
म्युचुअल फंड से मिलले वाला डिवीडेंड बैंक के डिपॉजिट के ब्याज से कैसे अलग है ?
-हरीश
डिवीडेंड और ब्याज एक जैसे लगते हैं लेकिन इन पर टैक्स अलग अलग तरीके से लगता है। बैंक डिपॉजिट पर जो ब्याज मिलता है वह आपकी आय में जुड़ जाता है और इस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। अगर आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपए तक है तो इस पर कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे ज्यादा टैक्सेबल इनकम होने पर आप 20 से 30 फीसदी टैक्स स्लैब में आ जाएंगे।
जब आपको डेट म्युचुअल फंड से डिवीडेंड मिलता है तो इस पर लगभग 29 फीसदी डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स लगता है। यह टैक्स फंड कंपनी काट लेती है। ऐसे में अगर आपको 100 रुपए डिवीडेंड मिलता है तो आपके अकाउंट में सिर्फ 71 रुपए मिलेगा जबकि 29 रुपए डिवीडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स के तौर पर कट जाता है।
वहीं इसके विकल्प के तौर पर अगर आप ग्रोथ प्लान चुनते हैं तो आपको टैक्स तभी देना होता है जब आप निवेश बेचते हैं। और टैक्स सिर्फ आपके मुनाफे यानी रिटर्न पर ही लगता है। अगर आप फंड में निवेश तीन साल से अधिक समय तक बनाए रखते हैं तो इंडेक्सेशन बेनेफिट के साथ 20 फीसदी टैक्स लगता है। अगर आप निवेश तीन साल से पहले बेच देते हैं तो रिटर्न आपकी इनकम में जुड़ जाता है। तो टैक्स बचाने के लिहाज से ग्रोथ प्लान ज्यादा बेहतर है।
और बड़ा अंतर दोनों निवेश के मूल चरित्र में है। बैंक डिपॉजिट में आपको पता रहता है कि आपको कितना ब्याज मिलेगा। लेकिन म्युचुअल फंड में आपको यह पता नहीं होता है कि कितना रिटर्न मिलेगा। म्युचुअल फंड में रिटर्न बाजार के जोखिम, क्रेडिट जोखिम और दूसरी तरह के जोखिम के आधीन रहता है। हालांकि लंबी अवधि में आपको म्युचुअल फंड में बैंक डिपॉजिट की तुलना में थोड़ा ज्यादा रिटर्न मिलता है।
ये लेख पहली बार जनवरी 31, 2020 को पब्लिश हुआ.
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