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सरासर ग़लत है ये टैक्स

डेट फंड से इंडेक्सेशन हटाने की वजह से अब ये इन्वेस्टमेंट बेकार हो गया है

डेट फंड से इंडेक्सेशन हटाने की वजह से अब ये इन्वेस्टमेंट बेकार हो गया है

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ऐसा लगता है कि इस बदलाव से पहले, सरकार ने इस साल के बजट में एक संशोधन शामिल कर दिया है. इसके तहत अब डेट फंड, गोल्ड फंड और हाइब्रिड म्यूचुअल फंड की कुछ कैटेगरी में निवेश के लिए इंडेक्सेशन (indexation) नहीं होगा. प्रभावी रूप से, 35 फ़ीसदी से कम इक्विटी वाले सभी म्यूचुअल फंड (Mutual Funds) में कैपिटल गेन्स (capital gains) जैसी कोई सुविधा नहीं होगी. इस बात से कोई फर्क़ नहीं पड़ेगा कि आपने कितने लंबे वक़्त तक उन्हें होल्ड किया है. जैसे ही आप इन्हें बेचेंगे, इनसे हुआ फ़ायदा उस साल की आपकी कुल इनकम में जुड़ जाएगा. इस तरह से आप पर लागू होने वाले टैक्स स्लैब के तहत इस पर आपको टैक्स चुकाना होगा.

आप पर लगने वाले टैक्स पर इसका ख़ासा असर होगा, क्योंकि अब आपके मुनाफ़े का कैलकुलेशन करने के लिए आपको इंडेक्सेशन नहीं मिलेगा. ग़ौर करने की बात है कि कैपिटल गेन्स का इंडेक्सेशन महंगाई दर से एडजस्ट किया जाता रहा है. ये सरकार की तरफ़ से न तो छूट है, और न ही कोई गिफ़्ट. ये महंगाई का मुआवज़ा या inflation compensation है. आसान शब्दों में कहें, तो वक़्त के साथ करंसी की वैल्यू घट जाती है, और एक से ज़्यादा साल में मिलने वाला कथित मुनाफ़ा महज़ छलावा होता है. यानी, जब आपने निवेश किया था उसकी तुलना में आज पैसे की क़ीमत कम हो गई है. किसी भी स्थिति में, करंसी का कमज़ोर होना सरकार के कामकाज का नतीजा होता है. महंगाई के मद्देनज़र, किसी भी भ्रामक फ़ायदे पर टैक्स नहीं लगाया जाना चाहिए.

महंगाई आपके फ़ायदे का बड़ा हिस्सा निगल जाती है, और इंडेक्सेशन इसी की भरपाई करता है. चलिए, एक असल मिसाल पर ग़ौर करते हैं. वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन पर लिस्टिड मीडियम टर्म डेट फंड्स (Medium Term Debt funds) के मौजूदा तीन साल का औसत प्रति-वर्ष रिटर्न 6.56 फ़ीसदी रहा, जो इस अवधि में कुल 21 फ़ीसदी होता है. अगर, हम इनकम टैक्स डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर कॉस्ट इनफ़्लेशन इंडेक्स पर ग़ौर करें, तो हम पाते हैं कि इस दौरान इंडेक्स 289 से बढ़कर 331 हो गया है, यानी ये 14 फ़ीसदी बढ़ चुका है. अगर मिसाल के तौर पर लिए गए फंड्स पर हम इंडेक्स को लागू करते हैं, तो टैक्सेबल मुनाफ़ा 21 फ़ीसदी नहीं, बल्कि महज़ 5.6 फ़ीसदी रह जाता है. अगर इंडेक्सेशन नहीं है, और आप सबसे ऊंचे टैक्स ब्रेकेट में आते हैं, तो आपका पूरा का पूरा फ़ायदा सरकार के पास चला जाएगा.

आपके पैसे का एक बड़ा हिस्सा महंगाई निगल लेगी और बाक़ी टैक्स के रूप में चला जाएगा. इस मामले में अब लंबे समय के लिए निवेश करने का कोई औचित्य नहीं रहेगा.

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