फ़र्स्ट पेज

मूर्ख का सोना

हो सकता है कि क्रिप्टो और यूलिप ज़्यादा धन बना लें मगर क्या वो अच्छा निवेश हैं?

हो सकता है कि क्रिप्टो और यूलिप ज़्यादा धन बना लें मगर क्या वो अच्छा निवेश हैं?

जो ट्वीट मैंने 1 अप्रैल को किया था वो मेरी सोच से कहीं ज़्यादा दिलचस्प निकला।
मैंने इस महीने की शुरुआत में ट्विटर पर एक अहम अनाउंसमेंट किया:
वैल्यू रिसर्च, म्यूचुअल फ़ंड और स्टॉक्स की रिसर्च रोक कर सिर्फ़ क्रिप्टोकरंसी के अनालेसिस पर फ़ोकस करने वाला है। ऐसा करने से अगर हमारी रिसर्च टीम के पास काफ़ी समय खाली बचता है, तो हम घोड़ों की रेस को भी अपने कवर किए जाने वाले विषयों में शामिल कर लेंगे।
और हां, ‘महीने की शुरुआत’ से मेरा मतलब है, पहली अप्रैल। इसी बात से इस ट्वीट का असल मतलब सभी को साफ़ हो जाना चाहिए था, मगर ऐसा हुआ नहीं। कुछ भी हो, मुझे फ़ॉलो करने वाले बहुत से लोगों का रिस्पॉन्स आया, साथ ही उनका भी रिस्पॉन्स आया जो मुझे फ़ॉलो नहीं करते हैं। कुछ रिस्पॉन्स ट्विटर पर मिले, और कुछ निजी तौर पर भी मिले।
जब ये ट्वीट लिखना शुरु किया था, तो मैंने इसके बारे में ज़्यादा सोचा नहीं था-मेरा उद्देश्य और कुछ नहीं सिर्फ़ अपनी ट्विटर ऑडियंस को मुस्कुराने के कुछ हल्के-फुल्के पल दे कर आगे बढ़ जाना था। मगर, जिस तरह के जवाब और रिएक्शन इस ट्वीट ने पैदा किए, उनसे मैं काफ़ी सोच में पड़ गया और एक-दो बातें तो मेरे लिए गंभीरता से विचार करने का सबब बन गईं।
मोटे तौर पर, मुझे तीन तरह के जवाब मिले:
1. लोग जिन्हें मज़ाक समझ आया, वो हंसे (या नहीं भी) और आगे बढ़ गए।
2. लोग जिन्हें लगा, मैं गंभीर हूं और वो इस बात से नाख़ुश हुए।
3. लोग जिन्हें लगा, मैं गंभीर हूं और वो इस बात से ख़ुश हुए।
ये तीसरे और आख़िरी क़िस्म के लोग काफ़ी दिलचस्प रहे, और अगर सोचा जाए, तो ये मज़ाक उन्हीं को ध्यान में रख कर किया गया था। इस मज़ाक का सार इन्हीं के लिए था। मैं और मेरे ही जैसे कई दूसरे निवेशक, क्रिप्टोकरंसियों को निवेश का बेहूदा तरीक़ा समझते हैं। इसीलिए ‘घोड़ों की रेस’ की कैटेगरी में इसे रखना, एक व्यंग्य है। जिसने भी इस मज़ाक को समझा, वो इस बात को भी अच्छे से समझ गया।
हालांकि, क्रिप्टो के दीवाने ये समझने के क़ाबिल नहीं लगते कि ऐसे लोग भी हो सकते हैं, जो क्रिप्टो के दीवाने नहीं हैं। उनके लिए, ये समझदारी की बात थी कि वैल्यू रिसर्च ने म्यूचुअल फ़ंड और इक्विटी का त्याग कर दिया है और क्रिप्टो का दामन थाम लिया है। उन्हें लगता है कि देर से सही, पर हर कोई यही करेगा, इसलिए उन्हें मेरे ट्विटर के इस ‘अनाउंसमेंट’ से कोई अचरज नहीं हुआ। ये बात मुझे हास्यास्पद लगती है, मगर हां, एक अलग नज़रिए से।

ख़ैर, अब बात उन लोगों की करते हैं जिनके लिए मैं सच में संवेदना महसूस करता हूं, ये दूसरी कैटेगरी के लोग हैं। इनका भरोसा, म्यूचुअल फ़ंड और इक्विटी निवेशकों और वैल्यू रिसर्च पर है। इन लोगों को लगा कि वैल्यू रिसर्च ने उनका साथ छोड़ दिया है और क्रिप्टो की दिशा में मुड़ गए हैं, और इसलिए क्योंकि ये नया है, और ऐसी फ़ायदेमंद चीज़ है जिसमें ज़्यादा पैसा बनाया जा सकता है। इनमें से कुछ लोगों ने तो एक हद तक नाराज़गी भी जताई। शुरुआत में इस सब से मैं कुछ चौंका था, मगर उनकी ये प्रतिक्रिया वास्तविक थी जिसका अनालेसिस होना चाहिए और जवाब भी दिया जाना चाहिए।
एक संस्था के तौर पर वैल्यू रिसर्च का आधार विश्वास है। दूसरे फ़ाईनेंशियल मीडिया से अलग, यहां हम आपको ये बताने के लिए नहीं हैं कि क्या घटनाएं घट रही हैं और आपके लिए क्या-क्या उपलब्ध है। यहां हम आपको ये बताने के लिए हैं कि अच्छा क्या है, बुरा क्या है और वो क्या है जो विकृत है। आपको हमारी राय पसंद न भी आए, मगर ये जैसी है, वैसी है।
सबसे महत्वपूर्ण ये है कि हम बाज़ार की धारा के साथ नहीं बहेंगे। असल में, इसकी समानता काफ़ी हद तक यूलिप की कहानी से की जा सकती है। यूलिप बहुत ख़राब क़िस्म का फ़ाईनेंशियल प्रॉडक्ट है। इसे, इंश्योरेंस कंपनियों और यूलिप बेचने वालों को अमीर करने और आपको ग़रीब करने के लिए डिज़ाईन किया गया है। एक वक़्त था-एक दशक पहले-जब यूलिप को लेकर इंश्योरेंस कंपनियों में ग़ज़ब की हाईप थी। उस दौर में हर पब्लिकेशन और टीवी चैनल, यूलिप ख़रीदने के लिए ‘बेस्ट यूलिप’ जैसी स्टोरी कर रहा था। और हां, सबसे अहम मुद्दा कि-करोड़ों करोड़ रुपए इंश्योरेंस कंपनियों से इकठ्ठा किया जा रहा था।
हमारे पास भी ऐसे बहुत से प्रस्ताव आए, मगर हमारा नज़रिया इस विषय पर बिल्कुल साफ़ था: इस बात का सवाल ही नहीं था कि ‘बेस्ट यूलिप’ जैसे अनालेसिस किए जाएं, क्योंकि ये सारे ही बेकार हैं। ये सब-के-सब हमारे सभी पाठकों की फ़ाईनेंशियल हेल्थ के लिए घातक हैं। इस फ़ैसले से हमें रेवेन्यू का काफ़ी नुकसान ज़रूर हुआ, मगर हमने लगातार एंटी-यूलिप लेख लिखे। संभव है, यूलिप के (आंशिक) रेग्युलेटरी सुधार-जो बाद में हुए-उनमें हमारा भी योगदान रहा।
ये क्रिप्टो-मेनिया मुझे इसी सब की याद दिलाता है। इसमें पैसा ज़रूर बनाया जा सकता है, मगर सिर्फ़, दूसरे बचत करने वालों, और दूसरे निवेशकों की जेबें काट कर।

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

इतना लंबा सफ़र

पढ़ने का समय 3 मिनटधीरेंद्र कुमार down-arrow-icon

विरासत में मिला NPS टैक्स फ़्री, लेकिन म्यूचुअल फ़ंड पर लगता है

पढ़ने का समय 4 मिनटआकार रस्तोगी

टैक्स बचाने के लिए NPS में अकाउंट खोला था, अब बाहर कैसे निकलें?

पढ़ने का समय 4 मिनटआकार रस्तोगी

Kaynes Technology का शेयर अपने पीक से 61% गिरा, क्या करें निवेशक?

पढ़ने का समय 6 मिनटसत्यजीत सेन

NPS की एकमुश्त रक़म को 25 साल की रिटायरमेंट इनकम में कैसे बदलें?

पढ़ने का समय 4 मिनटआकार रस्तोगी

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

इतना लंबा सफ़र

इतना लंबा सफ़र

आज सबसे बड़ा एक्टिव फ़ंड उतनी रक़म मैनेज करता है, जितनी इस मैगज़ीन के शुरू होने पर पूरी इंडस्ट्री करती थी

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी