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पाठक का सवाल: ELSS फ़ंड के परफ़ॉर्मेंस सेक्शन में YTD लिखा होता है, इसका क्या मतलब है?
YTD (year-to-date) रिटर्न यह बताता है कि किसी म्यूचुअल फ़ंड ने चालू साल के 1 जनवरी से लेकर जिस तारीख़ को आप देख रहे हैं, उस तक कितना फ़ायदा या नुक़सान हुआ है. निवेशकों के लिए यह फ़ंड की मौजूदा साल की तस्वीर है, न कि उसके लंबे ट्रैक रिकॉर्ड का सटीक पैमाना.
हिसाब सीधा है. अगर किसी फ़ंड का NAV 31 दिसंबर 2025 को ₹100 था और 30 अप्रैल 2026 तक बढ़कर ₹105 हो गया, तो YTD रिटर्न 5 प्रतिशत हुआ. यह 5 प्रतिशत सिर्फ़ जनवरी से अप्रैल के चार महीनों का है, इससे पहले का कुछ नहीं. VRO के परफ़ॉर्मेंस पेज पर जो YTD दिखता है, वह 1 जनवरी से शुरू होकर हमेशा इसी तरीक़े से कैलकुलेट होता है.
YTD की एक ख़ास बात यह है कि यह हर साल की शुरुआत में अपने आप रीसेट हो जाता है. इसलिए अलग-अलग साल के YTD की तुलना काफ़ी हद तक हो सकती है, बशर्ते वो साल के एक ही महीने के हों. मसलन, अप्रैल 2026 का YTD और अप्रैल 2027 का YTD - दोनों बताते हैं कि फ़ंड ने उस-उस साल के पहले चार महीनों में कैसा प्रदर्शन किया.
लेकिन एक ही साल के अप्रैल और अक्तूबर के YTD की तुलना नहीं होती, क्योंकि दोनों अलग-अलग लंबी अवधि को कवर करते हैं. यही YTD की एक सीमा है - यह साल के भीतर एक चलती-फिरती खिड़की है, इसलिए एक ही साल के दो अलग-अलग महीनों के YTD की आपस में तुलना नहीं की जाती. और एक जैसे दिखने वाले दो अप्रैल के आंकड़े भी असल में कुछ अलग ही बता रहे होते हैं.
YTD और ट्रेलिंग रिटर्न में फ़र्क़ क्या है?
ट्रेलिंग रिटर्न और YTD रिटर्न में एक बुनियादी फ़र्क़ है - शुरुआती तारीख़ का. ट्रेलिंग रिटर्न एक तय समय की विंडो को मापता है जो आज की तारीख़ पर ख़त्म होती है. मसलन, एक साल का ट्रेलिंग रिटर्न हमेशा पिछले 365 दिन का होता है, चाहे आप कभी भी देखें. YTD हमेशा 1 जनवरी से शुरू होता है, चाहे साल में कितने भी दिन बीत चुके हों.
यह फ़र्क़ ज़्यादातर निवेशकों की सोच से कहीं ज़्यादा अहम है. लोग अक्सर मान लेते हैं कि जिस फ़ंड का एक साल का ट्रेलिंग रिटर्न अच्छा है, उसका YTD भी पॉज़िटिव होगा. लेकिन ऐसा ज़रूरी नहीं. मान लीजिए कोई फ़ंड अप्रैल 2025 से मार्च 2026 के बीच अच्छा रहा, तो 30 मार्च 2026 को उसका एक साल का ट्रेलिंग रिटर्न मज़बूत दिखेगा. लेकिन अगर उसी फ़ंड में जनवरी-फ़रवरी 2026 में तेज़ गिरावट आई, तो YTD नेगेटिव होगा - जबकि ट्रेलिंग रिटर्न देखने में ठीक लग रहा है. YTD सिर्फ़ उन मुश्किल महीनों को पकड़ता है; ट्रेलिंग रिटर्न पूरे साल को - पहले के अच्छे दौर समेत - दिखाता है, इसलिए वह फ़ंड के प्रदर्शन का ज़्यादा सटीक पैमाना है.
YTD कब भ्रामक हो सकता है?
चालू कैलेंडर वर्ष से परे YTD कुछ नहीं बताता. यह नहीं दिखाता कि फ़ंड ने 2020 के मार्केट क्रैश में कैसा व्यवहार किया, रिकवरी कैसी रही, या लंबे वक़्त में रिटर्न कितना टिकाऊ रहा. किसी फ़ंड का YTD शानदार हो सकता है, लेकिन हो सकता है कि वह पिछले तीन साल से अपने बेंचमार्क से पिछड़ता रहा हो - यह सिर्फ़ ट्रेलिंग या रोलिंग रिटर्न से पता चलेगा. इसीलिए YTD को अकेले फ़ंड के आकलन के लिए इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, यह एक बेहद संकरी झलक देता है. और सबसे ज़रूरी बात - चाहे YTD हो या कोई और रिटर्न, अगर आप उसकी तुलना किसी बहुत अलग टाइम फ़्रेम वाले पैमाने से करेंगे, तो नतीजे हमेशा उलझाने वाले ही रहेंगे.
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ये लेख पहली बार मई 01, 2026 को पब्लिश हुआ.
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