एन.पी.एस.

NPS स्क़ीम का नाम बदल रहा है और एक शब्द आपकी पेंशन की तारीख़ बदल सकता है!

PFRDA ने हर पेंशन स्क़ीम को एक अक्षर दे दिया है, A से E तक. A यानी सबसे ज़्यादा जोख़िम, E यानी सबसे कम. और अब कोई भी ऐप या वेबसाइट, आपको फ़ंड चुनने से पहले सारे विकल्प दिखाएगी.

PFRDA ने हर पेंशन स्क़ीम को एक अक्षर दे दिया है, A से E तक. A यानी सबसे ज़्यादा जोख़िम, E यानी सबसे कम. और अब कोई भी ऐप या वेबसाइट, आपको फ़ंड चुनने से पहले सारे विकल्प दिखाएगी.  Ujjal Das/AI-Generated Image

सारांशः PFRDA ने NPS के लिए वही किया है, जो SEBI ने 2017 में म्यूचुअल फ़ंड के लिए किया था: सबको एक जैसी कैटेगरी में बांटा, नाम पढ़ने लायक़ बनाए और फ़ंड चुनने से पहले तुलना दिखाना ज़रूरी कर दिया. ज़्यादातर लोगों को कुछ करने की ज़रूरत नहीं है. पर काग़ज़ात में लिखा एक शब्द आपकी पेंशन शुरू होने की तारीख़ बदल सकता है.

पेंशन का नियम बनाने वाली संस्था PFRDA ने NPS के लिए वही किया है, जो SEBI ने 2017 में म्यूचुअल फ़ंड के लिए किया था. उसने 28 अगस्त 2026 को दो आदेश जारी किए और उनसे तीन बातें तय हो गईं. पहली, NPS की हर स्क़ीम अब पांच तरह के ख़ानों में बंट गई है. दूसरी, पेंशन फ़ंड ने जो स्क़ीम्स ख़ुद शुरू की हैं, उन सबको A से E तक की पांच कैटेगरी में डालना ज़रूरी हो गया है. और तीसरी, नाम रखने का तरीक़ा भी तय हो गया है, जिससे नाम पढ़कर ही पता चल जाएगा कि उसमें इक्विटी कितनी है. साथ ही, कॉमन स्क़ीम और MSF स्क़ीम के बीच जो फ़र्क़ साल भर से चला आ रहा था, वो भी ख़त्म हो गया है.

अच्छी बात यह है कि ज़्यादातर लोगों को इसके लिए कुछ करना ही नहीं है. अगर आपका NPS लाइफ़साइकिल या एक्टिव चॉइस के ज़रिए चल रहा है, तो आपके खाते में कुछ नहीं बदलेगा. और अगर आपने पेंशन फ़ंड की शुरू की हुई कोई नई स्क़ीम ली है, तो 30 दिन के अंदर उसका नाम बदल सकता है और 45 दिन के अंदर उसे किसी दूसरी स्क़ीम में मिलाया भी जा सकता है. आपके लिए बस इतना काम बचा है कि इस नए ढांचे को 15 मिनट देकर समझ लें. असल में, अब हर जगह स्क़ीम्स इसी तरीक़े से दिखेंगी, किसी और तरीक़े से नहीं.

अब हर स्क़ीम की एक तय जगह है, और नाम भी पढ़ने लायक़

अब पांच तरह की स्क़ीम्स हैं. लाइफ़साइकिल स्क़ीम आपकी उम्र के हिसाब से ख़ुद तय करती रहती हैं कि पैसा इक्विटी, कॉर्पोरेट बॉन्ड और सरकारी बॉन्ड में कितना-कितना जाएगा और इसकी चार किस्में हैं, यानी एग्रेसिव, 75 हाई, 50 मॉडरेट और 25 लो. एक्टिव चॉइस में आप ख़ुद तय करते हैं कि पैसा कहां जाएगा, जहां टियर I में इक्विटी की लिमिट 75% है और टियर II में कोई लिमिट नहीं. NPS संचय असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए बनी एक मिली-जुली स्क़ीम है, जिसमें इक्विटी की लिमिट 25% है. MSF में वो स्क़ीम्स आती हैं, जिन्हें अलग-अलग पेंशन फ़ंड ने PFRDA से मंज़ूरी लेकर ख़ुद शुरू किया है. और NPS वात्सल्य, NPS स्वास्थ्य और NPS MSME जैसी 4A स्क़ीम्स अपने अलग नियमों और अपने ही ख़र्च पर चलती रहेंगी.

असल बदलाव MSF वाली स्क़ीमों में हुआ है. अब इनमें से हर स्क़ीम को उन पांच कैटेगरी में से ठीक एक में बैठना होगा. और कौन सी कैटेगरी मिलेगी, यह इस बात से तय होगा कि उसमें इक्विटी कितनी है.

अब एक अक्षर से पता चलेगा, इक्विटी कितनी है

MSF की हर कैटेगरी में इक्विटी का तय दायरा (कुल रकम का फ़ीसदी)

ऐग्रेसिव ग्रोथ, वेरी हाई रिस्क

हाई ग्रोथ, हाई रिस्क

बैलेंस्ड ग्रोथ, मीडियम रिस्क

कंज़र्वेटिव

डेट (सरकारी / कॉरपोरेट बॉन्ड)

सोर्स: PFRDA सर्कुलर PFRDA / 2026/47/REG-PF/10, 28 अगस्त 2026. एक पेंशन फ़ंड हर कैटेगरी में हर टियर पर दो स्क़ीम तक दे सकता है.

अगर कोई स्क़ीम दो कैटेगरी के बीच में पड़ती है, तो उसे 30 दिन के अंदर बदलकर किसी एक कैटेगरी में लाना होगा. और कोई भी फ़ंड, हर कैटेगरी और हर टियर में, ज़्यादा से ज़्यादा दो स्क़ीम्स ही रख सकेगा. इससे ज़्यादा जो स्क़ीम्स हैं, उन्हें 45 दिन के अंदर या किसी दूसरी स्क़ीम में मिलाना होगा, या बंद करना होगा. और यह करने से पहले निवेशकों को बताना होगा.

नाम से ही सब पता चल जाएगा

कैटेगरी का वो अक्षर अब नाम में ही दिखेगा. और नाम का तरीक़ा तय है. पहले पेंशन फ़ंड का छोटा नाम, फिर "NPS", फिर वो अक्षर, फिर स्क़ीम का नाम. और अगर टियर II का मामला हो, तो आख़िर में "Tier 2".

एक उदाहरण से समझिए. "XYZ NPS A Retirement Scheme" का मतलब है, XYZ की एक बहुत ज़्यादा जोख़िम वाली इक्विटी स्क़ीम. और "XYZ NPS E Retirement Scheme Tier 2" का मतलब है, टियर II खाते की एक डेट स्क़ीम. A में इक्विटी सबसे ज़्यादा होती है, E में सबसे कम. यानी अब आप किसी भी स्क़ीम का नाम पढ़कर ख़ुद समझ सकते हैं कि वो किस तरह की है.

फ़ंड आप सबसे आख़िर में चुनेंगे

इन आदेशों ने यह भी तय कर दिया है कि स्क़ीम्स आपको बेची कैसे जाएंगी. अब हर जगह, जिसमें CRA भी शामिल हैं, आपसे पहले यह पूछा जाएगा कि आप किस तरह की स्क़ीम चाहते हैं. फिर यह कि कौन सी कैटेगरी. और सबसे आख़िर में यह कि कौन सा पेंशन फ़ंड.

उस आख़िरी चुनाव से पहले, आपको उस कैटेगरी की सारी स्क़ीम्स दिखाई जाएंगी, सभी फ़ंड की, एक साथ अगल-बगल. साथ में उनका रिटर्न, बेंचमार्क का रिटर्न, ख़र्च, रिस्कोमीटर, AUM और शुरू होने की तारीख़ भी. यानी अब आप फ़ंड मैनेजर को आंकड़े देखकर चुनेंगे. यह उस पुराने तरीक़े को पूरा उल्टा कर देता है, जिससे अब तक ज़्यादातर NPS खाते बेचे जाते रहे हैं.

कुछ और नियम भी जान लीजिए. एक PRAN के तहत आप लाइफ़साइकिल या एक्टिव चॉइस, इनमें से एक वक़्त पर सिर्फ़ एक ही रख सकते हैं. पर MSF की कई स्क़ीम्स साथ में रख सकते हैं. और आपको हर खाते पर, हर वित्त वर्ष में दो बार बदलाव करने का हक़ मिलता है. अगर आप फ़ंड और स्क़ीम, दोनों एक साथ बदलते हैं, तो वो एक ही बदलाव गिना जाएगा.

स्क़ीम बदलने पर घड़ी वही रहती है, मिलाने पर नई शुरू होती है

अब वो एक नियम, जो लापरवाही करने पर महंगा पड़ सकता है.

अगर आप अपनी स्क़ीम बदलते हैं, तो आपके खाते का पूरा इतिहास वैसा ही रहता है. यानी आपकी वेस्टिंग और बीच में पैसा निकालने की गिनती, उसी तारीख़ से चलेगी जब आपने खाता खोला था, चाहे आप किसी भी स्क़ीम में जाएं.

पर अगर आपकी एक स्क़ीम को दूसरी में मिला दिया जाता है, तो वो मिलाया गया पैसा अब नई स्क़ीम की शर्तों पर चलेगा, जिसमें उसकी वेस्टिंग अवधि और पैसा निकालने की लिमिट भी शामिल है.

PFRDA ने ख़ुद एक उदाहरण देकर यह फ़र्क़ साफ़ किया है. मान लीजिए किसी ने अप्रैल 2026 में स्क़ीम A खोली, और 2029 में स्क़ीम B में चला गया. तो उसकी घड़ी 2026 से ही चलती रहेगी. पर अगर उसकी स्क़ीम A को B में मिला दिया गया, तो अब उस पर B के नियम चलेंगे. सीधी बात यह है: स्क़ीम बदलने पर आपका पुराना हिसाब बचा रहता है और मिलाने पर नई स्क़ीम का हिसाब लागू हो जाता है.

एक और बात, जो ध्यान देने लायक़ है. अगर आपकी कोई स्क़ीम बंद हो जाए और आप ख़ुद कुछ न चुनें, तो आपका पैसा उसी फ़ंड की लाइफ़ साइकल 50 मॉडरेट स्क़ीम में, टियर I के तहत डाल दिया जाएगा. उसमें इक्विटी 50% रहती है और हो सकता है वो उससे बिल्कुल अलग हो जो आपने ख़रीदा था.

एक ऐसा बदलाव, जिसमें आपको कुछ नहीं करना

कुल मिलाकर, इससे NPS आसान हो जाता है. एक जैसी कैटेगरी, पढ़ने लायक़ नाम, और फ़ंड चुनने से पहले तुलना दिखाना, ये तीनों मिलकर NPS में वो साफ़गोई ले आते हैं, जो म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों को 2017 से मिल रही है.

ये नियम सरकारी क्षेत्र के खातों पर लागू नहीं होते और 4A स्क़ीम्स भी अपनी अलग राह पर चलती रहेंगी.

तो आपको इतना ही करना है. A से E तक की यह सीढ़ी समझ लीजिए. सितंबर में जब नाम बदलने की चिट्ठी आए, तो सिर्फ़ उसका विषय मत पढ़िए, पूरा पढ़िए, कि कहीं स्क़ीम बदलने या मिलाने की बात तो नहीं लिखी. और अपनी स्क़ीमों को एक जगह लाने से पहले, यह ज़रूर देख लीजिए कि काग़ज़ में "बदलाव" (change) लिखा है या "मिलाना" (merge). आपकी पेंशन शुरू होने की तारीख़ उसी एक शब्द पर टिकी है.

यह भी पढ़ें: नए टैक्स रिज़ीम में बची आख़िरी बड़ी टैक्स की छूट

ये लेख पहली बार सितंबर 01, 2026 को पब्लिश हुआ.

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