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म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों के लिए एक स्टार्टर पैक

म्यूचुअल फ़ंड के जो निवेशक निवेश की शुरुआत कर रहे हैं या आसानी से निवेश करने का तरीक़ा तलाश रहे हैं, उनके लिए कुछ ख़ास म्यूचुअल फ़ंड बेहतर साबित हो सकते हैं।

म्यूचुअल फ़ंड के जो निवेशक निवेश की शुरुआत कर रहे हैं या आसानी से निवेश करने का तरीक़ा तलाश रहे हैं, उनके लिए कुछ ख़ास म्यूचुअल फ़ंड बेहतर साबित हो सकते हैं।

अगर आप, अपनी पहली कार महंगी ख़रीद सकते हैं, तो भी क्या ये ज़्यादा समझदारी नहीं होगी कि पहली कार ऐसी चुनी जाए, जो कुछ पुरानी हो, सैकेंड-हैंड हो। कोई भी समझदार इंसान इस सुझाव के सारे कारण झट से समझ लेगा, कि एक सैकेंड-हैंड कार, ‘स्टार्टर कार’ के तौर पर क्यों बेहतर रहेगी। वीकीपीडिया पर, आपको एक ख़ालिस अमेरिकी कॉन्सेप्ट भी दिख जाएगा, जिसे ‘स्टार्टर मैरिज’ कहते हैं, मगर इस बात को रहने देते हैं।
इसी ‘स्टार्टर’ के तरीक़े से मिलते-जुलते (कार से मिलते-जुलते, न कि शादी से) कुछ फ़ंड्स भी होते हैं, जिन्हें स्टार्टर फ़ंड कहा जाता है। ये ऐसे म्यूचुअल फ़ंड हैं, जो सरल होने के साथ-साथ, उन निवेशकों के लिए ख़ासतौर पर सही रहते हैं जो म्यूचुअल फ़ंड निवेश में हाथ आज़माने की शुरुआत ही कर रहे हैं। और ये स्टार्टर फ़ंड, सिर्फ़ स्टार्टर फ़ंड ही नहीं, मगर सरल फ़ंड भी होते हैं। यानि, ये फ़ंड, उन निवेशकों के सभी लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं, जो चीज़ों को आसान रखना चाहते हैं, और जिनके पास इस सबके लिए ज़्यादा समय नहीं है, या फिर निवेश को जानने-समझने में उनकी कोई रुचि नहीं है।
पहली तरह के म्यूचुअल फ़ंड जो अच्छे स्टार्टर फ़ंड हो सकते हैं, वो हैं, टैक्स-सेविंग फ़ंड। इन टैक्स बचाने वाले फ़ंड का इस्तेमाल स्टार्टर के तौर पर इसलिए होता है, क्योंकि एक तो इन्हें टैक्स-सेविंग फ़ंड का क़ानूनी दर्जा हासिल है, और दूसरे, इनमें तीन साल का लॉक-इन पीरियड होता है। कई बार, जैसे ही मार्केट में उतार-चढ़ाव या गिरावट का दौर आता है, नया इक्विटी निवेशक तुरंत अपने निवेश से बाहर निकलना चाहता है। मगर टैक्स-सेविंग फ़ंड, अपने लॉक-इन पीरियड की वजह से, उन्हें अच्छा रिटर्न देते हैं। क्योंकि तीन साल लंबी-अवधि, आमतौर पर इक्विटी रिटर्न का जादू चलने के लिए काफ़ी होती है। जब तक लॉक-इन की अवधि ख़त्म होती है, तब तक नये-नवेले निवेशक इक्विटी-फ़ंड में, धैर्य के साथ निवेश करने की अहमियत समझ जाते हैं।
टैक्स-सेविंग फ़ंड के बाद, स्टार्टर फ़ंड और सरल फ़ंड की कैटेगरी में आते हैं हाइब्रिड-फ़ंड, या जिन्हें हम, बैलेंस्ड-फ़ंड कहते हैं। इनका रोल बिल्कुल साफ़ है-और ये निवेशकों की कई ज़रूरतों पर ख़रे उतरते हैं, जैसे - रिस्क के लिहाज़ से पैसे का अलग-अलग तरह के एसेट में लगाया जाना, एसेट का सही तरह से बंटा होना, और जब एसेट का एलोकेशन कुछ ऊपर-नीचे हो जाए, तो उसे फिर से बैलेंस किए जाने की क्षमता होना।
जब इक्विटी, फ़िक्स इन्कम के मुक़ाबले तेज़ी से बढ़ रही हो-जिसकी उम्मीद आप अक्सर ही करेंगे-तो समय-समय पर आप कुछ इक्विटी निवेश बेच कर, फ़िक्स इन्कम में अपना पैसा लगाएं, ताकि बैलेंस फिर से क़ायम किया जा सके। जब इक्विटी में मंदी आ जाए, तो समय-समय पर आप फ़िक्स इनकम से पैसा निकाल कर, इक्विटी में डालें। ये बहुत शानदार तरीक़े से काम करता है। दरअसल, बुनियादी आइडिया है फ़ायदा कमाना, और सस्ते एसेट को ख़रीदना। इससे अंत में आप रिटर्न पर औसत पा ही जाते हैं। यानि, जब इक्विटी में मंदी आई तो आपने, अपने मुनाफ़े का कुछ हिस्सा सुरक्षित एसेट में लगा दिया, जो किसी नए या फिर पुराने निवेशक के लिए भी घबराहट का कारण बन सकता है।
वैसे आप ये सब ख़ुद भी कर सकते हैं। इसके लिए डेट फ़ंड का चुनाव कीजिए, इक्विटी फ़ंड को चुनिए, और धनक के टूल का इस्तेमाल कर, अपने फ़ंड एलोकेशन को चैक कर लीजिए कि आपके फ़ंड बैलेंस हैं या नहीं।
इक्विटी और फ़िक्स इन्कम में बैलेंस का ये तरीक़ा क्यों काम करता है? क्योंकि दोनों तरह के फ़ाइनेंशियल एसेट-इक्विटी और डेट-अलग नहीं हैं। बल्कि एक दूसरे के पूरक हैं। निवेश से पैसा बनाने के दो बड़े तरीक़े हैं। पहला, किसी को पैसे उधार देना जो उसपर ब्याज दे, ये कोई बिज़नस हो सकता है या फिर सरकार। और दूसरा, बिज़नस में हिस्सेदारी करना, यानि शेयर ख़रीदना। इन दोनों की ख़ूबिया ऐसी हैं कि दोनों को मिलाना ही निवेश का सबसे अच्छा तरीक़ा है।
सेबी के फ़ंड की अलग-अलग कैटेगरी के कोडिफ़िकेशन के तहत, निवेश के लिए कई तरह के हाइब्रिड-फ़ंड हैं, जो एसेट एलोकेशन की अलग-अलग ज़रूरतों पर फ़िट बैठते हैं। ये फ़ंड, पुराने तरीक़े के निवेश फ़ंड से लेकर, ऐसे फ़ंड भी हैं, जिसमें असल में थोड़ी-बहुत इक्विटी के तड़के वाले फ़िक्स इनकम फ़ंड भी हैं। साथ ही ऐसे फ़ंड भी होते हैं जो इनके बिल्कुल उलट हैं। वैसे, हर निवेशक इनमें अपनी ज़रूरत के मुताबिक़ कुछ-न-कुछ पा ही सकता है। तो सबसे बढ़िया विकल्प यही होगा कि आप एक या दो म्यूचुअल फ़ंड उठाएं और एसआईपी (SIP) शुरु करें, और जो हाइब्रिड-फ़ंड हैं वो अपना बैलेंस खुद ही कर लेंगे।

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