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इन्वेस्टमेंट और इन्फ़्लुएंसर

तमाम ऑनलाइन सलाहें दूसरे किसी भी काम में क़ारगर होती होंगी पर निवेश में अंधानुकरण ख़तरनाक है

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‘इन्फ़्लुएंसर’ कुछ अजीब और नया शब्द है, और आज ये पूरे-के-पूरे प्रोफ़ेशन में तब्दील हो गया है। इन्फ़्लुएंसर शब्द अपने मूल में, एडवरटाइज़ या विज्ञापित करने वालों के लिए इस्तेमाल होता है, जैसे - पारंपरिक मीडिया, जो एक इन्फ़्लुएंसर रहा है। आप किसी न्यूज़पेपर या टीवी चैनल को पैसे देते हैं कि वो लोगों को प्रभावित करने के लिए आपका विज्ञापन दिखाए; ठीक उसी तरह, जिस शख़्स के पास अच्छी ख़ासी सोशल मीडिया ऑडियंस है, आप उसे पैसे दे सकते हैं कि वो आपकी तरफ़ से पोस्ट करे, और लोगों तक आपकी बात पहुंचाए। गूगल करने पर, आप पाएंगे कि इन्स्टाग्राम पर, पुर्तगाली फ़ुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो के क़रीब आधा अरब फ़ॉलोअर हैं। रोनाल्डो प्रमोशन की एक पोस्ट के लिए, 16 लाख यू.एस. डॉलर लेते हैं। उनकी ही तरह, ऐसे और भी बहुत से लोग हैं जिनमें भारत के टॉप क्रिकेटर और एक्टर भी शामिल हैं। पर मेरी नज़र में, ये पुराने बिज़नस का ही एक रूप है, जिसमें सेलेब्रिटी किसी प्रॉडक्ट को अपनाते और प्रमोट करते रहे हैं। वक़्त के साथ विज्ञापनों का ज़रिया बदला है, पर बाक़ी सब कुछ वैसा ही है।
पर, जब बात बचत और फ़ाइनांस की आती है, तब इन्फ़्लुएंसर काफ़ी अलग तरह के जीव साबित होते हैं। ये लोग ट्विटर, इंस्टाग्राम, और यू-ट्यूब, पर मौजद होते हैं। हालांकि, ये वैसा कोई काम नहीं करते हैं, जैसा किसी प्रॉडक्ट को एंडोर्स करने वाले सलेब्रिटी करते हैं। पर, अक्सर उनके कुछ इरादे साफ़ दिख जाते हैं, और कई बार इनके इरादे ढके-छुपे भी होते हैं।
आप में से कुछ लोग पूछेंगे कि मैं इस सब के बारे में क्यों लिख रहा हूं-इसका मेरे पाठकों और मुझसे क्या लेना-देना है? दरअसल, पिछले कुछ साल के दौरान हम ऐसे कल्चर की तरफ़ बढ़े हैं, जिसमें नए हुनर सीखने के लिए ऐसे ही प्लेटफ़ॉर्म काफ़ी इस्तेमाल होने लगे हैं। क्या आप गार्डनिंग शुरु करना चाहते हैं, या खाना-बनाना सीखना चाहते हैं, हेयर-स्टाइलिंग, या फिर फ़र्नीचर की रिपेयर के काम में आपकी रुचि है? तो, आपको सिर्फ़ गूगल करना है। इनटरनेट पर आपको ऐसे कई लोग मिल जाएंगे, जिन्होंने यू-ट्यूब पर इस सबसे जुड़ा, पूरा-का-पूरा ट्यूटोरियल डाला होगा। और इनमें से कई लोगों को इन कामों में महारत भी हासिल होती है।
हालांकि, कुछ काम ऐसे हैं जिनमें ये तरीक़ा बिल्कुल क़ारगर नहीं है। अब अगर सवाल है कि क्या आप बचत और निवेश के बारे में सब कुछ सीखना चाहते हैं? क्या आपको यू-ट्यूब पर जा कर ‘निवेश कैसे करें’ टाइप करना चाहिए? कोशिश कीजिए। पर ख़याल रखिएगा कि आप इन-कॉग्नीटो/ प्राइवेट विंडो में ही ऐसी सर्च करें; वर्ना, आपकी सर्च हिस्ट्री, आपको मिलने वाले जवाब के नतीजों को प्रभावित करेगी। अब आप सर्च में सामने आए कुछ वीडियो को देख लीजिए। इन्हें देखने के बाद आपको क्या लगता है कि आपको कैसी सलाह दी गई है? इसमें सबसे ज़्यादा बातें जो आप देखेंगे, वो ये कि: पहला, ऐसे स्टॉक कैसे चुनें जो कल/ अगले हफ़्ते बहुत बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले हैं। दो, आप इस तरह के स्टॉक कितनी देर में चुन सकते हैं, यानि एक मिनट, या दस मिनट या ऐसे ही किसी छोटे से वक़्त में। तीसरा, वॉरेन बफ़ेट के फ़ेक वीडियो आपको मिल जाएंगे और चौथा, ज़ाहिर सी बात है, कि आपको क्रिप्टो पर ढ़ेर सारा ज्ञान मिलेगा। ये जिस क्वालिटी की सलाह और गाइडेंस है, उसे लेकर आप क्या सोचते हैं? मेरे ख़याल से आपने भी यही कुछ पाया होगा।
एक दिलचस्प बात निकल कर आती है कि अगर आप यही क़वायद किसी ऐसे विषय पर करते हैं, जिसे आप जानते-समझते हैं, फिर चाहे वो गार्डनिंग हो, कुकिंग हो, वुडवर्क हो, या और कुछ, तो इन ज़्यादातर विषयों पर, ऐसे वीडियो जो आपकी शुरुआती सर्च में सामने आते हैं, वो इन कामों की शुरुआत करने वालों के लिए सही होते हैं। मगर इसके ठीक उलट, बचत और फ़ाइनांस के मामले में ये बड़ा डिज़ास्टर साबित होते हैं। ऐसे वीडियो देख कर आप ख़ुद समझ जाएंगे कि आपको बहुत कम समय में नतीजे देने वाले सुझाव दिए जा रहे हैं, सट्टेबाज़ी के लिए उकसाया जा रहा है या साफ़ झूठ कहा जा रहा है, जैसे वॉरेन बफ़ेट के नाम पर कही गई बातें।
एक कारण ये भी समझ में आता है कि जब ऑडियंस के पास किसी विषय की सहज समझ नहीं होती, तो सबसे ज़्यादा तेज़-तर्रार और बढ़ा-चढ़ा कर बातें करने वाले इन्फ़्लुएंसर सबसे पॉपुलर हो जाते हैं। मिसाल के तौर पर, अगर एक गार्डनिंग करने वाला यू-ट्यूबर ऐसी सीक्रेट तकनीक का दावा करता है कि उसका लगाया पौधा एक ही दिन में भरा-पूरा पेड़ बन जाएगा, तो कोई भी सुन कर हंसेगा। पर एक इन्वेस्टमेंट वीडियो अगर क्लेम करता है कि उसके पास ऐसे स्टॉक को चुनने का सीक्रेट है, जिससे अगले छः महीनों में आपका निवेश 10X हो जाएगा-जो एक दिन में पेड़ उगाने जैसा ही हास्यास्पद है-तो कई लोग इस पर विश्वास करेंगे। दुख की बात है कि इसका कोई आसान रास्ता नहीं-ज़्यादातर लोग कोशिश करते हैं, फ़ेल होते हैं, और फिर या तो सीखते हैं, या फिर डर जाते हैं और दोबारा फिर लौट कर नहीं आते।

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