
आप अपने निवेश को डायवर्सीफाई करते हैं तो निवेश आपकी लाइफ को डायवर्सीफाइ करता है। क्या आपको ऐसा लग रहा है कि मैं शब्दों से खेल रहा हूं। नहीं, बिल्कुल नहीं। इस बात में कोई शक नहीं कि अगर आपके पास निवेश के तौर पर अच्छी रकम है तो जरूरत पड़ने पर आप अपनी लाइफ को डायवर्सीफाई कर सकते हैं। कोराना महामारी की वजह से दुनिया में लाखों लोगों की नौकरी चली गई है और कारोबार पर बहुत बुरा असर पड़ा है। ऐसे में अच्छी बचत होना या अच्छी बचत न होना इस बात में काफी अंतर पैदा कर सकता है कि आप अपनी लाइफ और भविष्य को डायवर्सीपाई कर सकते हैं या नहीं।
आजकल बहुत से लोगों को लग रहा है कि उनका कैरियर एक ही जगह पर ठहर गया है या नौकरी को लेकर असुरक्षा बहुत बढ़ गई है। आम तौर पर ऐसे लोग अपनी मौजूदा इंडस्ट्री को छोड़ कर दूसरी इंडस्ट्री में जाने के लिहाज से मुश्किल का सामना कर रहे हैं जबकि उनको लगता है कि दूसरे इंडस्ट्री में बेहतर संभावनाएं हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि एक दशक या इससे ज्यादा समय तक एक ही तरह की नौकरी करते हुए आप इससे काफी अच्छा करने लगते हें लेकिन आप इसके कैदी भी हो जाते हैं। मेरा मानना है कि ऐसे मोड़ पर जिनके पास अच्छी बचत होती है वे इस संकट को बेहतर तरीके से सामन कर पाते हैं और केरियर को अच्छा मोड़ दे पाते हैं। वे अपनी लाइफ को डायवर्सीफाई कर पाते हैं। इसका मतलब हे कि आपका निवेश आपको अपनी लाइफ को डायवर्सीफाई करने की क्षमता देता है।
कुछ साल पहले मेरा एक दोस्त संकट में फंस गया था। इससे मुझे पता इस समस्या के बारे में पता चला। मेरा दोस्त और उसकी पत्नी दोनों एक बड़ी आईटी कंपनी में काम करते थे। जाहिर है कि उनके निवेश का बड़ा हिस्सा अपनी कंपनी के स्टॉक ऑप्शन के तौर पर था। इसके अलावा उनको लगा कि वे इस इंडस्ट्री को बेहतर तरीके से समझते हैं ऐसे में उन्होंने टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में इक्विटी के जरिए अच्छी मात्रा में निवेश किया था।
आगे क्या हुआ आप इसका बेहतर अनुमान लगा सकते हैं। सालों के बाद जब टेक इंडस्ट्री में गिरावट शुरू हई तो यह एक मजबूत इंडस्ट्री से एक सामान्य इंडस्ट्री में बदल गई जिसका आने वाला समय पहले की तरह शानदार संभावनाओं से भरा हुआ नहीं था। इसी समय उनका अपना निवेश अपनी ही कंपनी में सालों तक उसी स्तर पर बना रहा। उनके दूसरे टेक स्टॉक के साथ भी यही हुआ। वास्तव में कई स्टॉक्स ने बहुत खराब प्रदर्शन किया।
यह बात अक्सर लोग समझ नहीं पाते हैं। डायवर्सीफिकेशन किसी भी निवेश रणनीति का सबसे अहम हिस्सा होना चाहिए। आपको अपने निवेश को अलग अलग सेक्टर और इंडस्ट्री में फैला कर रखना चाहिए जिससे किसी सेक्टर का बुरा समय आने पर दूसरा सेक्टर नुकसान की भरपाई कर सके। हालांकि डायवर्सीफिकेशन की शुरूआत लाइफ को डायवसीफाई करने से होनी चाहिए न कि सिर्फ निवेश को ही डायवर्सीफाई किया जाए। आपका कैरियर किसी एक खास इंडस्ट्री से बंधा हुआ है तो आपका स्टॉक इन्वेस्टमेंट डायवर्सीफाइ होना चाहिए।
हालांकि कई वजहों से इसका ठीक उलटा भी सही हो सकता है। बहुत से कर्मचारी जिनको कंपनी से स्टॉक ऑप्शन मिलता है वे स्टॉक इन्वेस्टर नहीं होते हैं। वे दूसरे स्टॉक्स या म्युचुअल फंड नहीं खरीदते हैं और इस तरह से उनका निवेश अपनी कंपनी में ही होता है। और जब वे डायवर्सीफाई भी करते हैं तो वे आम तौर पर उसी इंडस्ट्री की दूसरी कंपनियों के स्टॉक्स खरीदते हैं। शायद वे यह महसूस करते हैं कि वे इस इंडस्ट्री को बेहतर समझते हैं या उसी इंडस्ट्री की दूसरी कंपनी के बारे में बहुत अच्छी राय रखते हैं। यह डायवर्सीफिकेशन नहीं है यह डायवर्सीफिकेशन का भ्रम है। मारुति के कर्मचारी अगर टाटा मोटर्स का स्टॉक खरीद रहे हैं या इंफोसिस के कर्मचारी टीसीएस का स्टॉक खरीद रहे हैं तो उनको लग सकता है कि वे डायवर्सीफाई कर रहे हैं लेकिन ऐसा है नहीं।
अगर आपका कैरियर और आपकी बचत एक ही कंपनी या उसी इंडस्ट्री से बंधा हुआ है तो यह साफ तौर पर अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में रखने का मामला है। और यह किसी के लिए भी सही नहीं है। अगर आप अपने निवेश को सोच समझ कर डायवर्सीफाई करते हैं तो बाकी जिंदगी में यह आपकी इस कदर मदद कर सकता है जिसके बारे में आपने कभी सोचा भी नहीं होगा। इस डायवर्सीफिकेशन के जाल से निकलने का सबसे बेहतर और आसान रास्ता म्युचुअल फंड में निवेश करना है।







