिन ये विस्फोट सिर्फ़ इसी में है.
लेकिन ETF तो शोर मचाने वाला हिस्सा हैं. चुपचाप वाला हिस्सा उन आम फ़ंड्स के अंदर बैठा है, जिन्हें लाखों लोग SIP के ज़रिए रखते हैं और कभी पलटकर देखते तक नहीं.
एक ही स्टॉक पर फ़ंड और ETF की राय अलग क्यों हो सकती है
फ़ंड की एक ही क़ीमत होती है. ETF की दो: NAV, यानी उसके निवेश की असल क़ीमत और मार्केट प्राइस यानी एक्सचेंज पर ख़रीदार जो देने को राज़ी हो जाए. आम तौर पर दोनों आस-पास ही रहते हैं. अगर क़ीमत आगे निकल जाए, तो फ़ंड हाउस नई यूनिट जारी करता है, उन्हें बेचता है और बढ़ी हुई सप्लाई क़ीमत को वापस नीचे खींच लाती है. ये तरीक़ा अप्रैल 2024 से बंद पड़ा है, जब ETF विदेश में निवेश की 1 अरब डॉलर वाली सीमा पर पहुंच गए. यूनिट जस की तस और क़तार लंबी होती गई.
ये टेबल ऐसी नहीं दिखनी चाहिए थी
लिस्टेड ETF को ज़रा एक तरफ़ रख दीजिए. पांच भारतीय म्यूचुअल फ़ंड Nasdaq 100 को ट्रैक करते हैं.
| फ़ंड | एक साल का रिटर्न |
|---|---|
| Motilal Oswal Nasdaq 100 FOF | 53.40% |
| Invesco EQQQ NASDAQ-100 ETF FoF | 30.80% |
| Navi Nasdaq100 FoF | 29.60% |
| Axis NASDAQ 100 FoF | 29.50% |
| ICICI Prudential NASDAQ 100 Index | 29.30% |
| डायरेक्ट प्लान, 16 सितंबर, 2026 तक | |
इनमें से चार Nasdaq 100 को उन कंपनियों की असल क़ीमत पर आंकते हैं. पांचवां पूरी तरह Motilal Oswal NASDAQ 100 ETF की यूनिट में निवेश करता है और जो फ़ंड किसी लिस्टेड ETF को रखता है, उसे अपनी होल्डिंग की क़ीमत उस ETF के मार्केट प्राइस पर ही लगानी होती है. और वो क़ीमत NAV से 20.3 प्रतिशत ऊपर है.
तो रिटर्न Nasdaq के साथ एक अतिरिक्त फायदा भी है. Nasdaq वाला हिस्सा 29.8 प्रतिशत है, यानी जितना ख़ुद उसके ETF के NAV ने दिया. बाक़ी के 23 प्रतिशत प्रीमियम हैं, जो परफ़ॉर्मेंस के नाम पर दर्ज हो गए.
ऐसे समझिए. रवि ने एक साल पहले Motilal Oswal FoF में ₹1 लाख लगाए. मीरा ने ₹1 लाख ICICI इंडेक्स फ़ंड में लगाए. रवि के स्टेटमेंट में ₹1,53,400 दिख रहे हैं. मीरा के स्टेटमेंट में ₹1,29,300.
रवि ने बेहतर कमाई नहीं की है. उसके पैसे में से क़रीब ₹24,000 तो Nasdaq हैं ही नहीं. ये उस ETF का प्रीमियम है जो संयोग से उसके फ़ंड के पास पड़ा है और अगर वो प्रीमियम सामान्य स्तर पर लौट आया, तो अमेरिका के एक भी शेयर के हिले बिना उसके ₹1.53 लाख घटकर क़रीब 1.28 लाख रह जाएंगे.
ये कोई अंदाज़ा नहीं है, इसकी शुरुआत पिछले हफ़्ते से हो चुकी है
16 सितंबर तक के हफ़्ते में Motilal Oswal NASDAQ 100 ETF का मार्केट प्राइस 4.1 प्रतिशत गिरा. उसके अंदर मौजूद शेयरों की क़ीमत 0.7 प्रतिशत गिरी. Motilal Oswal Nasdaq 100 FoF 4.1 प्रतिशत गिरा. वो क़ीमत के पीछे चला, शेयरों के पीछे नहीं, क्योंकि उसे अपनी होल्डिंग की क़ीमत उसी भाव पर आंकने की इजाज़त है. Mirae का Hang Seng TECH FoF भी यही करता रहा: क़ीमत 5.7 प्रतिशत नीचे, शेयर 1.3 प्रतिशत नीचे, फ़ंड 5.7 प्रतिशत नीचे. Apple किसी ने नहीं बेचा. क़तार बस थोड़ी छोटी हुई और उसकी क़ीमत फ़ंड रखने वालों ने चुकाई.
और वो एक दरवाज़ा, जो अब भी खुला है
Baroda BNP Paribas Aqua इकलौता ओपन-एंडेड इंटरनेशनल फ़ंड है जो अब भी नया लंपसम और नई SIP रजिस्ट्रेशन ले रहा है. इस कैटेगरी में बाक़ी सब बंद है.
ये पानी की थीम पर बना फ़ंड है. पांच साल में इसने सालाना 8.1 प्रतिशत का रिटर्न दिया है. ये फ़ंड पर कोई तंज़ नहीं है. लेकिन सिर्फ़ इसलिए कि यही एक दरवाज़ा खुला है, उसमें घुस जाने की कोई वजह नहीं बनती.
तो, दो नंबर देख लीजिए
अगर आपके पास ETF है, तो उसके NAV की तुलना अपनी स्क्रीन पर दिख रही क़ीमत से कीजिए. अगर क़ीमत काफ़ी ऊपर बैठी है, तो आपके पास इंडेक्स तो है ही, उसके साथ एक शॉर्टेज भी है.
अगर आपके पास फ़ंड ऑफ़ फ़ंड्स है, तो उसका पोर्टफ़ोलियो पेज खोलिए. अगर वो इंडेक्स या किसी विदेशी फ़ंड की जगह इंडिया में लिस्टेड ETF रखता है, तो आपके रिटर्न में एक प्रीमियम शामिल है, जो आख़िर में आपका रहने वाला नहीं है.
SEBI का सर्कुलर 1 अप्रैल, 2027 से रेफ़रेंस प्राइस को वापस पिछले दिन के NAV पर ले जाता है. रेगुलेटर चाहे तो इसे उससे पहले भी लागू कर सकता है, या यूनिट बनाने का रास्ता जल्दी खोल सकता है. पहले क्या होगा, ये हमें नहीं पता.
ये फ़ासला कभी न कभी ख़त्म होगा ही. कब, ये हमें नहीं पता. और जब होगा, तब अमेरिका में कुछ भी नहीं हुआ होगा.
अगले हफ़्ते फिर मिलते हैं.
आपका रिटर्न बताता है कि क्या हुआ. ये नहीं बताता कि वो फ़ंड आपके पोर्टफ़ोलियो में होना भी चाहिए या नहीं. Value Research Fund Advisor आपकी मौजूदा होल्डिंग की समीक्षा करता है और बाक़ी की प्लानिंग आपके गोल के हिसाब से करता है.




