
बाकी जिंदगी में क्या होगा जब उनको खुद से रकम का प्रबंधन करना होगा ? और जब उनको अपने बच्चों को सीख देनी होगी ? यह बेहद अहम विरासत है जो आप अपने बच्चों को दे सकते हैं। बात जब बच्चों और पर्सनल फाइनेंस की आती है तो दो अलग मुद्दों का सामना माता पिता को करना पड़ता है या उनको करना चाहिए। पहला मुद्दा है बच्चों के भविष्य की जरूरतों के लिए बचत करना। कुछ दशक पहले तक माता पिता के लिए यह कोई बड़ा मसला नहीं था। सरकारी स्कूलों में बच्चे पढ़ते थे और फीस इतनी ज्यादा नहीं थी कि इसके लिए किसी की नींद उड़ जाए। लेकिन आज ऐसा नहीं है। बच्चों की पढ़ाई चाहे वह बेसिक लेवल पर हो या हायर लेवल पर बहुत महंगी है। और आज माता पिता इस बात को जानते भी हैं। वे इसके लिए जरूरी रकम बचाने का प्रयास भी करते हैं। अब भी यह बच्चों को लेकर रकम से जुड़ी सिर्फ एक समस्या है। एक और समस्या है जिसके बारे में ज्यादातर अभिभावक उतने जागरूक नहीं हैं। लेकिन यह काफी अहम है और मैं इसके बारे में कुछ पल में बात करूंगा।
बच्चों के भविष्य के लिए बचत करने में सबसे बड़ी समस्या वे प्रोडक्ट हैं जिनको खास तौर पर इसी मकसद के नाम पर बेचा जा रहा है। निश्चित तौर पर यह सिर्फ पर्सनल फाइनेंस से जुड़ा मामला नहीं है। हर तरह के प्रोडक्ट और सेवाओं के लिए यह एक साझा रणनीति है। अगर आप अपने बच्चे से प्यार करते हैं तो हमारा प्रोडक्ट खरीदें।
यह बहुत सरल, सीधा और गुमराह करने वाली ट्रिक है। हेल्थ ड्रिंक, या एयरलाइंस या कार बेचने के लिए भी इस तरह के ट्रिक का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इनके बारे में मैं कोई राय नहीं दे सकत। लेकिन फाइनेंशियल प्रोडक्ट का मामला अलग है। इन्श्योरेंस के साथ्म्युचुअल फंड प्रोडक्ट जिनमें चाइल्ड या चिल्ड्रेन शब्द का इस्तेमाल होता है काफी समय से बाजार में हैं। अब ये उत्पाद इतने समय से बाजार में बिक रहे हैं तो लोगों को लगता है कि ये प्रोडक्ट खास तौध्र पर बच्चों के लिए हैं। ऐसे में जरूर इन प्रोडक्ट में उनके बच्चे के भविष्य के लिए कुछ खास फायदे की बात है जो दूसरे प्रोडक्ट में नहीं मिल सकती है।
यह बहुत सरल, सीधी और गुमराह करने वाली ट्रिक है। हेल्थ ड्रिंक, या एयरलाइंस या कार बेचने के लिए भी इस तरह के ट्रिक का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन इनके बारे में मैं कोई राय नहीं दे सकत। लेकिन फाइनेंशियल प्रोडक्ट का मामला अलग है। इन्श्योरेंस के साथ्म्युचुअल फंड प्रोडक्ट जिनमें चाइल्ड या चिल्ड्रेन शब्द का इस्तेमाल होता है काफी समय से बाजार में हैं। अब ये उत्पाद इतने समय से बाजार में बिक रहे हैं तो लोगों को लगता है कि ये प्रोडक्ट खास तौध्र पर बच्चों के लिए हैं। ऐसे में जरूर इन प्रोडक्ट में उनके बच्चे के भविष्य के लिए कुछ खास फायदे की बात है जो दूसरे प्रोडक्ट में नहीं मिल सकती है।
वैल्यू रिसर्च में हमें बहुत से अभिभावकों के ईमेल मिलते हैं। ये अभिभावक अपने बच्चों के लिए सबसे बेहतर चाइल्ड प्लान की तलाश में होते हैं। चाइल्ड प्लान का नाम इन लोगों ने इतनी बार सुना होता है कि वे मान लेते हैं कि टैक्स प्लान या पेंशन प्रोडक्ट की तरह चाइल्ड प्लान भी पर्सनल फाइनेंस का अभिन्न अंग है। दुर्भाग्य से चाइल्ड प्लान मार्केटिंग से जुड़ा शब्द है और फाइनेंशियल मामलों से इसका कोई लेना देना नहीं है। और दुर्भाग्य की बात यह भी है कि बाजार नियामक सेबी ने फंड की कैटैगरी तय की तो चिल्ड्रेन प्लान के गुमराह करने वाले विचार को भी आशीर्वाद दे दिया।
इस तरह के प्रोडक्ट में कुछ भी अलग नहीं होता है। बिक्री के लिए इस बात पर जोर दिया जाता है कि आप इस प्रोडक्ट में निवेश करें और रकम का इस्तेमाल बच्चे की कॉलेज फीस के लिए करें। हालांकि ऐसे फंड जो रिटर्न देते हैं वह उस रकम से नहीं बना होता है जिसे खास तौर पर कॉलेज फीस का भुगतान करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह सामान्य रकम है। भारत में मौजूदा नियम कानून के तहत बच्चों के भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए खास तौर पर बनाए गए फाइनेंशियल प्रोडक्ट के लिए कोई विशेष टैक्स छूट या दूसरी सुविधा उपलब्ध नहीं है। हम लोगों से ज्यादातर का मानना है कि ऐसा होना चाहिए लेकिन यह अलग मुद्दा है।
आपको इस बात का अनुमान लगाना होगा कि आपको कितनी रकम की जरूरत होगी और इसे जुटाने के लिए आपके पास कितना समय है। इसके बाद आप निवेश के लिए ऐसा विकल्प का चुनाव कर सकते हैं जो आपकी जरूरत के हिसाब से सही हो। इसमें चाइल्ड प्लान वाला हिस्सा बेकार है और इसका कोई मतलब नहीं है।
बच्चों और रकम को लेकर अब हम दूसरी समस्या के बारे में बात करते हैं। यह थोड़ा कम जरूरी लगती है लेकिन लंबी अवधि में यह वास्तव में ज्यादा अहम है। हम लोगों मे से ज्यादातर बच्चों को रकम के बारे में कुछ नहीं सिखाते हैं। मैंने पाया है कि बड़े हो रहे बच्चों यहां तक कि किशोरावस्था में पहुंच चुके बच्चों इसका कोई आइडिया नहीं है कि रकम कैसे काम करती है। वे न सिर्फ कमाई, बचत और निवेश के बारे में बहुत कम जानते हैं बल्कि उनको यह भी नहीं पता कि समाज के रकम का प्रवाह कैसे हो रहा है।
जब आप कुछ खरीदते हैं तो क्या होता है ? एक बैंक आपकी रकम का क्या करता है ? टैक्स कैसे काम करता है ? निवेश क्या है ? रकम कैसे बनाई जाती है ? निवेश की कीमत समय के साथ कैसे बढ़ती है और कार व फोन की कीमत समय के साथ कैसे कम होती जाती है। बीते सालों में चीजों की कीमतें कम क्यों थीं ? आने वाले सालों में इनकी कीमतें ज्यादा क्यों होंगी। ऐसी तमाम बातें।
हम उम्मीद करते हैं कि ऐसी चीजों के बारे में स्कूल में बताया गाएगा और आपका बच्चा इन सब बातों के बारे में स्कूल में सीख लेगा। हालांकि ऐसा नहीं हो रहा है। अगर ऐसा होता भ्ी तो बच्चों को उसी तरह से चीजें रटा दी जातीं जैसा दूसरे विषयों के साथ होता है। और वास्तविक जीवन से इसका कोई कोई लेना देना नहीं होता है। आप अपने बच्चे के फाइनेंशियल फ्यूचर के लिए सबसे अच्छी चीज यह कर सकते हैं कि उनको यह बात समझाएं कि रकम काम कैसे करती है।
यह सीख या जानकारी रकम से ज्यादा उपयोगी हो सकती है। और यह चीज ऐसी है जो पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ती रहनी चाहिए। जब हम और आप न रहें।


