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सारांशः Kusumgar का IPO एक दमदार डिफेंस मैन्युफ़ैक्चरिंग कहानी पर टिका है, लेकिन कंपनी को क़रीब से देखने पर कई ऐसी बातें सामने आती हैं जिन पर ग़ौर करना ज़रूरी है. सब्सक्राइब करने से पहले, इन्वेस्टर्स को हेडलाइन वाली ग्रोथ स्टोरी से आगे जाकर यह देखना चाहिए कि कंपनी के फ़ंडामेंटल्स इसकी वैल्यूएशन को सही ठहराते हैं या नहीं.
भारत का डिफेंस मैन्युफ़ैक्चरिंग पर ज़ोर, पब्लिक मार्केट इन्वेस्टर्स को ग्रोथ स्टोरी बेचने का एक भरोसेमंद तरीक़ा बन गया है और Kusumgar इसके बिल्कुल केंद्र में बैठी है. यह कंपनी मिलिट्री पैराशूट, स्टेल्थ कैमोफ़्लाज नेट और एक्सट्रीम-कोल्ड-वेदर गियर में इस्तेमाल होने वाला फ़ैब्रिक बनाती है. यह अमेरिका और चीन के बाहर दुनिया में ऐसा काम करने वाली गिनी-चुनी कंपनियों में से एक है. बस यही इसकी ख़ासियत है.
फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में कुल रेवेन्यू 11 प्रतिशत गिरा. डिफेंस के भारी-भरकम ऑर्डर पर टिके बिज़नेस के लिए यह अपने आप में कोई असामान्य बात नहीं है. ग़ौर करने वाली बात यह है कि यह गिरावट असल में कहां हुई और इसकी भरपाई कहां से हुई. एयरोस्पेस और डिफेंस फ़ैब्रिक के रेवेन्यू में 42 प्रतिशत की कमी आई. यह सेगमेंट Kusumgar की ज़्यादातर डिफेंस साख संभालता है,. इस गैप की दो सेगमेंट ने भरपाई की और इनमें से किसी की साख उतनी अच्छी नहीं है.
यही वह हिस्सा है जिसे इस IPO की कहानी में नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता.
Kusumgar असल में बेचती क्या है
Kusumgar एक्सट्रीम स्पेसिफ़िकेशन पर बने वोवन, कोटेड और लैमिनेटेड सिंथेटिक फ़ैब्रिक बनाती है, जिनमें हाई टेंसाइल स्ट्रेंथ, पूरी तरह वॉटरप्रूफ़िंग और आग व UV एक्सपोज़र से बचाव जैसे गुण होते हैं. यह इन फ़ैब्रिक से तैयार प्रॉडक्ट्स भी बनाती है. इसका प्रोडक्शन गुजरात की छह फ़ैसिलिटीज़ और उत्तर प्रदेश की एक फ़ैब्रिकेशन यूनिट में होता है, जिनकी मिली-जुली कैपेसिटी 128 मिलियन मीटर से ज़्यादा है.
इस बिज़नेस के चार सेगमेंट हैं. इस IPO को समझने के लिए इनके बीच का फ़र्क़ समझना ज़रूरी है.
- एयरोस्पेस और डिफेंस फ़ैब्रिक (32 प्रतिशत) पैराशूट, कोल्ड-वेदर गियर और कैमोफ़्लाज नेट के लिए बेस फ़ैब्रिक है, जो मिलिट्री स्पेसिफ़िकेशन के हिसाब से बनता है. यही Kusumgar का मुख्य डिफेंस बिज़नेस है.
- एयरोस्पेस और डिफेंस सॉल्यूशंस (24 प्रतिशत) उस फ़ैब्रिक को तैयार प्रोडक्ट्स में बदलकर सीधे डिफेंस और एयरोस्पेस ख़रीदारों को बेचता है. इसमें असेंबल्ड पैराशूट, कैमोफ़्लाज नेट, फुलाने वाले डिकॉय और असली जैसे दिखने वाले नक़ली व्हीकल शामिल हैं, जो दुश्मन की निगरानी को गुमराह करने के लिए बनाए जाते हैं.
- इंडस्ट्रियल और ऑटोमोटिव फ़ैब्रिक (23 प्रतिशत) ग़ैर-डिफेंस ग्राहकों को फ़ैब्रिक बेचता है, जिसका इस्तेमाल कार के पार्ट्स, कन्वेयर बेल्ट और रबर होज़ में होता है.
- आउटडोर और लाइफ़स्टाइल फ़ैब्रिक (19 प्रतिशत) कंज़्यूमर ब्रांड्स को बैकपैक, जैकेट, टेंट और एक्टिववेयर के लिए फ़ैब्रिक बेचता है. यह चारों में सबसे ज़्यादा कॉम्पिटिटिव और सबसे कम स्पेशलाइज़्ड सेगमेंट है.
कॉम्पिटिटर आसानी से घुस क्यों नहीं सकते
यहां मोट (moat) कोई ब्रांड या पेटेंट नहीं है. यह भरोसा है, और वह भी ऐसी कैटेगरी में जहां एक ख़राबी सिर्फ़ ग्राहक की शिकायत नहीं बल्कि किसी की जान जाने की वजह बन सकती है. एक बार जब कोई फ़ैब्रिक डिफेंस और एयरोस्पेस अप्रूवल प्रोसेस पास कर लेता है, जिसमें दो से 10 साल तक लग सकते हैं, तो वह ग्राहक के डिज़ाइन में हमेशा के लिए लॉक हो जाता है.
Kusumgar उन गिने-चुने मैन्युफ़ैक्चरर में है जिन्हें फ़ाइन डेनियर यार्न, यानी बेहद पतले सिंथेटिक फ़ाइबर जिनमें हीट डैमेज और असमान डाई होने का ख़तरा रहता है, और नायलॉन जैसे स्पेशल पॉलिमर की विशेषज्ञता है. यह बुनाई से लेकर कोटिंग, लैमिनेशन और फ़ैब्रिकेशन तक अपनी पूरी वैल्यू चेन ख़ुद संभालती है, जिससे क्वॉलिटी पर पकड़ बनी रहती है और प्रोप्राइटरी डिज़ाइन कंपनी के भीतर ही रहते हैं.
Kusumgar IPO डिटेल्स
| कुल IPO साइज़ (₹ करोड़) | 650 |
| ऑफ़र फ़ॉर सेल (₹ करोड़) | 650 |
| फ़्रेश इश्यू (₹ करोड़) | - |
| प्राइस बैंड (₹) | 398-419 |
| सब्सक्रिप्शन डेट | 8 जुलाई - 10 जुलाई, 2026 |
| इश्यू का मक़सद | ऑफ़र फ़ॉर सेल |
IPO के बाद
| एम-कैप (₹ करोड़) | 4,399 |
| नेट वर्थ (₹ करोड़) | 503 |
| प्रमोटर होल्डिंग (%) | 75.7 |
| प्राइस/अर्निंग रेशियो (P/E) | 44.8 |
| प्राइस/बुक रेशियो (P/B) | 8.7 |
फ़ाइनेंशियल हिस्ट्री
| मुख्य फ़ाइनेंशियल | 2 साल का CAGR (%) | FY26 | FY25 | FY24 |
|---|---|---|---|---|
| रेवेन्यू (₹ करोड़) | 21.6 | 692 | 779 | 468 |
| EBIT (₹ करोड़) | 10.9 | 141 | 154 | 115 |
| PAT (₹ करोड़) | 7.9 | 98 | 112 | 84 |
| नेट वर्थ (₹ करोड़) | - | 503 | 258 | 140 |
| टोटल डेट (₹ करोड़) | - | 288 | 302 | 119 |
| कैश फ़्लो फ़्रॉम ऑपरेशंस (₹ करोड़) | 28 | -155 | 201 | |
| EBIT का मतलब है ब्याज़ और टैक्स से पहले की कमाई. PAT का मतलब है टैक्स के बाद का मुनाफ़ा. | ||||
मुख्य रेशियो
| मुख्य रेशियो | 3 साल का औसत (%) | FY26 | FY25 | FY24 |
|---|---|---|---|---|
| ROE (%) | 56.1 | 25.8 | 56.3 | 86.1 |
| ROCE (%) | 34.3 | 20.9 | 37.7 | 44.3 |
| EBIT मार्जिन (%) | - | 20.4 | 19.8 | 24.5 |
| डेट-टु-इक्विटी | - | 0.6 | 1.2 | 0.8 |
| ROE का मतलब है रिटर्न ऑन इक्विटी, ROCE का मतलब है रिटर्न ऑन कैपिटल एम्प्लॉयड. | ||||
मोट वाला सेगमेंट सिकुड़ा, कॉमोडिटी वाला बढ़ा
एयरोस्पेस और डिफेंस फ़ैब्रिक फ़ाइनेंशियल ईयर 25 के ₹370 करोड़ से गिरकर फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹214 करोड़ पर आ गया. इसकी वजह सीधी है, लेकिन भरोसा दिलाने वाली नहीं. फ़ाइनेंशियल ईयर 25 में एक ही ऑर्डर से ₹205 करोड़ आए थे. वह ऑर्डर उतने बड़े पैमाने पर दोबारा नहीं आया और फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में सिर्फ़ ₹29 करोड़ मिले. एक ग्राहक, एक ऑर्डर, और कंपनी का सबसे भरोसेमंद सेगमेंट अपने रेवेन्यू का लगभग आधा हिस्सा गंवा बैठा, जो इस बिज़नेस की जन्मजात अनियमितता की तरफ़ इशारा करता है.
एयरोस्पेस और डिफेंस सॉल्यूशंस 30 प्रतिशत गिरकर ₹155 करोड़ पर आया, क्योंकि एक ग्राहक ने बड़ा कॉन्ट्रैक्ट टाल दिया. Kusumgar को ₹237 करोड़ का एक नया ऑर्डर तो मिला, लेकिन फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में इसका सिर्फ़ 24 प्रतिशत हिस्सा ही पूरा हो पाया. बाक़ी 76 प्रतिशत फ़ाइनेंशियल ईयर 27 में आने की उम्मीद है और वह भी उस ग्राहक से जिसकी टाइमलाइन पहले ही एक बार खिसक चुकी है.
मार्केट सेगमेंट (₹ करोड़)
| सेगमेंट | FY26 | FY25 | FY24 |
|---|---|---|---|
| एयरोस्पेस और डिफेंस फ़ैब्रिक | 214 | 370 | 313 |
| एयरोस्पेस और डिफेंस सॉल्यूशंस | 155 | 222 | 1 |
| इंडस्ट्रियल और ऑटोमोटिव फ़ैब्रिक | 165 | 113 | 111 |
| आउटडोर और लाइफ़स्टाइल फ़ैब्रिक | 125 | 57 | 29 |
| अन्य बिक्री | 16 | 9 | 1 |
| रेवेन्यू | 675 | 770 | 456 |
जिस ग्रोथ ने इन दोनों गिरावटों की भरपाई की, वही हिस्सा असल में ग़ौर करने लायक़ है. आउटडोर और लाइफ़स्टाइल फ़ैब्रिक दोगुने से ज़्यादा बढ़कर ₹125 करोड़ पर पहुंच गया. इंडस्ट्रियल और ऑटोमोटिव फ़ैब्रिक 46 प्रतिशत बढ़कर ₹165 करोड़ हो गया. कंपनी का कहना है कि यह दोनों ग्रोथ मौजूदा ग्राहकों के ज़्यादा ऑर्डर देने से आई, न कि नए ग्राहक जुड़ने से. मतलब फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की ग्रोथ के पीछे असल में न कोई नया रिश्ता था, न नया मार्केट, न नई एप्लिकेशन. जिस सेगमेंट ने सबसे ज़्यादा भार उठाया, वही वह सेगमेंट भी है जहां Kusumgar की प्राइसिंग पावर सबसे कम है.
दोनों बातों को साथ रखकर देखें तो फ़ाइनेंशियल ईयर 26 का सेगमेंट मिक्स एक साफ़ कहानी बताता है. बिज़नेस का जो हिस्सा ज़्यादा क़ीमत देने लायक़ था, वह सिकुड़ गया. जो हिस्सा किसी भी आम फ़ैब्रिक मैन्युफ़ैक्चरर जैसा दिखता है, वह बढ़ गया. वैल्यूएशन इन्वेस्टर्स से पहले वाले बिज़नेस की क़ीमत चुकाने को कह रही है, जबकि फ़ाइनेंशियल्स ज़्यादातर दूसरे वाले बिज़नेस को दिखा रहे हैं.
एक फ़ैक्टरी जो तीन गुनी हुई, अब आधी कैपेसिटी पर चल रही है
इन सबके नीचे एक कैपेसिटी वाली कहानी भी छिपी है. Kusumgar की प्रोसेसिंग आउटपुट कैपेसिटी फ़ाइनेंशियल ईयर 24 के 49 मिलियन मीटर से बढ़कर फ़ाइनेंशियल ईयर 25 और फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में 128 मिलियन मीटर लगभग तीन गुनी हो गई, जो इसकी नई करांज फ़ैसिलिटी के शुरू होने की वजह से हुआ. कुल कैपेसिटी यूटिलाइज़ेशन फ़ाइनेंशियल ईयर 24 के 94.3 प्रतिशत से गिरकर फ़ाइनेंशियल ईयर 25 में सिर्फ़ 42.3 प्रतिशत और फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में 49.5 प्रतिशत रह गई.
कंपनी सेगमेंट के हिसाब से यूटिलाइज़ेशन की जानकारी नहीं देती. लेकिन इतना साफ़ है कि Kusumgar ने डिमांड से काफ़ी आगे बढ़कर कैपेसिटी बना ली. आउटडोर, लाइफ़स्टाइल और इंडस्ट्रियल फ़ैब्रिक के क्षेत्र में हो रही बढ़ोतरी, कंपनी की असली कमर्शियल मज़बूती के साथ-साथ उसकी खाली पड़ी कैपेसिटी का इस्तेमाल करने की कोशिश के बारे में भी बहुत कुछ बताती है.
इसके अलावा, ट्रेड रिसीवेबल्स फ़ाइनेंशियल ईयर 25 के ₹56 करोड़ से बढ़कर फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹233 करोड़ पर पहुंच गए, यानी चार गुने से भी ज़्यादा. कंपनी ने इसकी वजह चौथी तिमाही में दर्ज की गई बल्क पैराशूट बिक्री और सर्विस कॉन्ट्रैक्ट को बताया है. नतीजतन, फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में ₹98 करोड़ का PAT दिखाने के बावजूद, कंपनी का ऑपरेटिंग कैश फ़्लो सिर्फ़ ₹28 करोड़ रहा, यानी PAT-टु-कैश कन्वर्ज़न महज़ 28.8 प्रतिशत रहा.
बढ़ते क़र्ज़ के बीच ऑफ़र फ़ॉर सेल
कुल क़र्ज़ फ़ाइनेंशियल ईयर 24 के ₹119 करोड़ से बढ़कर फ़ाइनेंशियल ईयर 25 में ₹302 करोड़ हो गया और फिर फ़ाइनेंशियल ईयर 26 में थोड़ा घटकर ₹288 करोड़ पर आया. फ़ाइनेंशियल ईयर 25 में कंपनी ने ₹100 करोड़ के एक लोन पर एक फ़ाइनेंशियल कॉवनेंट, यानी लोन एग्रीमेंट में तय एक रेशियो शर्त, तोड़ दी थी. इसका करंट रेशियो, जो कंपनी की शॉर्ट-टर्म लिक्विडिटी मापता है, कॉन्ट्रैक्ट में तय स्तर से नीचे चला गया था. बाद में लेंडर ने इस उल्लंघन को माफ़ कर दिया.
इस पृष्ठभूमि के बावजूद, IPO से जुटाए जाने वाले ₹650 करोड़ में से एक रुपया भी बिज़नेस में नहीं लगेगा. पूरा इश्यू ऑफ़र फ़ॉर सेल है और सारी रक़म Kusumgar फैमिली के पास जाएगी. ग्रोथ को सपोर्ट करने या बैलेंस शीट मज़बूत करने के लिए नई पूंजी जुटाने के बजाय, यह IPO प्रमोटर फैमिली को अपनी हिस्सेदारी का एक हिस्सा भुनाने का मौक़ा देता है.
क़ीमत असल में आपसे क्या मनवाना चाहती है
फ़ाइनेंशियल ईयर 26 की अर्निंग्स के 44.8 गुने पर, इंजीनियर्ड डिफेंस और टेक्निकल टेक्सटाइल में इस मल्टीपल को परखने के लिए कोई लिस्टेड डोमेस्टिक पीयर मौजूद नहीं है. सबसे क़रीबी तुलना Garware Technical Fibres है, जो 35.9 गुने पर ट्रेड करती है. लेकिन Kusumgar के प्रीमियम को सही ठहराने के लिए जिस फ़ाइनेंशियल ईयर 26 का हवाला दिया जा रहा है, वही वह साल भी है जिसमें इसका मुख्य डिफेंस सेगमेंट 40 प्रतिशत से ज़्यादा सिकुड़ गया. दो कम-मार्जिन वाले कमर्शियल सेगमेंट और लगभग आधी कैपेसिटी पर चल रही फ़ैक्टरी ने ही नंबरों को संभाले रखा.
इस वैल्यूएशन के टिके रहने के लिए, Kusumgar को यह साबित करना होगा कि फ़ाइनेंशियल ईयर 26 सिर्फ़ एक टाइमिंग वाली दिक़्क़त थी, न कि कमाई की क्वॉलिटी में आई गिरावट. इसका मतलब यह है कि आगे चलकर ज़्यादातर ग्रोथ फिर से डिफेंस बिज़नेस से आनी चाहिए, जबकि कमर्शियल सेगमेंट को यह दिखाना होगा कि वे असली डिमांड से बढ़ रहे हैं, न कि सिर्फ़ ख़ाली पड़ी कैपेसिटी भरने के लिए.
ग्रे मार्केट प्रीमियम लिस्टिंग वाले दिन का सेंटीमेंट तय कर सकता है, लेकिन आगे चलकर यह चार बातें ही तय करेंगी कि यह इन्वेस्टमेंट केस टिकता है या नहीं, जिसमें डिफेंस रेवेन्यू की रिकवरी, रिसीवेबल्स का कैश में बदलना, टाले गए कॉन्ट्रैक्ट का पूरा होना और बढ़ाए गए प्लांट का यूटिलाइज़ेशन शामिल है.
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