
लिक्विड फंड में निवेश नेगेटिव कब हो सकता है ? यह रिकवर कैसे करेगा ?
-मनोज कुमार
लिक्विड फंड जब से भारतीय निवेशकों को उपलब्ध कराए गए हैं उसके बाद से शुरूआती 10-11 सालों में ये काफी लचीले थे और इनको अपनी वैल्यूएशन करने में काफी आजादी थी। निश्चित तौर पर बाद में इस बात पर सीलिंग लगा दी गई कि ये बांड को कितनी अवधि तक होल्ड कर सकते हैं। और जब एक बाद सीलिंग लग गई तो ये सीलिंग से आगे नहीं जा सकते।
शुरूआती 10-12 सालों में कोई भी लिक्विड फंड ओवरनाइट बेसिस पर भी वैल्यू के लिहाज से नीचे नहीं गया। ऐसा पहली बार 2008 संकट के दौरान एक या दो फंड में हुआ था। हालांकि टेपर टैंट्रम के दौरान जब अमेरिका के फेडरल रिजर्व चीफ ने यह घोषणा की कि ब्याज दरें ऊपर जाएगी तो बॉण्ड मार्केट में अफरातफरी मच गई। बहुत से लिक्विड फंड ने ओवरनाइट बेसिस पर वैल्यू में गिरावट का सामना किया। लेकिन वैल्यू में जो गिरावट हुई थी वह अगले तीन चार दिनों में रिकवर हो गई।
पिछले डेढ़ दो सालों में लिक्विड फंड के लिए ऑपरेटिंग फ्रेमवर्क के रेग्युलेशन में बदलाव आया है। पहले के बहुत कंजरवेटिव लिक्विड फंड को अलग कैटेगरी में डाल दिया गया। ये ओवरनाइट फंड हैं। ऐसे में ओवरनाइट फंड की वैल्यू में गिरावट की आशंका ओवरनाइट बेसिस पर भी नहीं है। लिक्विड फंड वैल्यू में नीचे जा सकते हैं। हालांकि कड़े नियमों की वजह से इनकी वैल्यू में गिरावट की संभावना ज्यादा नहीं है। लेकिन फिर भी अगर ऐसा होता है तो गिरावट बहुत मामूली होगी और ये सात-आठ दिनों में रिकवर हो सकते हैं।
आईएलएंडएफएस मामले के दौरान कंपनी द्वारा जारी किए गए एएए रेटेड कमर्शियल पेपर या वेरी शार्ट टर्म मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट कई लिक्विड फंड ने ले रखा था। इनमें गिरावट आई और रिटेन ऑफ हुआ। ऐसे में ये फंड इस रकम को कभी रिकवर नहीं कर सके। लेकिन यह अपनी तरह का इकलौता उदाहरण है। हमारे पास इस तरह के बहुत उदाहरण नहीं हैं।
ये लेख पहली बार सितंबर 13, 2021 को पब्लिश हुआ.


