Anand Kumar/AI-Generated Image
सारांशः रेगुलर प्लान से डायरेक्ट प्लान में जाने पर तुरंत टैक्स का बिल बन जाता है, पर वहीं टिके रहने से वो देनदारी ख़त्म नहीं हो जाती. असली तुलना इस बात की है कि आज स्विच करने पर कितना टैक्स लगेगा और रेगुलर प्लान में बने रहकर आप कितना ज़्यादा ख़र्च चुकाते रहेंगे.
सारांशः रेगुलर प्लान से डायरेक्ट प्लान में जाने पर तुरंत टैक्स का बिल बन जाता है, पर वहीं टिके रहने से वो देनदारी ख़त्म नहीं हो जाती. असली तुलना इस बात की है कि आज स्विच करने पर कितना टैक्स लगेगा और रेगुलर प्लान में बने रहकर आप कितना ज़्यादा ख़र्च चुकाते रहेंगे. ₹15,000 महीने की एक SIP, जो बिना रुके 15 साल चली हो, आज क़रीब ₹72 लाख की हो चुकी होगी. इसका क़रीब 62% हिस्सा मुनाफ़ा है. अब इसे रेगुलर प्लान से डायरेक्ट प्लान में ले जाइए, तो कैपिटल गेन का बिल क़रीब ₹5.45 लाख बनता है, जो अभी, अपनी जेब से चुकाना होगा. यानी एक ही झटके में, पूरे पोर्टफ़ोलियो का 7.6% चला जाएगा. यही वो फ़ैसला है जिसे निवेशक सबसे ज़्यादा टालते हैं. उन्हें पता होता है कि डायरेक्ट प्लान सस्ता पड़ता है. फिर भी वो नहीं जाते. वजह यह कि टैक्स एक ऐसा बिल है जो आपको दिखता है और चुभता है. जबकि बचत सिर्फ़ एक कम ख़र्च है, जो हर दिन चुपचाप फ़ंड की
ये लेख पहली बार अगस्त 24, 2026 को पब्लिश हुआ.
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