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SIP का भ्रम

क्या ये पक्का है कि आपकी SIP असल में एक SIP है?

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क्या आपकी SIP सच में SIP है? ये कुछ अजीब और इस तरह का सवाल है जिसका मतलब ही साफ़ नहीं है। हालांकि, मेरे पाठकों में कुछ लोग ऐसे होंगे जिन्हें बात अच्छी तरह से समझ आ गई होगी, और उनकी इस समझ की वजह उनका वो बुरा अनुभव हैं, जो उन्हें हाल ही में हुआ है। वो ये समझते रहे कि उनका निवेश SIP के ज़रिए हो रहा है। अपने निवेश में उनको SIP निवेश के सारे लक्षण उन्हें दिखाई दे रहे थे-हर महीने पैसे उनके अकाउंट से कटते रहे, फ़ंड की यूनिट उनके ख़ाते में जुड़ती रहीं, जिन एप्स के ज़रिए वो निवेश कर रहे थे वो इसे SIP ही बता रहे थे, मगर फिर अचानक सब कुछ थम गया।

अब मेरी आगे की कहानी उन सधे हुए सवालों की है, जो आपको उन डिस्ट्रीब्यूटरों/ सर्विस देने वालों से पूछने चाहिए जिनके ज़रिए आप फ़ंड्स में निवेश करते रहे हैं। पिछले एक-दो साल में, हमारे पास ऑनलाईन सर्विस का ढ़ेर लग गया है जो म्यूचुअल फ़ंड बेच रही हैं। इनमें शामल हैं, एप-आधारित सर्विस जिन्हें स्टार्ट-अप चला रहे हैं और 'म्यूचुअल फ़ंड यूटिलिटी' (MF Utility), जो ख़ुद म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री चलाती है। ये नई सर्विस, आमतौर पर निवेशकों के लिए फ़्री हैं और इसके अलावा पारंपरिक डिस्ट्रीब्यूटरों के मुक़ाबले कहीं ज़्यादा सुविधाएं निवेशकों को ऑफ़र करती हैं। ये सेवाएं न सिर्फ़ ये इस मायने में फ़्री हैं कि ये कुछ भी फ़ीस नहीं लेतीं, मगर इसलिए भी फ्री हैं कि ये सिर्फ़ म्यूचुअल फ़ंड्स के डायरेक्ट प्लान में डील करती हैं, जो उन्हें कोई कमीशन नहीं देते।

एक अनुभवी निवेशक ये समझेगा कि म्यूचुअल फ़ंड्स SIP के वो दिन तय होते हैं जब निवेशक के खाते से पैसे कटते हैं। मिसाल को तौर पर, मासिक SIP का पेमेंट हर महीने की 7 और 21 तारीख़ को ही संभव हो सकता है। हफ़्तावार SIP का दिन सिर्फ़ मंगलवार का हो सकता है और इसी तरह से दिन तय होते हैं। जिस तरह की सहूलियत ये ऑनलाईन-एप दे रहे हैं, उसमें आप SIP किसी कभी दिन दे सकते हैं, बिना ये जाने-समझे कि म्यूचुअल इसकी इजाज़त देते भी हैं या नहीं।

ये होता कैसे है? ये होता है बिना कोई SIP किए! दरअसल, ये सर्विस देने वाले आपसे लेनदेन की अनुमति आपसे ले लेते हैं, और आपको बता देते हैं कि आपकी SIP शुरु हो गई है। फिर ज़रूरत के मुताबिक़ किसी एक दिन, वो आपके लिए उसी राशि का, एक सामान्य नॉन-SIP ट्रांज़ैक्शन करते हैं। निष्पक्ष हो कर कहूं, तो इससे आपको कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता। कम-से-कम ज़्यादातर केसों में तो नहीं ही पड़ता। हालांकि, कभी-कदार, आपके ट्रांज़ैक्शन रुक सकते हैं। हाल ही में एक लोकप्रिय फ़ंड, मोतीलाल ओसवाल S&P 500 इंडैक्स फ़ंड, को सभी नए निवेश रोकने पड़े क्योंकि वो अपने एसेट निवेश का एक हिस्सा, विदेशी स्टॉक्स और फ़ंड्स में करते हैं। रेग्युलेटरी कारणों से इंडस्ट्री के कुल विदेशी निवेश की सीमा पूरी होने वाली थी और इसीलिए AMCs ने नए निवेश रोक दिए थे। हालांकि, ये रोक सिर्फ़ एकमुश्त निवेश पर ही लगाई गई थी और निवेशकों का SIP निवेश नहीं रोका गया था। ये सामान्य बात है, जब एक AMC को किन्हीं कारणों से किसी फ़ंड में निवेश बंद करना होता है, तब भी SIP के निवेश जारी रहते हैं।

अब आपको समस्या समझ आ गई होगी। वो सभी लोग जो नई ऑनलाईन सेवाओं के ज़रिए नकली SIP कर रहे थे, उनके निवेश रुक गए। जहां इस मुश्किल को तुरंत सुलझा लिया गया, क्योंकि सरकार ने विदेशी निवेश की सीमा बढ़ा दी, वहीं ये ज़रूरी नहीं कि हर बार ऐसा ही हो। इस तरह की घटना निवेशकों के लिए अवसर गंवाने का कारण भी बन सकता है।

ख़ैर, मसला निवेश पर इस घटना के असर का नहीं बल्कि ग़लत जानकारी का है। किसी भी फ़ाईनेंशियल बिज़नस को अपने कामकाज को लेकर कस्टमर के साथ ग़लतफ़हमी नहीं पनपने देनी चाहिए। इन सेवाओं का दावा था कि वो SIP कर रहे हैं, मगर असल में ऐसा नहीं था-उन्होंने अपने कस्टमर्स से ग़लतबयानी की। इसके लिए, कस्टमर्स को उनसे सवाल करने चाहिए और साथ ही रेग्युलेटरों को भी उनकी ख़बर लेनी चाहिए।

इससे अलग एक मसला और है कि क्यों SIP किसी भी दिन नहीं होती। किन्हीं ख़ास दिनों में ही SIP का किया जाना, पुराने समय के कामकाज के तौर-तरीक़ों का हिस्सा है जब ये चेक के ज़रिए होता था। आज, UPI और डिजिटल फ़ंड ट्रांसफ़र के दौर में दिनों की सीमा एक काल-दोष में बदल गई है जिसकी ज़रूरत नहीं है। फ़ंड इंडस्ट्री को, बजाए पुरानी परंपरा को अनंत काल तक ढोने के, सम-सामयिक होने की ज़रूरत है।

दिलचस्प बात ये है कि एकमुश्त निवेश को SIP समझने की ग़लतफ़हमी का ये मतलब भी है कि AMFI इंडस्ट्री का SIP के कुल नंबरों के डेटा में नुक्स है और कुल निवेशकों की संख्या, बताई गई संख्या से कहीं ज़्यादा है। उम्मीद है, असल तस्वीर कभी-न-कभी सामने ज़रूर आएगी।

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