Anand Kumar/AI-Generated Image
सारांशः कई साल के घाटे के बाद BlueStone आख़िरकार मुनाफ़े में आ गई है, जिसमें तेज़ी से बढ़ते स्टोर नेटवर्क, स्टडेड ज्वेलरी पर ज़्यादा फ़ोकस और बेहतर होते मार्जिन का बड़ा हाथ है. लेकिन यह बिज़नेस अब भी काफ़ी कैपिटल-इंटेंसिव यानी ज़्यादा पूंजी की ज़रूरत वाला है, इन्वेंट्री में काफ़ी कैश फंसा हुआ है और फ़ाइनेंशियल ईयर 30 के लिए तय किए गए बड़े ग्रोथ टारगेट में ज़रा भी चूक की गुंजाइश नहीं है.
पिछले साल BlueStone की लिस्टिंग कुछ ख़ास नहीं रही थी. बाज़ार के पास बेरुख़ी दिखाने की वजहें भी थीं: 14 साल का घाटा और एक ऐसा बिज़नेस जो ख़ास डिज़ाइन वाले प्रोडक्ट्स, ज़्यादा मार्जिन, तेज़ी से फैलते स्टोर नेटवर्क और मुनाफ़े तक पहुंचने के रास्ते पर टिका था.
हालांकि, एक साल बाद, स्टॉक अपने IPO प्राइस से 57 प्रतिशत ऊपर है और BlueStone ने पहली बार पूरे साल में मुनाफ़ा दर्ज किया है. फिर भी, असली इम्तिहान अब शुरू होता है.
पहले बात बिज़नेस की
BlueStone Jewellery and Lifestyle सोने और हीरे के गहने बेचती है. लेकिन पारंपरिक ज्वेलर्स से अलग, यह भारी ब्राइडल गोल्ड से दूरी बनाती है और हल्के, रोज़ाना पहनने लायक़ गहनों पर ज़्यादा फ़ोकस करती है. यही वजह है कि BlueStone के क़रीब 60 प्रतिशत रेवेन्यू का स्रोत स्टडेड ज्वेलरी है, जबकि तनिष्क (Tanishq) में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ़ 27 प्रतिशत और Kalyan में 30 प्रतिशत है.
BlueStone की शुरुआत 2011 में एक ऑनलाइन-ओनली ज्वेलरी बिज़नेस के तौर पर हुई थी, स्टोर बाद में जुड़े. आज इसके 350 स्टोर हैं और 90 प्रतिशत से ज़्यादा बिक्री स्टोर से ही होती है. इतना ही नहीं, पिछले तीन साल में एवरेज ऑर्डर वैल्यू लगभग दोगुनी होकर आज क़रीब ₹66,000 पर पहुंच गई है.
हर गहने में दो हिस्से होते हैं. सोने या हीरे की क़ीमत बाज़ार भाव के हिसाब से तय होती है. मेकिंग चार्ज डिज़ाइन, कारीगरी और ब्रांड वैल्यू को दिखाता है. BlueStone का पूरा फ़ोकस दूसरे हिस्से को बढ़ाने पर है, यही वजह है कि इसका ग्रॉस मार्जिन क़रीब 43 प्रतिशत है, जो किसी पारंपरिक जौहरी के मुक़ाबले लगभग दोगुना है.
बाक़ी काम मैन्युफ़ैक्चरिंग करती है. BlueStone अपनी 95 प्रतिशत से ज़्यादा ज्वेलरी मुंबई, जयपुर और सूरत में अपनी ख़ुद की फ़ैक्ट्रियों में बनाती है, जबकि ज़्यादातर भारतीय जौहरी यह काम आउटसोर्स करते हैं. इससे डिज़ाइन पर कंट्रोल और मैन्युफ़ैक्चरिंग मार्जिन दोनों कंपनी के पास ही रहते हैं.
टर्नअराउंड के पीछे क्या रहा
फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में BlueStone का रेवेन्यू 38 प्रतिशत बढ़ा, जिसमें 65 नए स्टोर और शानदार चौथी तिमाही का बड़ा योगदान रहा. आमतौर पर नए स्टोर पहले पैसा खाते हैं, मुनाफ़ा बाद में देते हैं, लेकिन BlueStone ने अपने ब्राउज़िंग डेटा के आधार पर लोकेशन चुनीं, यानी वे पिन कोड जहां ग्राहक पहले से ही उसके डिज़ाइन देख रहे थे.
क़रीब तीन-चौथाई नए स्टोर अब स्टोर-ओपनिंग ख़र्च को छोड़कर, तीन महीने के भीतर ही अपनी ऑपरेटिंग कॉस्ट निकालने लगते हैं. इसके अलावा, स्टडेड-हेवी प्रोडक्ट मिक्स, ज़्यादा इन-हाउस मैन्युफ़ैक्चरिंग, बेहतर कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन और पुराने होते स्टोर नेटवर्क ने भी मार्जिन बढ़ाने में मदद की. तीन साल से पुराने स्टोर 22 से 24 प्रतिशत स्टोर-लेवल EBITDA दे रहे हैं और अब इनकी पूरे नेटवर्क में 46 प्रतिशत हिस्सेदारी है.
| FY23 | FY24 | FY25 | FY26 | |
|---|---|---|---|---|
| ऑपरेशंस से रेवेन्यू (₹ करोड़) | 771 | 1,266 | 1,770 | 2,436 |
| EBITDA मार्जिन (%) | -7.3 | 4.2 | 4.1 | 15.8 |
| टैक्स के बाद मुनाफ़ा (₹ करोड़) | -167 | -142 | -222 | 13 |
| विज्ञापन ख़र्च (रेवेन्यू का %) | 10.9 | 9.8 | 9 | 6.6 |
| सेम-स्टोर सेल्स ग्रोथ यानी SSSG (%) | 72 | 51.2 | 32.1 | -* |
| *फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में SSSG पहली तिमाही में 18.4 प्रतिशत, दूसरी तिमाही में 11.1 प्रतिशत, तीसरी तिमाही में 12 प्रतिशत और चौथी तिमाही में 34 प्रतिशत रहा. पूरे साल का आंकड़ा नहीं बताया गया. FY23 और FY24 के आंकड़े स्टैंडअलोन हैं, जबकि फ़ाइनेंशियल ईयर 25 और फ़ाइनेंशियल ईयर 26 के आंकड़े कंसॉलिडेटेड हैं. | ||||
ग्राहकों से होने वाली कमाई भी बेहतर हो रही है. फ़ाइनेंशियल ईयर 26 के कुल रेवेन्यू में दोबारा ख़रीदारी करने वाले ग्राहकों की हिस्सेदारी 54 प्रतिशत रही. इससे नए ग्राहक जुटाने और हर बिक्री पर होने वाला ख़र्च कम करने में मदद मिली. विज्ञापन पर होने वाला ख़र्च भी रेवेन्यू के 9 प्रतिशत से घटकर 6.6 प्रतिशत रह गया.
सोने की क़ीमतों से भी एक अतिरिक्त फ़ायदा मिला. BlueStone अपनी कुछ गोल्ड इन्वेंट्री को अनहेज्ड रखती है, जिससे फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में क़रीब ₹150 करोड़ का नॉन-कैश इन्वेंट्री गेन हुआ. इसे, साथ ही स्टॉक ऑप्शन ख़र्च और लीज़ अकाउंटिंग के असर को हटाकर देखें, तो EBITDA ₹180.6 करोड़ रहा, यानी 7.4 प्रतिशत मार्जिन, जबकि एक साल पहले यह सिर्फ़ 1 प्रतिशत था. वहीं एडजस्टेड स्टैंडअलोन मुनाफ़ा ₹9.8 करोड़ रहा, जबकि पिछले साल ₹128 करोड़ का घाटा हुआ था.
मुनाफ़ा कम है, कैश की कहानी और मुश्किल
अगर BlueStone मुनाफ़ा कमा रही है, तो फिर FY26 में इसने ₹199 करोड़ का ऑपरेटिंग कैश क्यों ख़र्च कर दिया? जवाब है इन्वेंट्री. BlueStone ख़ुद अपनी ज्वेलरी डिज़ाइन और मैन्युफ़ैक्चर करती है, इसलिए ग्राहक के पैसे चुकाने से पहले ही उसे सोना, प्रोडक्शन और स्टोर डिस्प्ले के लिए पैसा लगाना पड़ता है. IPO से जुटाए गए ₹1,540 करोड़ में से ₹750 करोड़ वर्किंग कैपिटल के लिए अलग रखे गए थे.
फ़ाइनेंशियल 26 में इन्वेंट्री 62 प्रतिशत बढ़कर ₹2,672 करोड़ पर पहुंच गई, जबकि रेवेन्यू सिर्फ़ 38 प्रतिशत बढ़ा और जून तक यह ₹2,800 करोड़ को पार कर गई. प्रति स्टोर इन्वेंट्री 31 प्रतिशत बढ़कर ₹7.9 करोड़ हो गई, जबकि प्रति स्टोर रेवेन्यू सिर्फ़ 11 प्रतिशत बढ़ा. BlueStone की इन्वेंट्री भी पहले से धीमी रफ़्तार से बिकी, फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में इन्वेंट्री सिर्फ़ 1.1 गुना, यानी लगभग हर 11 महीने में एक बार टर्न हुई, जबकि फ़ाइनेंशियल ईयर 24 में यह 1.8 गुना थी. वहीं Titan में यह आंकड़ा 2.2 गुना और Kalyan में 3 गुना है. पुराने स्टोर 1.7 से 1.9 गुना की रफ़्तार हासिल कर लेते हैं, लेकिन विस्तार अब भी काफ़ी कैपिटल-इंटेंसिव बना हुआ है.
फंडिंग की स्थिति बेहतर हुई है, डेट-टू-इक्विटी घटकर आधा यानी 0.92 गुना रह गया है और इंटरेस्ट कवर बढ़कर 1.85 गुना हो गया है. लेकिन मार्च 2026 तक, वर्किंग कैपिटल के लिए अलग रखे गए ₹750 करोड़ में से ₹725 करोड़ ख़र्च हो चुके थे, यानी सिर्फ़ ₹25 करोड़ बचे थे. फ़ाइनेंशियल ईयर 27 में ₹275 करोड़ का लॉन्ग-टर्म डेट मैच्योर होने वाला है, ऐसे में BlueStone को ग्रोथ फंड करने के लिए अपने दम पर ज़्यादा कैश जनरेट करना होगा.
फ़ाइनेंशियल ईयर 30 के लिए क्या ज़रूरी है
मैनेजमेंट का लक्ष्य फ़ाइनेंशियल ईयर 30 तक 700 से ज़्यादा स्टोर और ₹12,000 करोड़ का रेवेन्यू है, जिसमें 20 प्रतिशत ग्रोथ नए स्टोर से और 30 प्रतिशत सेम-स्टोर सेल्स से आने की उम्मीद है. स्टोर की संख्या बढ़ाना तो आसान हिस्सा है. इसके लिए हर स्टोर से क़रीब ₹17 करोड़ का रेवेन्यू चाहिए, जबकि आज यह आंकड़ा ₹7.2 करोड़ है और तीन साल से पुराने स्टोर के लिए भी सिर्फ़ ₹14 करोड़ है.
यही वजह है कि सेम-स्टोर ग्रोथ का अनुमान असली इम्तिहान बन जाता है. तीन साल से पुराने स्टोर नेटवर्क की हिस्सेदारी 46 प्रतिशत है, यह हिस्सा हर तिमाही बढ़ रहा है और इनकी ग्रोथ बाक़ी नेटवर्क से धीमी है. नेटवर्क का दूसरा हिस्सा नया है: फ़ाइनेंशियल ईयर 26 तक, 340 में से 148 स्टोर दो साल से कम पुराने हैं और तेज़ ग्रोथ यहीं से आनी है. 30 प्रतिशत का औसत बनाए रखने के लिए, इन्हें बहुत तेज़ रफ़्तार से बढ़ना होगा, वह भी तब जब ये ख़ुद धीरे-धीरे उसी पुराने, धीमे समूह में शामिल होते जाएंगे. यह सिर्फ़ एक्ज़िक्यूशन का सवाल नहीं है. यह इस बात का सवाल है कि रिटेल नेटवर्क उम्र के साथ कैसे बदलते हैं.
इसकी सीमित मौजूदगी इस काम को और मुश्किल बनाती है. BlueStone का ख़ास डिज़ाइन आधारित, स्टडेड-हेवी प्रस्ताव शहरी बाज़ारों में अच्छा चलता है, लेकिन इसका दायरा असीमित नहीं है. उत्तर भारत के ज़्यादातर हिस्सों में शादी की मांग अब भी पारंपरिक 22-कैरेट सोने पर टिकी है, जिसे इसकी 14 से 18-कैरेट रेंज पूरा नहीं करती. सेम-स्टोर ग्रोथ भी मुफ़्त में नहीं मिलती: मौजूदा इन्वेंट्री टर्न के हिसाब से, स्टोर के रेवेन्यू में हर एक अतिरिक्त रुपये के लिए पहले शोकेस में लगभग एक रुपये की ज्वेलरी लगानी पड़ती है.
शेयर प्राइस में क्या मान लिया गया है
BlueStone का P/E अभी किसी काम का नहीं है. सिर्फ़ ₹13 करोड़ के मुनाफ़े के मुक़ाबले, यह सैकड़ों में पहुंच जाता है. जब तक मार्जिन स्थिर नहीं होते, तब तक रेवेन्यू एक बेहतर पैमाना है और इस हिसाब से BlueStone का शेयर अपनी सेल्स के क़रीब 5 गुने पर ट्रेड कर रहा है, जो लगभग Titan के बराबर है, जबकि Kalyan के लिए यह आंकड़ा 1.6 गुना और Senco के लिए एक गुने से भी कम है.
अब कोहॉर्ट का गणित आगे बढ़ाकर देखते हैं. मान लीजिए कि नेटवर्क पुराना होने के साथ सेम-स्टोर ग्रोथ घटकर 20 प्रतिशत रह जाती है और नए स्टोर से 20 प्रतिशत और ग्रोथ मिलती है. ऐसे में फ़ाइनेंशियल ईयर 30 का रेवेन्यू क़रीब ₹9,400 करोड़ पर पहुंचेगा, जो टारगेट से कम है. 5 प्रतिशत के नेट मार्जिन पर, जो CaratLane के क़रीब है, यह लगभग ₹470 करोड़ का मुनाफ़ा बनता है. आज का ₹12,000 करोड़ की मार्केट वैल्यू, चार साल बाद होने वाली इस कमाई के मुक़ाबले 26 गुनी है और यह भी सबसे अच्छा अनुमान है, सबसे ख़राब नहीं. BlueStone ने यह साबित कर दिया है कि वह मुनाफ़ा कमा सकती है. अब उसे यह साबित करना है कि वह इस मुनाफ़े को इतना कैश बना सकती है जो उस ग्रोथ को फंड कर सके, जिसके लिए निवेशक पहले से ही क़ीमत चुका रहे हैं. तब तक, बिज़नेस मुनाफ़े में तो है, लेकिन पैसा अब भी ग्रोथ ख़रीदने के लिए वापस ज्वेलरी में ही लग रहा है.
ऐसी और रिसर्च चाहिए?
जब ऊपर दिखने वाले आंकड़े और अंदर का कारोबार, दोनों अलग-अलग कहानी कहें, तब सही फ़ैसला लेना सबसे मुश्किल होता है. वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र ऐसे ही मौक़ों पर गहरी पड़ताल और लगातार नज़र के साथ आपकी मदद करता है, ताकि आप तय कर सकें कि कब ख़रीदना है, कब रखना है और कब निकलना है.
आज ही स्टॉक एडवाइज़र सब्सक्राइब करें!
यह भी पढ़ेंः Ion Exchange के लिए कमज़ोर रही पहली तिमाही, फिर क्यों 10% चढ़ गया शेयर?




