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रकम बनाने के दो रास्‍ते

डायरेक्‍ट बनाम रेग्‍युलर फंड की च्‍वाइस सरल लगती है लेकिन इसमें काफी जटिलता है

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एक ही म्‍यूचुअल फंड के डायरेक्‍ट और रेग्‍युलर प्‍लान के बीच अंतर इतना ज्‍यादा है कि इसे नजरअंदाज करना लगभग असंभव है। सिवाय, उन निवेशकों के जो अब भी डायरेक्‍ट प्‍लान के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं। जानकार निवेशकों के लिए यह कहना मुश्किल है कि अब भी रेग्‍युलर प्‍लान में कोई रकम है।

यह कैसे हो सकता है कि कोई म्‍यूचुअल फंड निवेशक यह न जानता हो कि किसी इक्विटी फंड से 10 फीसदी तक कमाई बढ़ाने का सरल रास्‍ता है। वह सिर्फ एक अलग प्‍लान चुन कर ऐसा कर सकता है। और यह सच है। भारतीय म्‍युचुअल फंड में निवेश की गई कुल रकम का सिर्फ 22 फीसदी डायरेक्‍ट फंड में है। बाकी रकम रेग्‍युलर प्‍लान में है। और इसका बड़ा हिस्‍सा डेट फंड में है लेकिन इसका ज्‍यादातर इस्‍तेमाल पेशेवर कॉरपोरेट निवेशकों द्वारा किया जा रहा है तो यह कहानी अलग है।

जानकार निवेशक यह नहीं समझते हैं कि जब तक आप प्रयास नहीं करेंगे तब तक आपको डायरेक्‍ट प्‍लान के बारे में सही जानकारी नहीं मिलेगी। मेरा मतलब है कि आप डायरेक्‍ट शब्‍द यहां, वहां देख सकते हैं लेकिन इसका वास्‍तविक वित्‍तीय असर काफी हद तक गोपनीय है। जो लोग डिस्‍ट्रीब्‍यूटर के जरिए निवेश करने में सहज हैं और कभी कभार गूगल करके फंड के बारे में जानकारी जुटाते हैं या फंड कंपनियों की वेबसाइट पर विजिट करते हैं वे यह नहीं जान सकते हैं कि डायरेक्‍ट प्‍लान में रिटर्न के लिहाज से कितना फायदा है।

नए फिनटेक प्‍लेटफॉर्म या वैल्‍यू रिसर्च ऑनलाइन जैसे सोर्स को अपवाद मान लें तो डायरेक्‍ट फंड के फायदे गोपनीय हैं। यह कितना गोपनीय है ? मैं एक लार्ज कैप इक्विटी फंड का उदाहरण दूंगा जो मैंने वैल्‍यू रिसर्च ऑनलाइन पर चुना है। अगर आपने इस फंड के रेग्‍युलर प्‍लान में 10 लाख रुपए सात पहले निवेश किया होता तो यह बढ़ कर 23.2 लाख रुपए हो गया होता। डायरेक्‍ट प्‍लान में यही निवेश बढ़ कर 25 लाख रुपए हो गया होता। 15 लाख रुपए का मुनाफा 13.2 लाख रुपए के मुनाफे की तुलना में 13.2 फीसदी ज्‍यादा है। वही फंड, वहीं पोर्टफोलियो, बस प्‍लान दूसरा है। साफ है कि और लंबी अ‍वधि में यह अंतर और ज्‍यादा होगा। गणित के लिहाज से ऐसा होना निश्चित है।

डायरेक्‍ट प्‍लान के प्रशंसकों की यह उलझन काफी हद तक जायज है कि ज्‍यादातर लोग इस रकम को लेने से मना कर देते हैं। निश्चित तौर पर कई बातों के लिहाज से डायरेक्‍ट और रेग्‍युलर प्‍लान के बीच तुलना सही नहीं है। डायरेक्‍ट और रेग्‍युलर प्‍लान अलग-अलग तरह के निवेशकों की जरूरतों को पूरा करने के लिए सही हैं। वैल्‍यू रिसर्च में भी हम इनकी रेटिंग अलग सेट में करते हैं। हालांकि आप इनको एक दूसरे के साथ तुलना करने के लिए हमारे फ्री टूल का इस्‍तेमाल कर सकते हैं।

नए निवेशकों को ट्राजैक्‍शन करने के लिए सरल सहूलियत वाली सेवा की जरूरत है। यही नहीं नया निवेशक निवेश शुरू करे, इसके लिए भी किसी की जरूरत होती है। बैंक फिक्‍स डिपॉजिट के विपरीत म्‍यूचुअल फंड निवेश किसी सेवा का विस्‍तार नहीं है, जो आपको पहले से मिल रही है। मुनाफे पर बहुत ज्‍यादा फोकस करने का मतलब यह भी हो सकता है कि आप कभी निवेश शुरू ही न कर पाएं।

तो सवाल उठता है कि डायरेक्‍ट प्‍लान में निवेश किस तरह के निवेशकों के लिए सही है। निवेशक ऐसा हो, जो समझ सके कि अलग-अलग तरह की निवेश जरूरतों के लिए किस तरह के म्‍यूचुअल फंड की जरूरत है। जो इनके बारे में स्‍वतंत्र तौर पर रिसर्च कर सके और निवेश के लायक फंड की लिस्‍ट बना सके। और इसके बाद किसी इंटरमीडियरी की मदद के बिना फंड में निवेश कर सकें। जब कोई निवेश शुरू करता है और बाजार गिरता है तो निवेश की वैल्‍यू पर दबाव आ जाता है। ऐसे में निवेशक को सलाह की जरूरत होती है, जिससे वह निवेश बनाए रख सके। यहां, आपको अपने लिए वह सबकुछ करना होगा, जो एक एडवाइजर से करने की उम्‍मीद की जाती है।

कोई ऐसा विकल्‍प नहीं है, जो सबके लिए सही हो। हर एक निवेशक को यह पता करना होगा कि वह क्‍या कर सकता है और ऐसी क्‍या चीज है, जो कोई और उनके लिए करे।

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