मेरी निवेश यात्रा

एक नई शुरुआत

कभी अरुण के पास 22 फ़ंड्स हुआ करते थे पर जैसे ही उन्हें अपनी ग़लती का एहसास हुआ, उन्होंने अपने फ़ंड्स का नंबर कम करने का फ़ैसला किया

कभी अरुण के पास 22 फ़ंड्स हुआ करते थे पर जैसे ही उन्हें अपनी ग़लती का एहसास हुआ, उन्होंने अपने फ़ंड्स का नंबर कम करने का फ़ैसला किया

तमिलनाडु के एक गांव में जन्मे और पले-बढ़े, 33 साल के अरुणकुमार पी. जी. फ़िलहाल बैंगलोर में रहते हैं। पेशे से सॉफ़्टवेयर इंजीनियर अरुण, अपनी डॉक्टर पत्नी और एक साल की बेटी के साथ रहते हैं। उनके परिवार में माता-पिता हैं जो तमिलनाडु में रहते हैं और अरुण का एक छोटा भाई है।
जब अरुण से पूछा गया कि काम के अलावा उन्हें क्या पसंद है, तो उनका जवाब था, "क़िताबें, क़िताबें, क़िताबें और फ़िल्में, फ़िल्में, फ़िल्में। और कुछ नहीं!" पांचवीं तक गांव में पंचायत के स्कूल में पढ़ने, और फिर पास के क़स्बे में 10वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद अरुण आज भी अपनी जड़ों से जुड़े हुए हैं। पुरानी बातें याद करते हुए अरुण कहते हैं, "खाने-पीने और पढ़ाई-लिखाई जैसे हमारे सभी ज़रूरी ख़र्च खेती से पूरे होते थे। तब बहुत ख़ुशी होती थी, जब धान और गन्ने की फ़सल खेतों में तैयार हो जाती थी।" आज भी अरुण के पिता खेत पर काम करते हैं। अरुण बताते हैं, "हम खेती हमेशा जारी रखेंगे क्योंकि ये हमारी जीवन शैली का अहम हिस्सा है।"
अरुण को पैसों की दिक़्क़त कभी महसूस नहीं हुई, उनके मुताबिक़, "मेरे बचपन में, पिता हमेशा ही पैसों की मेरी सारी ज़रूरत पूरी कर दिया करते थे, तब मैं सोचा करता था कि मेरे पिता की जेब में ही पैसे बनते हैं!"

म्यूचुअल फ़ंड की दुनिया में क़दम
वेल्लोर इस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी से 2007 में इलैक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बी. टेक के बाद अरुण भारत की हाई-टेक इंडस्ट्री के केंद्र, बैंगलोर आ गए। हालांकि, निवेश का उनका सफ़र 2012 में ही शुरु हो पाया।
अरुण ऐसे परिवार से हैं, जहां निवेश की कभी बातें ही नहीं हुई। म्यूचुअल फ़ंड्स के बारे में उन्होंने पहली बार तब जाना, जब उन्हें टैक्स बचाने की ज़रूरत पड़ी। इसके लिए अरुण ने अपने दोस्त की मदद ली। इस दौर को याद करते हुए वो कहते हैं, "जब मैं टैक्स बचाने के लिए निवेश के विकल्प की तलाश में था, तो मेरे ऑफ़िस के एक साथी ने मुझे इक्विटी-लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) के बारे में बताया।"
अरुण को ELSS के कई फ़ायदे पता चले, जैसे - टैक्स-बचाने के दूसरे तरीक़ों से कम का लॉक-इन पीरियड, या लंबे समय में मंहगाई से ज़्यादा रिटर्न देने की क्षमता। ये सब जानने-समझने के बाद अरुण ने एक अच्छे ELSS फ़ंड की तलाश शुरु कर दी। यही वो वक़्त था जब वो पहली बार वैल्यू रिसर्च की वेबसाइट पर आए। और इसी के बाद उन्होंने अपनी पहली SIP की शुरुआत, एक्सिस लॉंग टर्म इक्विटी फ़ंड से की।
बदक़िस्मती से इसी समय, उनके बड़े भाई की मृत्यु हो गई। अपने परिवार को भावनात्मक और आर्थिक मदद देने के नज़रिए से उन्होंने म्यूचुअल फ़ंड की तलाश शुरु कर दी। एक ज़िम्मेदार व्यक्ति के तौर पर वो कहते हैं, "मेरे बड़े भाई, हमारे पूरे परिवार के लिए ऊर्जा का स्रोत रहे थे। उनके जाने के बाद, मैं अपने परिवार को आर्थिक तौर पर सुरक्षित करना चाहता था।"
हालांकि उनकी ये तलाश, उन्हें कुछ ज़्यादा ही आगे ले गई। क्योंकि अरुण ने सिर्फ़ रिटर्न को दिमाग़ में रख कर निवेश शुरु किया, इसलिए उन्होंने लार्ज-कैप में ज़्यादा निवेश करने वाले और फ़ाइव-स्टार रेटिंग के ढ़ेर सारे फ़ंड्स में निवेश करना शुरु कर दिया। नतीजा ये हुआ कि उनका पोर्टफ़ोलियो बड़ा होने लगा। जो बढ़ते-बढ़ते 22 फ़ंड्स का हो गया।
अरुण अपनी इस ग़लती को बिना झिझक स्वीकार करते हैं। अरुण कहते हैं, "मैं सिर्फ़ फ़ाइव-स्टार, कम रिस्क वाले और ऊंचे रिटर्न वाले फ़ंड्स देख रहा था, जो सही तरीक़ा नहीं है और मैं इसे अपनी ग़लती मानता हूं।" मगर, लगातार और सिस्टमैटिक तरीक़े से पांच साल तक निवेश करने, और SIP की रक़म को अपनी सैलरी के इन्क्रिमेंट के साथ बढ़ाते जाना, उनका सही फ़ैसला था।
रेटिंग्स की लगातार बदलने वाली प्रकृति को समझने के बाद, अब अरुण फ़ंड में निवेश से पहले कई चीज़ों की गहराई से पड़ताल करते हैं, जैसे - फ़ंड की कैटेगरी, रिस्क प्रोफ़ाइल, उतार-चढ़ाव को सहन करने की क्षमता, फ़ंड मैनेजर का फ़ंड के साथ बने रहना आदि।
अरुण के मुताबिक़ वैल्यू रिसर्च, फ़ाइनांस की दुनिया की गाइड है, वो कहते हैं, "मैं वैल्यू रिसर्च का लोहा मानता हूं कि वो बहुत से लोगों की मदद करते हैं। मुझे भी वैल्यू रिसर्च पढ़ने के बाद ही एहसास हुआ कि केवल बचत ही नहीं, उससे भी ज़्यादा ज़रूरी है निवेश करना। वैल्यू रिसर्च वेबसाइट के हर आर्टिकल ने मेरी म्यूचुअल फ़ंड की जानकारी बढ़ाई है। मुझे धीरेंद्र कुमार के यू-ट्यूब चैनल के वीडियो भी बहुत पसंद हैं।"
एक नई शुरुआत
क़रीब पांच साल तक, 22 फ़ंड्स में निवेश के बाद, पिछले साल अरुण ने अपने पोर्टफ़ोलियो को छोटा करने का फ़ैसला किया, और अपने ऑफ़िस के एक इन्डिपेंडेंट फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र (IFA) से मिले। अपने इस क़दम का श्रेय वो धीरेंद्र कुमार की सलाह को देते हैं, जिसमें कहा गया था कि डाइवर्सिफ़िकेशन के लिए तीन या चार फ़ंड ही बहुत होते हैं।
उनके IFA ने उनके पोर्टफ़ोलियो का पूरा फ़ाइनेंशियल चेकअप किया और उनके जीवन के अहम गोल तय करने में उनकी मदद की। बेटी की हायर-एजुकेशन और उसकी शादी, और अपने रिटायरमेंट का कॉर्पस जैसे गोल, आज उनकी प्लानिंग में शामिल हो चुके हैं। उनके सभी गोल, कम-से-कम 15 साल के हैं और 12 प्रतिशत के सालाना रिटर्न का लक्ष्य लिए हुए हैं।
अपने फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र की मदद से, अरुण ने 22 से कम कर के, 4 फ़ंड कर लिए हैं। उनके IFA की सलाह के मुताबिक़, उन्होंने पहले वो यूनिट बेचीं, जो शॉर्ट-टर्म कैपिटल-गेन्स के दायरे में नहीं थीं और फिर उनके पैसे को सिस्टमैटिक ट्रांसफ़र प्लान (STP) से नए फ़ंड में निवेश कर दिया। एक साल बाद, वो बाक़ी की यूनिट्स बेच रहे हैं और उससे मिलने वाले पैसे को STP से निवेश कर रहे हैं। इन फ़ंड्स को बेचने के समय तक, उनके पोर्टफ़ोलियो का सालाना रिटर्न क़रीब 14 प्रतिशत है।
अरुण के निवेश
जब हमने अरुण से उनके एसेट एलोकेशन के बारे में बात की, तो उन्होंने बताया कि वो उनके ज़्यादातर निवेश इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड्स में ही है। वो कुल ₹35,000 का निवेश करते हैं, जो आदित्य बिरला सन लाइफ़ फ़्रंटलाइन इक्विटी फ़ंड, डीएसपी इक्विटी ऑपर्च्युनिटीज़ फ़ंड, एचडीएफ़सी मिड-कैप ऑपर्च्युनिटीज़ फ़ंड और एल एंड टी इमर्जिंग बिज़नस फ़ंड में है। उनका प्लान है कि पूरे अनुशासन के साथ अपने पोर्टफ़ोलियो को बढ़ाते हुए, वो हाल ही में शुरु की SIP को अपनी आमदनी बढ़ने के साथ-साथ बढ़ाते जाएंगे।
अपने इमर्जेंसी कॉर्पस की शत प्रतिशत सेफ़्टी रखने के लिए, वो ज़्यादातर फ़िक्स्ड डिपॉज़िट्स पर निर्भर करते हैं और अपने निवेश का बहुत थोड़ा ही हिस्सा डेट फ़ंड में लगाते हैं। उनके पास फ़िक्स्ड डिपॉज़िट में ₹10 लाख हैं और डेट फ़ंड में ₹1 लाख। उनकी इंश्योरेंस की ज़रूरत के लिए, अरुण के पास ₹9 लाख का हेल्थ कवर है जो उनकी कंपनी की तरफ़ से है। वो अपनी तरफ़ से भी पर्सनल हेल्थ कवर लेने की सोच रहे हैं। उनके पास ₹50 लाख का टर्म इंश्योरेंस भी है।
जहां अरुण को अभी भी अपने निवेश का लंबा सफ़र तय करना है, जिसका पोर्टफ़ोलिया साफ़-सुथरा हो, उन्हें लगता है कि फ़ंड्स में आने वाले उतार-चढ़ावों के लिए वो पहले से बेहतर तरीक़े से तैयार हैं। बहुतों की तरह, अरुण 45 साल की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं। मगर जो बात उनके रिटायरमेंट प्लान को शानदार बनाती है, वो है उनका रिटायरमेंट के बाद का प्लान। होटलों को पसंद करने वाले अरुण, अपने रिटायरमेंट के बाद अपना ख़ुद का होटल खोलना चाहते हैं। "मैं होटलों का फ़ैन हूं। जिस तरह वो खाना बनाते हैं, मैनेज करते हैं, खाना सर्व करते हैं वो सब मुझे बहुत पसंद है। इसीलिए, मैंने होटल खोलने की ज़रूरत के लिए कैपिटल जमा करना शुरु कर दिया है," अपना ये प्लान हमारे साथ शेयर करने के बाद, होने वाले होटल के मालिक ने विदा ली।
ये स्टोरी पहली बार अक्टूबर 2019 में म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट में प्रकाशित हुई थी।
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ये लेख पहली बार जून 20, 2022 को पब्लिश हुआ.

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