
आजकल इस बात की चर्चा काफी हो रही है कि पिछले कुछ माह के दौरान इक्विटी निवेशकों की एक नई पीढ़ी इक्विटी मार्केट में कूद पड़ी है। मैंने कुछ समय पहले सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी के इंटरव्यू के बारे में लिखा था। इस इंटरव्यू में त्यागी ने कहा था कि वे भी इसे थोड़ा सतर्कता से देख रहे हैं। जोखिमपूर्ण अटकलों पर अंकुश लगाने के लिए सेबी के द्वारा उठाए गए कदम 1 सितंबर से प्रभावी हो गए हैं।
इक्विटी निवेशकों की संख्या में आए उछाल की वजहें बहुत सारी हो सकती हैं। हो सकता है कि वर्क फ्रॉम होम की वजह से लोगों के पास समय ज्यादा है। क्योंकि उनको ऑफिस आने जाने में समय नहीं लगाना पड़ रहा है। इसके अलावा लोग इक्विटी में रकम लगाकर पैसा बनाने को लेकर ज्यादा जागरूक हो गए हैं। और इसका कारण ब्रोकर्स और दूसरे इंटरमीडियरीज की ज्यादा आक्रामक मार्केटिंग भी हो सकती है। यह कहने की जरूरत नहीं है कि बहुत से नए निवेशक मार्केट के लिए ताजे चारे की तरह होंगे। इनमें से कुछ निवेश्क किस्मत की वजह से या अपनी कुशलता की वजह से समय के साथ अनुभव और समझ हासिल कर पाएंगे और अच्छी रकम बना पाएंगे।
मेरे जैसा आदमी जो सोच समझ कर और सतर्कता के साथ निवेश करने की वकालत करता है उसके लिए यह कहना आसान है कि अभी इस तरह की गतिविधि से बचा जाना चाहिए। लेकिन इसका मतलब एक तरह से यह कहना हो जाएगा कि किसी को निवेश शुरू नहीं करना चाहिए। लेकिन अगर नए निवेशक निवेश शुरू नहीं करेंगे तो वे अनुभवी निवेशक कैसे बनेंगे। इसके अलावा अगर वे जोखिम नहीं उठाएंगे तो इविक्टी निवेश में आगे कैसे बढ़ेंगे। यह ध्यान रखना चाहिए कि इक्विटी निवेश में जोखिम ही वह चीज है जो लोगों को आकर्षित करती है।
सच बात तो यह है कि इक्विटी दो तरह के लोगों को आकर्षित करती है। एक तो वे लोग जो बहुत ज्यादा आशावादी नजरिया रखते हैं और दूसरे वे लोग जिनका झुकाव जुआ या सट्टेबाजी की ओर होता है। अगर आप आशावादी नजरिया नहीं रखते हैं और और बड़े मुनाफे के लिए ज्यादा जोखिम उठाने में दिलचस्पी नहीं रखते हैं तो आप करोड़ों भारतीयों की तरह बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट में ही निवेश करते रहेंगे।
इस बात में कोई संदेह नहीं है कि सट्टेबाजी चाहे वह क्रिकेट में हो, घोड़ों की रेस में हो या स्टॉकस में हो यह व्यक्ति की तीव्र इच्छा को पूरी करती है। वास्तव में इनमें से स्टॉक्स में निवेश सबसे अच्छा है। वही व्यक्ति कभी निवेशक हो सकता है और अगले ही क्षण वह सट्टेबाज हो सकता है। यहां तक कि वह एक ही समय पर दोनों हो सकता है। और अगर वे चाहें तो वे बहाना भी बना सकते हैं कि वे सट्टेबाज नहीं है बल्कि निवेशक हैं भले ही वह व्यक्ति सट्टेबाजी ही कर रहा हो। यही नहीं मार्केट का ढांचा तैयार करते हैं और उसे चलाते हैं वे भी इस पूरे खेल में शामिल हो सकते हैं। वे ऐसे प्रोडक्ट और सर्विस शुरू करने के साथ ऐसा माहौल भी मुहैया करा सकते हैं जहां लोग कैसिनो यानी जुआघर की तरह व्यवहार करते हैं।
इस समस्या का समाधान है। ऐसी रकम जिससे आप मजाक कर सकें। इसे आप फन मनी का नाम दे सकते हैं। यह रकम आपके निवेश का बहुत छोटा हिस्सा हो सकती है जिसके बारे में आपको बहुत सोच विचार करने की जरूरत नहीं है। आप फन मनी के तौर पर कितनी रकम लगा सकते हैं यह आप पर है कि आप कितना जोखिम उठा सकते हैं। यह कुछ ऐसा है कि आप कुछ रकम यह जानकर स्टॉक्स में लगाते हैं कि आप एक तरह से जुआ खेल रहे हैं। यह जानना कि कौन सी रकम फन मनी है और कौन सी सीरियस मनी है अपने आप इस समस्या का समाधान है।
इस तरह से आप इक्विटी में निवेश की शुरूआत कर सकते हैं और बाद में आपको पता चल जाएगा कि क्या काम कर रहा है और क्या नहीं। इस तरह से निवेश को लेकर आपकी समझ बेहतर होती जाएगी और फन मनी कम होती जाएगी।





