मेरी निवेश यात्रा

जीरो से हीरो

अंशुल गोयल निवेश और पर्सनल फाइनेंस के बारे में कुछ नहीं जानते थे। लेकिन अब, वे पर्सनल फाइनेंस को लेकर उत्‍साहित रहते हैं। यहां वे अपने इस सफ़र को साझा कर रहे हैं

जीरो से हीरो

36 साल के अंशुल गोयल मैनेजमेंट कंसल्टेंट के तौर पर काम कर रहे हैं। पर्सनल फाइनेंस और निवेश के बारे में उनकी पहले की जानकारी और आज की समझ में जमीन-आसमान का अंतर है। इस बदलाव के बारे में अंशुल कहते हैं मैं ‘मुझे मंथली कितनी बचत करनी चाहिए’ सवाल से ‘कैसे बनाएं वसीयत’ जैसे सवाल पूछते हुए बड़ा हुआ। मैंने चीजें सीखीं और अब, मेरे पास अपने फाइनेंस का एक रोडमैप है और इसे मैं खुद मैनेज करता हूं। अंशुल ने अपने निवेश के सफ़र को कम शब्दों में कुछ इस तरह से बयां किया है। इच्छा और खुद सीखने की ललक ने इस बदलाव को जमीन पर उतारा है।

उत्तर प्रदेश में पिलखुआ के रहने वाले अंशुल लगभग एक दशक से मुंबई में रह रहे हैं। वे शादीशुदा हैं और उनकी बेटी 5 साल की है। अंशुल की वाइफ अर्णिमा जोखिम- प्रबंधन की भूमिका में काम कर रही हैं।

बदलाव का सफ़र

कुछ साल पहले तक, अंशुल निवेश और फाइनेंस के बारे में बहुत कम जानते थे। उनको अपने फाइनेंस और गोल का कोई आइडिया नहीं था। उनको यह भी नहीं पता था कि वे अपने रिटायरमेंट और बेटी की एजुकेशन के लिए जरूरी रक़म जुटा पाएंगे या नहीं। यही नहीं, अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के नक्शेकदम पर चलते हुए, अंशुल ने ज़रूरी रिसर्च किए बिना ही 16 छोटी कंपनियों के स्टॉक्स खरीद लिए थे।

2019, में अंशुल को ऑफिस प्रोजेक्ट के सिलसिले में वैल्यू रिसर्च के सीईओ धीरेंद्र कुमार से मिलने और उनके साथ काम करने का मौका मिला। अंशुल कहते हैं ‘यह मेरे लिए नया मोड़ था’। धीरे-धीरे उनकी दिलचस्पी पर्सनल फ़ाइनेंस में बढ़ी और उन्होंने अपना फाइनेंस खुद संभालने का फैसला किया।

अंशुल ने किताबों और इंटरनेट पर पर्सनल फाइनेंस के बारे में पढ़ना शुरू किया। साथ ही ट्विटर पर कई सोशल मीडिया ग्रुप्स और पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट को फॉलो करने लगे। इसके अलावा, वे Value Research Online के रेग्युलर विजिटर बन गए। अंशुल ने बताया कि उन्होंने नियमित तौर पर इन्वेस्टर्स हैंगआउट देखना शुरू किया और पुराने एपिसोड भी देखे। हैंगआउट एक साप्ताहिक प्रोग्राम है। इसे वैल्यू रिसर्च वेबसाइट और यूट्यूब पर प्रसारित किया जाता है। प्रोग्राम में धीरेंद्र कुमार निवेश से जुड़े मसलों पर बात करते हैं और निवेशक बेहतर समझ के साथ फैसले ले सकें, इसमें उनकी मदद करते हैं।

बड़े पैमाने पर ऊर्जा और समय खपाने के बाद अंशुल ने अपने फाइनेंस की देखरेख करने के लिए एक चेकलिस्ट तैयार की। इसके कुछ प्वाइंट नीचे दिए गए हैं।

सरलीकरण: अंशुल के अब सिर्फ दो सेविंग अकाउंट हैं, पहले ये पांच थे। उन्होंने क्रेडिट कार्ड की संख्या भी 4 से घटा कर 2 कर दी है।

इमरजेंसी फ़ंड: वे एक इमरजेंसी फ़ंड मेन्टेन कर रहे हैं। यह इमरजेंसी फंड फिक्स्ड डिपॉजिट में है और छह माह के खर्च के बराबर है।

लाइफ और हेल्थ इन्श्योरेंस: हालांकि अंशुल के पास पहले से लाइफ कवर था, लेकिन उन्होंने सम अश्योर्ड बहुत सोच समझ कर तय नहीं किया था। बाद में, उन्होंने अपने गोल, कुल प्रॉपर्टी और इनकम के हिसाब से इसका नए सिरे से आकलन किया और लाइफ कवर की रकम तय की। इसके अलावा, उन्होंने अपना हेल्थ कवर 5 लाख रुपए से बढ़ा कर 10 लाख कर दिया और 90 लाख रुपए का टॉप अप कवर खरीदा। अंशुल ने एक्सीडेंट की वजह से अपंगता के वित्तीय जोखिम को कवर करने के लिए पर्सनल-एक्सीडेंट प्लान खरीदा।

तय किए फाइनेंशियल गोल: अपने रिटायरमेंट, बेटी की एजुकेशन और शादी के लिए कॉर्पस जमा करने के अलावा वे अगले 10 साल में मुंबई में घर खरीदना चाहते हैं। अंशुल का मानना है कि रिटायरमेंट बेहद अहम गोल और किसी को भी इसके लिए निवेश टालना नहीं चाहिए।

एसेट अलॉकेशन: वे एसेट अलॉकेशन की अहमियत को अच्छी तरह से समझते हैं। इसके अलावा उनको इस बात की समझ भी है कि गोल के आधार पर इक्विटी के लिए अलॉकेशन को कैसे घटाना या बढ़ाना है।

ज़रूरत से ज्यादा डायवर्सीफिकेशन को कम किया: इससे पहले, अंशुल के पोर्टफ़ोलियो में 16 फ़ंड थे। उन्होंने अब इनको कम करके 6 कर दिया है। अब उनके पास लगभग 6-7 स्टॉक्स हैं और उन्होंने ये स्टॉक्स अच्छी तरह से रिसर्च करने के बाद चुने हैं।

नॉमिनी और वसीयत: अपने सभी असेट्स और निवेश के लिए, उन्होंने नॉमिनी तय किए हैं। इसके अलावा अंशुल ने अपनी वाइफ के साथ संयुक्त वसीयत भी तैयार की है।

निवेश की रणनीति

अंशुल और उनकी वाइफ दोनों बचत करने में काफ़ी अच्छे हैं और अपनी सैलरी का बड़ा हिस्सा बचा लेते हैं। अंशुल के ज़्यादातर गोल काफ़ी दूर हैं, ऐसे में वे उनके लिए इक्विटी में निवेश कर रहे हैं। वे अपनी रकम का 90 फ़ीसदी हिस्सा म्यूचुअल फ़ंड के जरिए निवेश कर रहे हैं और बाकी सीधे स्टॉक्स में निवेश कर रहे हैं। अंशुल लार्ज और मिड कैप फ़ंड व फ्लेक्सी कैप फंड में निवेश करना पसंद करते हैं। फ्लेक्सी कैप फ़ंड हर साइज की कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। उन्होंने अपने पोर्टफ़ोलियो में स्माल-कैप फ़ंड भी शामिल किए हैं। मौजूदा समय में, उनके पोर्टफ़ोलियो में मिरे एसेट इमर्जिंग ब्लूचिप फ़ंड, SBI फोकस्ड इक्विटी फ़ंड, SBI स्माल कैप फ़ंड, कोटक फ्लेक्सीकैप फ़ंड, निप्पॉन इंडिया स्माल कैप फंड और पराग पारिख फ्लेक्सी कैप फ़ंड शामिल हैं।

अंशुल ने फिक्स्ड डिपॉजिट और बैंक में किए गए अपने पुराने निवेश को भी इक्विटी में लगा दिया है। अंशुल ने इक्विटी की अहमियत को समझा ही था कि जल्द ही कोविड की वजह से 2020 में मार्केट में बड़ी गिरावट आई। अंशुल ने इस तरह की गिरावट पहली बार देखी थी लेकिन वे इससे डरे नहीं। क्योंकि वे इस तरह के हालात के बारे में काफ़ी पढ़ चुके थे। इसके बजाए उन्होंने इस मौके का इस्तेमाल अपनी बचत का एक हिस्सा धीरे-धीरे डेट से निकाल कर इक्विटी में लगाने के लिए किया।

सेक्शन 80C के तहत 1.5 लाख की लिमिट का इस्तेमाल करने के अलावा वे NPS में भी निवेश करते हैं। इस तरह से अंशुल सेक्शन 80CCD (1B) के तहत 50,000 रुपए की अतिरिक्त टैक्स छूट भी हासिल करते हैं। हालांकि NPS में 40% रकम एन्युटी पर खर्च करने के नियम को वे एक चुनौती मानते हैं, लेकिन उनको भरोसा है कि कभी न कभी यह उनके प्लान में फिट होगा।

दूसरों को भी कर रहे अवेयर

अपने लिए एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने के अलावा, अंशुल ने फाइनेंशियल अवेयरनेस फैलाना भी शुरू कर दिया है। वे अपनी सर्किल के 15-20 लोगों को ज़रूरतें पूरी करने के लायक इन्श्योरेंस खरीदने के लिए तैयार कर चुके हैं। उन्होंने कुछ ऑनलाइन सेशन भी लिए हैं और विषय की गहरी समझ हासिल करने के लिए सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर कोर्स भी कर रहे हैं।


ये लेख पहली बार मई 26, 2022 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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