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सारांशः क्रिप्टो की बढ़ती लोकप्रियता उन जोख़िमों को छुपा देती है जिन्हें आम निवेशक देख या क़ाबू नहीं कर पाते. ट्रंप के क्रिप्टो वेंचर्स और एक लोकप्रिय हार्डवेयर वॉलेट की सुरक्षा ख़ामी बताती है कि भरोसा, रेगुलेशन और निवेशक सुरक्षा क्यों मायने रखते हैं.
क्रिप्टो के विज्ञापन एक बार फिर पूरे जोर-शोर से लौट आए हैं. चार साल पहले सरकार ने एक ऐसा टैक्स सिस्टम लागू किया था जो बैन जैसा लगता था, लेकिन सट्टेबाज़ों ने धीरे-धीरे 1 प्रतिशत TDS को सामान्य बात मानकर स्वीकार कर लिया है. मेरी स्क्रीन अब फिर से तथाकथित क्रिप्टो एक्सचेंजों के विज्ञापनों से भरी पड़ी है और मुझे यक़ीन है कि आपके साथ भी ऐसा ही होगा. 50 से ज़्यादा क्रिप्टो प्लेटफ़ॉर्म (वर्चुअल डिजिटल एसेट सर्विस प्रोवाइडर या VDASP) रजिस्टर हो चुके हैं और सरकार के अपने अनुमान के मुताबिक़ लगभग चार करोड़ लोगों ने क्रिप्टो में पैसा लगाया है.
मैं इसे क्रिप्टो की दुनिया की दो हालिया घटनाओं के सामने रखना चाहता हूं. पहली घटना अमेरिका के राष्ट्रपति से जुड़ी है. जब ट्रंप के 2026 के फ़ाइनेंशियल डिस्क्लोज़र सामने आए, तो पता चला कि उन्होंने अपने से जुड़े अलग-अलग क्रिप्टो वेंचर्स से 1.4 अरब डॉलर से ज़्यादा कमाए हैं. इनमें उनके नाम पर एक मीमकॉइन (ज़रा गूगल कर लीजिए!) और 'वर्ल्ड लिबर्टी फ़ाइनेंशियल' नाम की एक फ़ैमिली फ़र्म शामिल है, जिसके टोकन ने बहुत तेज़ी से पैसा बनाया है. नैतिकता के लिहाज़ से इससे भी बुरी बात यह है कि इसमें अबू धाबी का सॉवरेन वेल्थ फ़ंड और बायनेंस भी शामिल हैं, और कहीं न कहीं बायनेंस के फाउंडर को ट्रंप ने माफ़ी दे दी, वह भी तब जबकि उन्होंने अमेरिकी क़ानून के तहत ज़रूरी नियंत्रण न बनाए रखने का दोष क़बूल किया था, जिसकी वजह से बायनेंस मनी-लॉन्ड्रिंग के मामलों में फंसा था. ट्रंप इन दोनों बातों के बीच किसी संबंध से इनकार करते हैं और पाठक ख़ुद इस पर अपनी राय बना सकते हैं. ट्रंप कंपनी के मीमकॉइन की क़ीमत 74 डॉलर तक पहुंची थी और अब घटकर 2 डॉलर रह गई है. यह पैसा ग़ायब नहीं हुआ, बल्कि निवेशकों की जेब से निकलकर ट्रंप परिवार की जेब में चला गया.
आप पूछ सकते हैं कि इसका भारत में आपसे और मुझसे क्या लेना-देना है? ज़रा पीछे हटकर देखिए कि यहां हो क्या रहा है. अमेरिका दुनिया की फ़ाइनेंशियल और रेगुलेटरी सुपरपावर है और वहाँ का राष्ट्रपति इस पूरी मशीनरी का मुखिया होता है. क्रिप्टो दुनिया के फ़ाइनेंशियल सिस्टम में कितनी गहराई तक घुस पाएगा, यह काफ़ी हद तक अमेरिकी सरकार के रवैये पर निर्भर करता है. अगर सरकार का मुखिया ही खुलेआम हर तरह की संदिग्ध क्रिप्टो गतिविधियों में शामिल हो, तो यह उम्मीद कैसे की जाए कि क्रिप्टो को दुनिया भर में सही ढंग से रेगुलेट किया जाएगा?
अब आइए क्रिप्टो कहानी के दूसरे छोर पर नज़र डालते हैं: कोल्डकार्ड नाम की एक डिवाइस, जिसे कॉइनकाइट नाम की एक कैनेडियन कंपनी बनाती है. यह डिवाइस काफ़ी इस्तेमाल होती है और संभवतः भारत में भी इसके काफ़ी यूज़र होंगे. कोल्डकार्ड एक हार्डवेयर वॉलेट है, एक छोटा-सी स्टैंडअलोन डिवाइस, जो किसी व्यक्ति की बिटकॉइन सीक्रेट-की ऑफ़लाइन जेनरेट और स्टोर करती है, ताकि मालिक अपने कॉइन एक्सचेंज पर भरोसा करने के बजाय ख़ुद अपने पास रख सकें. क्रिप्टो के पक्के फ़ॉलोअर लंबे समय से इसे बिटकॉइन रखने का सबसे सुरक्षित तरीक़ा मानते आए हैं, क्योंकि जैसा आपने पढ़ा ही होगा, एक्सचेंज लगातार हैक होते रहते हैं.
कुछ हफ़्ते पहले कोल्डकार्ड की साख धराशायी हो गई. पता चला कि पिछले पांच सालों से कोल्डकार्ड के सॉफ़्टवेयर में एक बग था, जिसकी वजह से जेनरेट होने वाली सीक्रेट-की को मामूली कंप्यूटिंग पावर से भी आसानी से अंदाज़ा लगाया जा सकता था. 30 जुलाई से हमलावरों ने मिनटों में हज़ारों कोल्डकार्ड वॉलेट खाली कर दिए. कहा जाता है कि कुल नुक़सान 10 करोड़ डॉलर से भी काफ़ी ज़्यादा है.
ट्रंप और कोल्डकार्ड, ऊपर से देखने पर एक-दूसरे से जुड़े नहीं लगते, लेकिन असल में दोनों छोटे निवेशकों को एक ही समस्या से जूझने पर मजबूर करते हैं: आपको एक ऐसी मशीन पर भरोसा करना पड़ता है, जिसे आप न देख सकते हैं, न क़ाबू कर सकते हैं और न समझ सकते हैं. निवेश के बाक़ी तरीक़ों के उलट, यहां आपको बिना किसी ठोस आधार के अंधाधुंध भरोसा करना पड़ता है. दोनों ही मामलों में, जब तक सब कुछ ख़त्म नहीं हो गया, तब तक कुछ भी ग़लत नज़र नहीं आया. मीमकॉइन ख़रीदने वाले ने आंकड़े को 74 डॉलर तक चढ़ते देखा और उसे यह अपनी वेल्थ लगी. कोल्डकार्ड के मालिक के पास एक ऐसी डिवाइस थी जो उसे भरोसा दिलाती थी कि उसके कॉइन सुरक्षित हैं. दोनों में से किसी को भी यह नज़र नहीं आया कि उसे किस चीज़ ने बर्बाद किया, जब तक वह बर्बाद नहीं हो चुका था. यही होता है जब आपसे किसी ऐसे सिस्टम पर भरोसा करने को कहा जाता है, जिसकी जांच करने की इजाज़त आपको नहीं है. और अगर आप उन चार करोड़ लोगों में से एक हैं जो पहले ही पैसा लगा चुके हैं, या उन बहुत सारे लोगों में से एक हैं जिनका पीछा ये नए विज्ञापन कर रहे हैं, तो वह छोटा निवेशक अमेरिका या कनाडा की किसी कहानी का कोई किरदार नहीं है. वह आप हैं.
सामान्य रेगुलेटेड सिस्टम के काम करने की एक बड़ी वजह यह है कि आपको ख़ुद उसकी गहरी बारीक़ियां समझने की ज़रूरत नहीं पड़ती. इसके पीछे डिपॉज़िटरी, ऑडिटर और असली दमख़म वाले सेंट्रल बैंक जैसे स्वतंत्र रेगुलेटर खड़े होते हैं. क्रिप्टो की दुनिया दावा करती है कि वह इन सबसे परे है, लेकिन इसके बदले वह कुछ भी काम का पेश नहीं करती. हर हाइप और बस्ट के साइकिल के साथ, क्रिप्टो और ज़्यादा चमकदार, और ज़्यादा पॉलिश्ड, मगर और ज़्यादा खोखला चेहरा पेश करता है. इसका सबसे ताज़ा संस्करण ट्रंप के आशीर्वाद के साथ आता है और आपको इस पर दांव लगाने का न्योता देता है. पक्का करें कि आप इस न्योते को ठुकरा दें.
यह कॉलम मूल रूप से 17 अगस्त, 2026 को मिंट में प्रकाशित हुआ था.
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