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बेकार है लि‍क्विडिटी पर बहस

बाजार में जारी मौजूदा तेजी की वजह लिक्विडिटी हो सकती है लेकिन लंबी अवधि में सिर्फ लिक्विडिटी ही बाजार को ऊपर नहीं ले जा सकती है

बाजार में जारी मौजूदा तेजी की वजह लिक्विडिटी हो सकती है लेकिन लंबी अवधि में सिर्फ लिक्विडिटी ही बाजार को ऊपर नहीं ले जा सकती है

इक्विटी मार्केट में तेजी की वजह लिक्विडिटी है। यह इस बात को कहने का एक अलग तरीका हे कि जब तक बाजार में शुद्ध रकम नहीं आती है तब तक सामान्‍य तौर पर स्‍टॉक कीमतें ऊपर नहीं जाएंगी। यहां शुद्ध रकम का मतलब बाजार में खरीद के तौर पर आने वाली रकम और बिक्री के तौर पर जाने वाली रकम के बीच के अंतर से है। जैसे बाजार में एक तय समय में 100 रुपए की खरीद हुई और 80 रुपए की बिक्री तो बाजार में शुद्ध राशि सिर्फ 20 रुपए आई। अगर यह सही हे तो इसका उलटा भी सही है। जब बाजार में कोई शुद्ध रकम नहीं आ रही है तो बाजार एक स्‍तर के आसपास ही बना रहता है और जब बाजार से शुद्ध रकम बाहर जाती है तो बाजार गिरता है। वास्‍तव में यह कहना कि रकम बाजार में आ रही है इसलिए बाजार बढ़ रहा है एक ही बात को दो अलग तरीके से कहना है।

एक निवेशक के तौर पर यह जानना अहम है कि बाजार में रकम का प्रवाह क्‍यों है ? रकम किस तरह के स्‍टॉक्‍स में आ रही है‍? जिसकी रकम बाजार में आ रही है उनका भविष्‍य का नजरिया क्‍या है ? रकम बाजार में तेजी देख कर आ रही है या निवेश करने वाले अवसर देख रहे हैं ? मुनाफा या नुकसान का अनुमान इन बातों पर गौर करके ही लगाया जा सकता है।

आजकल इक्विटी मार्केट में तेजी का दौर चल रहा है तो हम लोग इस बात को लेकर कयासबाजी कर रहे हैं कि ऐसा क्‍यों हो रहा है। निश्चित तौर पर कोरोना का तात्‍कालिक असर उतना ज्‍यादा नहीं रहा है जितना होने की आशंका जताई जा रही थी। लेकिन कोराना की कहानी अभी खत्‍म नहीं हुई है। दुनिया भर में कंपनियां और लोग कोराना से होने वाले नुकसान को लेकर डरे हुए हैं। ऐसे में शेयर बाजार की मजबूती थोड़ी अनुपयुक्‍त है।

इन सभी विषमताओं का ही नतीजा है कि इस बात पर बहुत ज्‍यादा कयास लगाए जा रहे हैं कि बाजार लगातार ऊपर क्‍यों जा रहा है। निवेशकों का बड़ा हिस्‍सा बाजार में जारी तेजी से चिंतित है और साफ है कि ऐसा लिक्विडिटी की वजह से हो रहा है। पश्चिमी देशों के केंद्रीय बैंकों के पास एक ही ट्रिक बची है, यह ट्रिक है अर्थव्‍यवस्‍थाओं में ज्‍यादा से ज्‍यादा रकम डालना। मौजूदा हालात में केंद्रीय बैंकों को भी लगत नहीं कहा जा सकता है लेकिन जितने बड़े पैमाने पर सिस्‍टम में रकम डाली जा रही है वह कुछ ज्‍यादा ही है।

यूएस फेडरल रिजर्व की वेबसाइट पर उपलब्‍ध आंकड़ों के अनुसार आज मौजूद कुल डॉलर का 40 फीसदी 1 मार्च, 2020 के बाद जारी किया गया है। और यह संख्‍या हर दिन बढ़ रही है। यह बहुत बड़ी रकम है और यह रकम कहीं तो जाएगी।

इस तर्क के जवाब में आप मीडिया और एनॉलिस्‍ट की एक राय देख सकते हैं कि अकेली लिक्विडिटी लंबे समय तब बाजार में तेजी नहीं बनाए रख सकती है। बैंक ऑफ जापान इस बात का एक बड़ा उदाहरण है। बैंक यह ट्रिक दशकों से अपना रहा है लेकिन इसका असर कुछ खास नहीं रहा है। इसके अलावा भी कई उदाहरण हैं जो यह बताते हैं कि लिक्विडिटी इक्विटी मार्केट में तेजी बनाए रखने में सक्षम नही है।

अब आप इस बात पर सहमत होंगे कि लिक्विडिटी और सेंट्रल बैंक की रणनीति को लेकर अकादमिक बहस में मेरी और आपकी ज्‍यादा दिलचस्‍पी नहीं है। हम व्‍यावहारिक निवेशक हैं और हम यहां बाजार से रकम बनाने के लिए यहां हैं। इस नजरिए से लिक्विडिटी को लेकर की जा रही बहस का कोई आधार नहीं है।

बाजार की ग्रोथ ठीक एक पौ‍धे की ग्रोथ की तरह है। आपको मिट्टी की जरूरत है लेकिन सिर्फ मिट्टी से ही काम पूरा नहीं होगा। मिट्टी, बीज और मौसम, उर्वरक और पानी। ये सभी चीजें जरूरी हैं। जो लोग इस बात पर तर्क कर रहे हैं कि क्‍या अकेली लिक्विडिटी यह काम कर सकती है वे एक बेकार की बहस में शामिल हैं। लिक्विडिटी उर्वरक है। यह कुछ समय तक पौधे को तेजी से बढ़ा सकती है लेकिन पौधे की मजबूती और उसके पेड़ बनने के लिए और दूसरी चीजें भी सही होनी चाहिए।

तो हमें क्‍या करना चाहिए। हमारा काम इन सब चीजों के बारे में चिंता करना नहीं है। इनमें से कुछ पौधे उर्वरक खत्‍म हो जाने पर मर जाएंगे और दूसरे पौधे जड़ें जमा कर बड़े पेड़े बन जाएंगे और फल देंगे। वैल्‍यू रिसर्च के तौर पर हम यहां इन पेड़ों की पहचान करने और आपसे इस जानकारी को साझा करने के लिए हैं।

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