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दो डॉक्टर अलग तरह के

अगर कोई एडवाइज़र आपको कोई एडवाइज़ नहीं देता है, तो असल में ये सबसे अच्छी एडवाइस हो सकती है

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ये हर किसी का अनुभव रहा है। आप एक डॉक्टर के पास जाते हैं, या जब मैं जब परिवार में से किसी को लेकर डॉक्टर के पास जाता हूं। तो, डॉक्टर डाइग्नोस करता है और कुछ जीवन-शैली पर आधारित दवाइयों की सलाह देता है, जैसे - कसरत करना, खान-पान में सुधार करना, वगैरह। ये सुन कर अक्सर मरीज़ निराश हो जाते हैं। और अब बात करते हैं एक दूसरे तरह के डॉक्टर की जो, चार टेस्ट और एक स्कैन कराने के लिए कहता है, और ऊपर से कई महंगी दवाएं भी दे देता है।
इन दो अलग परिस्थितियों में लोगों की प्रतिक्रिया कैसी होती है? जब मैं बात इस तरह से कह रहा हूं, तो आप में से ज़्यादातर लोगों को मेरी पसंद का अंदाज़ा लग गया होगा। मगर असल दुनिया में, जब मरीज़ को लगता है कि उसके साथ कुछ गड़बड़ है, और कोई उसपर ध्यान नहीं दे रहा, तो स्वाभाविक होता है कि दूसरी तरह का डॉक्टर ज़्यादा पसंद किया जाता है। हम सभी ने ये किया है-मैं जानता हूं कि मैंने ऐसा किया है। ये मानव स्वभाव है। हम अपनी सभी मुश्किलों के प्रति गंभीर होना चाहते हैं, और जब हमें लगता है कि हमारी पेरशानियों को लेकर ‘कुछ किया जा रहा है’, तो हम महसूस करते हैं कि हमारा ख़याल रखा जा रहा है।
बहुत से लोग, तो जब पहले वाले डॉक्टर के अनुभव से गुज़रते हैं, तो वो, उसे फ़ीस देना भी पसंद नहीं करते, क्योंकि डॉक्टर ने तो कुछ किया ही नहीं! नतीजा ये होता है कि मार्केट का दबाव, दोनों डॉक्टरों को, दूसरी तरह का डॉक्टर बनने की तरफ़ धकेलता है। क्योंकि डॉक्टरी के पहले वाले मॉडल में न तो ज़्यादा आर्थिक सफलता है और न ही ग्रोथ। इसके बावजूद कि पहले वाला डॉक्टर ही आपको असली हेल्थकेयर सर्विस देता है।
क्योंकि आप जानते हैं कि ये पेज बचत और निवेश की बातों का है, इसलिए मुझे यक़ीन है कि आप समझ रहे हैं कि मेरी बातें किस दिशा में जा रही है। मेडिकल स्थिति और एडवाइस की पूरी गतिविधि जिसे मैंने बयान किया है, ये पर्सनल फ़ाइनांस पर एडवाइस और गाइडेंस पर पूरी तरह से फ़िट बैठती है। मैंने ख़ुद कई बार दोस्तों और परिवार के साथ निजी तौर पर इसका सामना किया है। जब भी कोई जानने वाला मुझे, किसी इन्वेस्टमेंट एडवाइस के लिए अप्रोच करता है। मैं उनके निवेश की ज़रूरतों को देखता हूं, उस व्यक्ति की आर्थिक ज़रूरतों को सुनता हूं, और फिर उन्हें बताता हूं कि सबकुछ ठीक है, आप जो कर रहे हैं, उसे करते रहिए-कुछ नया करने की ज़रूरत नहीं है। इसके बाद अक्सर, मैं उनके चेहरे पर निराशा के भाव देखता हूं। उन्हें लगता है कि मैं उन्हें सुन ही नहीं रहा था और मैंने उनकी ज़रूरत को गहराई से समझने की कोई कोशिश ही नहीं की है।
उन्हें इस बात का यक़ीन होता है कि उनका पोर्टफ़ोलियो सुधारा जा सकता है, मगर मुझे ही इस बात की फ़िक्र नहीं है। कई बार तो इससे भी ख़राब स्थिति होती है। मैं देख सकता हूं कि वो अपने फ़ाइनेंशियल गोल हासिल नहीं कर पाएंगे, मगर उनके चुने निवेशों में कुछ भी ग़लत नहीं होता-सिवाए इसके कि उन्हें और ज़्यादा निवेश करने की ज़रूरत होती है। लोगों को ज़्यादा बचत और निवेश करना चाहिए, ये सलाह उन्हें नाराज़ कर देती है। उन्हें लगता है कि मुझे कोई परवाह ही नहीं है। पर बात सीधी है, अगर आपको ज़्यादा पैसे चाहिए तो ज़्यादा पैसों की बचत कीजिए। इस मुश्किल से, हर नेकनीयत फ़ाइनेंशियल एडवाइज़र सामना करता है। चाहे वो प्रोफ़ेशनल काम कर रहा हो, चाहे नहीं। असल में तो इसी मुश्किल का सामना एप्स और वेबसाइट के इन्वेस्टमेंट टूल्स भी करते हैं। हमारी वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन प्रीमियम सर्विस पर, हमारे पास बहुत सारे क़ाबिल ऑटोमेटेड टूल्स हैं, जो आपको, आपके इन्वेस्टमेंट के बारे में बहुत कुछ बता सकते हैं, या कई बार, ये भी बता सकते हैं कि बताने को कुछ नहीं है!
तो, कुल मिला कर इसका नतीजा होता है कि दूसरी तरह का डॉक्टर फ़ोकस में आ जाता है। और आपका फ़ाइनेंस एडवाइज़र उस डॉक्टर की तरह होता है, जो कई टेस्ट और स्कैन ऑर्डर करता है और ऐसी कई बीमारियां ढूंढ-ढ़ूंढ के निकाल देता है जिन्हें अच्छे-ख़ास ईलाज की ज़रूरत होती है। मिसाल के तौर पर, आपको बैंक या किसी बड़ी कंपनी का ऐसा फ़ाइनेशियल एडवाइज़र कभी नहीं मिलेगा (और मेरा मतलब है कभी नहीं), जो आपसे कहे कि आपके निवेश के साथ सबकुछ ठीक है, या बहुत थोड़े से सुधार की ज़रूरत हैं। क्यों? क्योंकि इसमें कोई पैसा नहीं है। हालांकि, हमें समझना चाहिए कि ये हमारे अपने स्वभाव में है कि कोई जितना ज़्यादा काम करेगा, हमें लगेगा कि हमारे निवेश के लिए उतना ही ज़्यादा अच्छा है।
लगातार कुछ किए जाने का पूरा आइडिया असल में काफ़ी भ्रम में डालने वाला है। जब मैं असल एक्टिविटी के बारे में सोचता हूं जिसे करते हुए निवेशक का ज़्यादातर समय गुज़रना चाहिए, तो वो है, कुछ नहीं। बशर्ते उन्होंने अपना पोर्टफ़ोलियो अच्छी तरह से तैयार किया हो। ज़्यादातर लोगों के लिए-क़रीब-क़रीब सभी के लिए-पूरे जीवन के निवेश के लिए उन्हें कुछ भी करने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। निवेश का ज़्यादातर काम इंतज़ार करने का है। वो महीनों और सालों का इंतज़ार होता है, जब आपका निवेश बढ़ा रहा होता है।

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