
इक्विटी या इक्विटी आधारित म्युचुअल फंड से लॉग टर्म कैपिटल गेन्स (एलटीसीजी) हासिल करने वालों के लिए यह थोड़ा चिंता का समय है। बजट 2018 तक हम सबको पता था कि इस तरह के निवेश पर कोई एलटीसीजी टैक्स नहीं है। हालांकि 2018 में यह राहत खत्म हो गई। सरकार ने 1 लाख रुपए तक के मुनाफे पर छूट के साथ 10 फीसदी टैक्स लगा दिया।
इसके तहत बजट के दिन यानी 31 जनवरी, 2018 से होने वाले मुनाफे पर टैक्स देना है। 1 फरवरी, 2018 से एक साल से ज्यादा अवधि के निवेश वाले स्टॉक्स या इक्विटी म्युचुअल फंड बेचने का मतलब है कि 31, जनवरी, 2018 को बाजार बंद होने के समय से हुए मुनाफे पर टैक्स देना। यानी किसी भी साल अगर आपको 1 लाख रुपए रुपए से अधिक मुनाफा होता है तो उसका 10 फीसदी टैक्स देना होगा। इस पर लागू सरचार्ज और सेस अलग से लगेगा।
एक साल में 1 लाख रुपए तक मुनाफे पर पहले जो टैक्स छूट थी वह अब भी है। कुछ समय तक 1 लाख रुपए की सालाना छूट ने उत्साह जगाया क्योंकि इससे टैक्स हार्वेस्टिंग की संभावना पैदा होती है। टैक्स हार्वेस्टिंग का मतलब है कि किसी साल अगर आपको लॉग टर्म कैपिटल गेन्स होता है और आपको निवेश बेचने की जरूरत नहीं है फिर भी आपको उतना निवेश बेच देना चाहिए जिससे 1 लाख रुपए का मुनाफा हो। इसके तुरंत बाद आप इस निवेश को दोबारा खरीद सकते है। इससे कुछ नहीं बदलेगा। इससे सिर्फ इतना होगा कि आप इस मुनाफे को भविष्य के लिए टैक्स फ्री बना देंगें।
इस तरह से आप सालाना 10,000 रुपए बचा लेंगे और आपको टैक्स रिटर्न के लिए कुछ पेपर वर्क करना होगा। साथ ही लंबी अवधि के कुछ निवेश को कम अवधि का बना लेंगे। अब अगर आपको इस निवेश को एक साल के अंदर बेचने की जरूरत पड़ जाती है तो यह एक समस्या हो सकती है। अगर आपको यह लगता है कि 10,000 रुपए बचाने के लिए यह एक अच्छा सौदा है तो आप ऐसा कर सकते है। हालांकि ज्यादातर इक्विटी निवेशकों के लिए यह बड़ी बात नहीं होनी चाहिए।
ये सब बातें इस तथ्य पर पर्दा नहीं डाल सकती हैं कि यह कैपिटल गेन्स टैक्स के लिए खराब स्ट्रक्चर है। यह टैक्स बचत करने वालों की समस्या को और बढ़ाता है। भारत में बचत करने वाले पहले से ही डिपॉजिट्स पर जरूरत से ज्याद निर्भर हैं। यह निर्भरता उनकी वित्तीय सेहत को लगातार नुकसान पहुंचा रही है। बचत करने वालों को इस बात के लिए हर तरह से प्रोत्साहित करने की जरूरत है कि वे इक्विटी आधारित निवेश को अपनाएं। बचत के लिहाज से भारत अब भी फिक्स्ड इनकम वाला देश है। हालांकि फिक्स्ड इनकम रिटर्न में बड़े पैमाने पर गिरावट आई है। और बचत करने वाले अब भी पुरानी आदत को नहीं छोड़ पा रहे हैं। ऐसे में रिटायर होने वाले ज्यादा से ज्यादा लोग बुढ़ापे की गरीबी की ओर जा रहे हैं। इक्विटी आधारित निवेश को अपनाने के अलावा इसका कोई समाधान नहीं है। इक्विटी आधारित निवेश समझने और अमल करने के लिहाज से आसान और आकर्षक है।
लंबी अवधि में इस टैक्स का नुकसान सिर्फ 10 फीसदी से कहीं ज्यादा है। आप जब भी निवेश बेच कर कहीं और निवेश करेंगे तो यह 10 फीसदी आपको देना होगा। कई बार ऐसा होता है जब आपका निवेश अच्छा रिटर्न नहीं दे रहा होता है और आपको कहीं और निवेश करने की जरूरत पड़ती है। पहले ऐसा करने पर इक्विटी फंड निवेश टैक्स फ्री था। अब आपको 10 फीसदी टैक्स देना होगा। और लंबी अवधि में यह 10 फीसदी इकठ्ठा हो सकता है। इकठ्ठा होकर यह कितना होगा यह आपके निवेश पर निर्भर है लेकिन यह टैक्स मुनाफे की कंपाउंडिंग को रोकता है तो यह 20 से 30 फीसदी या इससे ज्यादा भी हो सकता है।
और सबसे बड़ी बात महंगाई की मार है। इसके बारे में भविष्य में बात करूंगा। अहम बात यह है कि यह खराब और अनुचित टैक्स है। सरकार को इसे खत्म करना चाहिए।






