
सारांशः अपने इक्विटी पोर्टफ़ोलियो में लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप फ़ंड्स का कितना हिस्सा होना चाहिए? धीरेंद्र कुमार एक समझदारी भरा स्प्लिट और उससे भी ज़्यादा ज़रूरी उस सोच के बारे में बता रहे हैं, जो इस एलोकेशन के पीछे होनी चाहिए. यह तर्क भारतीय बाज़ार की बनावट से ही जुड़ा है.
हर इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड निवेशक के सामने एक सवाल ज़रूर आता है: लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप फ़ंड्स में रक़म कैसे बांटें? स्मॉल कैप्स पर बहुत ज़्यादा दांव लगाओ तो जोख़िम ज़रूरत से ज़्यादा हो जाता है और बहुत सतर्क रहो तो अच्छे रिटर्न से चूक सकते हो.
तो सही मिश्रण क्या है? धीरेंद्र कुमार इसके बारे में इस तरह सोचने की सलाह देते हैं.
सबसे बेहतर यही है कि अपनी रक़म किसी ऐसे शख़्स को सौंपें जो इसे सही तरीक़े से एलोकेट करे. लेकिन आम तौर पर देखें तो 65-70 प्रतिशत लार्ज-कैप फ़ंड्स में, 20 प्रतिशत मिड-कैप फ़ंड्स में और 10-15 प्रतिशत स्मॉल-कैप फ़ंड्स में होना चाहिए.
अगर भारत के इक्विटी यूनिवर्स का विश्लेषण करें तो यही स्ट्रक्चर सामने आता है. मिसाल के तौर पर, लार्ज कैप्स भारतीय बाज़ार के कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन का 65-70 प्रतिशत हिस्सा हैं. इस तरह आपका पोर्टफ़ोलियो भारतीय बाज़ार का एक ठीक-ठाक प्रतिनिधित्व करता है और साथ ही अच्छे शेयरों को चुनने की क्षमता भी दिखाता है. भारत में 3,000 से ज़्यादा लिस्टेड स्टॉक्स हैं, लेकिन आपके पोर्टफ़ोलियो में आमतौर पर 100 से ज़्यादा नहीं होते. तो उम्मीद है, यह बेहतर प्रदर्शन करेगा.
हर फ़ंड कैटेगरी कहां निवेश करती है
- लार्ज-कैप फ़ंड्स: ये मुख्य रूप से भारत के मार्केट कैपिटलाइजेशन के लिहाज़ से 100 सबसे बड़ी लिस्टेड कंपनियों में निवेश करते हैं (SEBI का नियम है कि कम से कम 80 प्रतिशत लार्ज-कैप्स में हो).
- मिड-कैप फ़ंड्स: ये फ़ंड्स मुख्य रूप से मार्केट कैपिटलाइजेशन में 101वीं से 250वीं रैंक की कंपनियों में निवेश करते हैं (कम से कम 65 प्रतिशत मिड-कैप्स में).
- स्मॉल-कैप फ़ंड्स: ये मुख्य रूप से मार्केट कैपिटलाइजेशन में 251वीं और उससे आगे की रैंक वाली कंपनियों में निवेश करते हैं (कम से कम 65 प्रतिशत स्मॉल-कैप्स में).
और गाइडेंस चाहिए?
यह तय करना मुश्किल लग रहा है कि आपके पोर्टफ़ोलियो में लार्ज, मिड या स्मॉल-कैप्स का कितना हिस्सा होना चाहिए, या आपके गोल्स के हिसाब से कौन से फ़ंड सही रहेंगे? Value Research Fund Advisor आपकी फ़ाइनेंशियल ज़रूरतों को समझकर उसी के मुताबिक़ पोर्टफ़ोलियो बनाने में मदद करता है.
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ये लेख पहली बार जून 10, 2026 को पब्लिश हुआ.