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ऐसे समय में जब सब कुछ अनश्चित लग रहा है तो ऐसी चीजों पर फोकस करना बेहतर है जिनका होना निश्चित है

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आजकल हम ऐसे माहौल में रह रहे हैं जहां हर घंटे ब्रेकिंग न्‍यूज आ रही है। अब इस में दिक्‍कत की बात यह है कि अगर ऐसे में कोई अहम ब्रेकिंग न्‍यूज आती है तो हम सोच सकते हैं कि ये भी आम ब्रेकिंग न्‍यूज की तरह से है जो कुछ घंटों में गायब हो जाएगी। दुर्भाग्‍य से अभी हमारे पास ऐसा कुछ है जो महीनों या शायद सालों के लिए ब्रेकिंग न्‍यूज हो सकता है। ऐसा कुछ जिसकी हमको आदत नहीं है। यह इक्विटी और इक्विटी आधारित निवेश के लिए खास तौर पर सच है। दुनिया भर में बिजनेस चैनलों के एंकर स्‍टॉक मार्केट के बारे में लगातार कमेंटरी करते हैं। अगर एक ही चीज सप्‍ताह दर सप्‍ताह और माह दर माह लगातार हो तो उनके लिए थोड़ी मुश्किल हो जाएगी। या ऐसा भी हो सकता है कि उनको पता है कि अपना काम कैसे करना है।
इक्विटी मार्केट में डरावना उतार चढ़ाव दिखाता है कि लोग बाजार को उतना नहीं समझते हैं जितना समझना चाहिए। जब मैं यह आर्टिकल लिख रहा हूं तब सुबह की शुरूआत में ही निचला सर्किट ब्रेकर लग चुका है और बाजार 5000 अंक तक ऊपर चढ़ चुका है। और हो सकता है कि दिन का कारोबार खत्‍म होने से पहले अपर सर्किट ब्रेकर भी लग जाए। आने वाली पीढ़ी को बताने के लिए यह एक कहानी होगी। ऐसा हो क्‍यों रहा है। मेरा मानना है कि समस्‍या मनोवैज्ञानिक है। पंटर्स जल्‍द से जल्‍द इस बात का फैसला करना चाहते हैं कि बाजार पर कितना बुरा असर पड़ने जा रहा है क्‍योंकि वे अभी की दुनिया में जी रहे हैं।
वास्‍तव में यह कहानी अभी शुरू हुई है। इसके आर्थिक नतीजे क्‍या होंगे यह तो दूर की बात है अभी तो यह भी नहीं पता कि मेडिकल सेक्‍टर पर इसका सीधा असर क्‍या होगा। ऐसे में इक्विटी मार्केट तेज उतार चढ़ाव से निवेशकों को डरा रहा है। आम तौर पर अच्‍छे समय में भी इक्विटी मार्केट तेज उतार चढ़ाव से भरा होता है। कहा जाता है कि शेयर कीमतें भविष्‍य का अनुमान हैं। यह अनुमान निवेश की दुनिया में रचे बसे लोगों के बड़े समूह के वास्‍तविक कदमों के आधार पर लगाया जाता है। आम तौर पर इन लोगों पर एक्‍सपर्ट की बातों से ज्‍यादा भरोसा किया जा सकता है। क्‍योंकि एक्‍सपर्ट की बात अगर गलत निकलती है तो उसे इसकी कोई खास कीमत नहीं चुकानी पड़ती है।
तो अभी बाजार हमसे क्‍या कह रहा है। बाजार कह रहा है कि अभी कुछ भी नहीं कहा जा सकता है। मेरे हिसाब से यह ठीक है। अभी अगर सही निष्‍कर्ष निकाला जाए तो यही निष्‍कर्ष निकलेगा कि अभी कोई भी निष्‍कर्ष नहीं निकाला जाना चाहिए। तो एक निवेशक और बचतकर्ता के तौर पर हमें क्‍या करना चाहिए। इसका जवाब वही है जो हमेशा होना चाहिए कि आपको अपनी मौजूदा वित्‍तीय स्थिति पर निर्भर करना चाहिए न कि जो कुछ भी देश के बाहर हो रहा है। अगर आपने इस समय इक्विटी में बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है तो। तो मुझे आपसे कुछ भी नहीं कहना है क्‍योंकि या तो आप पहले से जानते हैं कि आप क्‍या कर रहे हैं या आप किसी की बात नहीं सुनने जा रहे हैं। ऐसे में बेहतर है कि आप निवेश बेच कर बाजार से निकल सकते हैं। वहीं अगर आपका लगभग सारा निवेश फिक्‍स्ड इनकम में है तो आप पहले से ही बाजार से बाहर हैं।
ज्‍यादातर भारतीय दूसरी कैटैगरी यानी फिक्‍स्‍ड इनकम वाले हैं। लेकिन यह आम लोगों के लिए है। लेकिन मैं उम्‍मीद करता हूं कि जो लोग इस आर्टिकल को पढ़ रहे हैं वे दो विपरीत छोर के बीच वाले होंगे। जैसे आपने कई तरह के विकल्‍पों में निवेश किया है और निवेश का एक हिस्‍सा इक्विटी में है। पिछले कुछ दिनों में आपके निवेश की वैल्‍यू बहुत तेजी से गिरी है। निवेश की वैल्‍यू में ऐसी गिरावट के बीच आपको पता नहीं है कि आपको क्‍या करना चाहिए। क्‍या आपको अपना नुकसान कम करने के बारे में सोचना चाहिए और निवेश बेच कर बाजार से निकल लेना चाहिए। इसका कोई सटीक जवाब नहीं है। हालांकि कुछ सामान्‍य बाते हैं जिन पर गौर करना चाहिए। सबसे बुनियादी बात यह है कि तमाम उठा पटक के बावजूद आर्थिक और कारोबारी गतिविधियों को को आगे ले जाने वाली बातें हमेशा के लिए कहीं नहीं जा रही हैं। हो सकता है कि बहुत से चीजें बदल जाएं और अनिश्चितता का माहौल रहे। लेकिन पिछले कुछ दशकों में ऐसा दौर कई बार आया है। इस उठा पटक का नेचर कुछ अलग होगा क्‍योंकि इस संकट की वजह आर्थिक नहीं है। हालांकि काफी कुछ पहले आ चुके संकट की तरह ही होगा। उदाहरण के लिए हमने हमेशा देखा है खराब दौर में कंपनियों की गुणवत्‍ता और ताकत उभर कर आती है। नतीजा यह होता है कि हर कंपनी खराब प्रदर्शन करती है लेकिन अच्‍छी कंपनियां कम खराब प्रदर्शन करतीं हैं और तेजी से रिकवर करती हैं वहीं उनकी प्रस्पिर्धी कंपनियां खराब दौर में डूब जाती हैं। इसका मतलब है कि संकट उन कंपनियों के लिए अच्‍छा होता है जिन कंपनियों को उनकी प्रतिस्‍पर्धी कंपनियों की तुलना में बेहतर तरीके से चलाया जा रहा है। आज इसका उदाहरण देना ठीक नहीं होगा। लेकिन मुझे लग रहा है कि आने वाले समय में भारत में तमाम एयरलाइंस के साथ ऐसा ही होगा।
अब तक आपने जिन संकट का सामना किया है उनकी तुलना में यह संकट इस मायने में अलग है कि यहां चीजें ज्‍यादा अनिश्चित हैं। ऐसे में बेहतर है कि आप ऐसी चीजों पर फोकस करें जो बदलेंगी नहीं न कि उन चीजों पर जिनके बारे में किसी को कुछ पता नहीं है।

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