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एक बुरी ख़बर: क्रिप्टो रैकेट बच जाएगा

FTX के दिवालिया होने के बाद, होना कुछ था, हो कुछ रहा है। लगता है क्रिप्टो का ग्लोबल रैकेट बच जाएगा, ये भी हो सकता है कि ये रैकेट और बड़ा हो जाए

FTX के दिवालिया होने के बाद, होना कुछ था, हो कुछ रहा है। लगता है क्रिप्टो का ग्लोबल रैकेट बच जाएगा, ये भी हो सकता है कि ये रैकेट और बड़ा हो जाए

FTX दिवालिया होने के बाद, मैं ख़ुश हूं कि भारत में क्रिप्टो रेग्युलेटेड नहीं है। क्रिप्टो को रेग्युलेट किया भी नहीं जाना चाहिए। जो लोग इसमें शामिल हैं उन्हें उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए। उनके चुने हुए तरीक़े और वक़्त के मुताबिक़ उन्हें दिवालिया होने की आज़ादी देनी ही चाहिए।
मुझे लगता है, नियमित तौर पर मुझे पढ़ने वाले मेरी इस बात से अचरज में पड़ जाएंगे। क्योंकि एक अर्से से मैं लिखता रहा हूं कि क्रिप्टो एक्सचेंज और क्रिप्टो ट्रेडिंग जल्द-से-जल्द रेग्युलराइज़ की जानी चाहिए। अख़बारों और वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन पर, मैं ये कहता रहा हूं कि ये तथाकथित एक्सचेंज, असल में एक्सचेंज हैं ही नहीं और भारतीय निवेशकों के बैंक अकाउंट्स के लिए एक गंभीर ख़तरा हैं।
मैं सोचता हूं कि रेग्युलेशन का न होना ही बेहतर है, क्योंकि क्रिप्टो को रेग्युलेट करने से, एक रेग्युलेटर तमाम क्रिप्टो एक्सचेंजों को भरोसेमंद होने का सर्टिफ़िकेट देने का काम करने लगेगा, और ये बुरा है। हालांकि, FTX के ख़ात्मे के बाद जो ब्यौरा सामने आ रहा है, वो दिखाता है कि या तो इन्हें रेग्युलेट किया ही नहीं जा सकता या करने लायक़ ही नहीं हैं। क्रिप्टो ठगी करने वालों के लिए ही बना है। इसलिए वो सबसे ज़्यादा जालसाज़ों को ही आकर्षित करता है। FTX के दिवालिया होने के कुछ देर बाद, किसी ने मज़ाक किया था, जिसे मैंने री-ट्वीट किया। मज़ाक था कि "अभी-अभी अपने नए स्टार्टअप के लिए मैंने $500 मिलियन इकठ्ठे किए हैं। इसमें AI के ज़रिए क्रिप्टो का फ़्रॉड पकड़ा जाता है। हम असल में AI का इस्तेमाल नहीं करते हैं। हम सिर्फ़ ये कहते हैं कि सबकुछ फ़्रॉड है और अभी तक हम ग़लत साबित नहीं हुए हैं।"
ये मज़ाक इसलिए हंसाता है क्योंकि जो भी इसे पढ़ रहा है उसे मालूम है कि यही सच भी है। हो सकता है क्रिप्टो कुछ ईमानदार लोगों को भी आकर्षित करे, और पहले-पहले ऐसा हुआ भी। मगर, जैसा कि होता है बुरे लोग जल्दी ही अच्छे लोगों को बाहर कर देते हैं, ठीक वैसे ही जिस तरह से अर्थशास्त्र में ग्रेशम का नियम कहता है कि बुरा पैसा, अच्छे को बाहर कर देता है। और FTX के दिवालिया होने के बाद के दिनों ने इसे साफ़ कर दिया है।
मैडॉफ़ की घटना के आधार पर, ये माना जा सकता था कि एक व्यक्ति जो 10 बिलियन डॉलर से ज़्यादा की धोखाधड़ी वाली स्कीम चलाएगा उसे हर किसी की निंदा का पात्र बनना पड़ेगा और उसका पक्ष लेने वाला कोई नहीं होगा। मगर, FTX के बॉस सैम बैंकमैन-फ़्रीड के साथ जो हो रहा है, वो बहुत अलग है।
यूएस मीडिया में बहुत से आर्टिकल छपे हैं जो इस इंसान द्वारा किए गए नुक़सान को कम करने में लगे हुए हैं। वो इसे, सीधे-सीधे चोरी कहने के बजाए, ग़लतियों और ग़लत फ़ैसलों का दर्जा दे रहे हैं। कई आर्टिकल इस बात की चर्चा भी ज़ोर-शोर से कर रहे हैं कि कैसे उसके कई डोनेशन्स के ज़रिए बहुत सी साईंस रिसर्च, और दूसरे परोपकार के काम चल रहे थे और अब, ये सब रुक जाएंगे।
"FTX दिवालिया होने से पहले, फ़ाउंडर ने करोड़ों डॉलर पैनडेमिक की रोक-थाम के लिए दिए। अब ज़्यादातर ऐसे काम अचानक थम गए हैं," एक प्रभावशाली अमेरिकी अख़बार की असल हेडलाइन का ये हिंदी अनुवाद है।
पर ऐसा क्यों हो रहा है? और उससे भी ज़रूरी सवाल कि भारतीय बचतकर्ताओं और निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं? पहली बात तो ये कि क्रिप्टो की ठगी अब एक ग्लोबल फ़ाइनेंशियल सिस्टम के तौर पर बरक़रार रह सकती है। FTX ने दिखाया है कि आप दुनिया भर के निवेशकों से कई बिलियन झटक कर, और उस पैसे को उड़ा भी दें, तो क्रिप्टो के क़ायम रहने पर कोई सवाल नहीं उठाएगा। क्यों? क्योंकि ये बड़ी आसानी से, बड़ा पैसा बनाने का तरीक़ा है। क्रिप्टो को लेकर मुख्यधारा का यही नज़रिया है कि ये एसेट क़ानूनी तौर पर स्वीकार्य है, और जहां फ़िलहाल कुछ रेग्युलेशन की मुश्किलें हो सकती हैं, मगर जल्दी ही ये सब ठीक हो जाएगा। आज नहीं तो कल, एक और बुल रन आएगा, और बची हुई क्रिप्टो करंसियां और टोकन उस उछाल से आसमान छूने लगेंगे, जिसके बाद दुनिया भर से निवेशकों का एक नया झुंड अपनी पूंजी आर्थिक स्थिति को दांव पर लगाने के लिए क्रिप्टो की तरफ़ दौड़ पड़ेगा।
पर हां, हो सकता है कि ऐसा नहीं हो। अब भी काफ़ी ऐसे प्रभावशाली लोग हैं, और यूएस में हैं, जो क्रिप्टो को और कुछ नहीं केवल ठगी-के-लिए-बना रैकेट कहते हैं। हालांकि, अगर क्रिप्टो में मुनाफ़े के आंकड़े फिर से बढ़ने लगते हैं, तो भारत में कई लोग फिर से निवेश शुरु कर देंगे। सोशल मीडिया की हलचलों से साफ़ है कि कई निरुत्साहित करने वाले प्रावधानों के बावजूद, कई भारतीय चुपचाप, भारत के और अंतर्राष्ट्रीय एक्सचेंजों में क्रिप्टो में ट्रेड कर रहे हैं। इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता सिवाए उस कहावत के कि मूर्ख और उसके पैसे जल्द ही अलग हो जाते हैं। पर आप समझदारी से काम लीजिए। अपना पैसा सुरक्षित रखिए।

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