मैनेजर स्पीक

“हम मोमेंटम या घटनाओं पर निर्भर रहने वाले पोर्टफ़ोलियो मैनेजर नहीं”

हर्ष उपाध्याय, चीफ़ इन्वेस्टमेंट ऑफ़िसर इक्विटी, कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी से एक्सक्लूसिव बातचीत

हर्ष उपाध्याय, चीफ़ इन्वेस्टमेंट ऑफ़िसर <span>–</span> इक्विटी, कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी से एक्सक्लूसिव बातचीत

हर्ष उपाध्याय कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट कंपनी में CIO-इक्विटी के तौर पर काम कर रहे हैं. उनकी ज़िम्मेदारी ₹55,000 करोड़ के एसेट की देखरेख करने की है. वो भारत के तीसरे सबसे बड़े एक्टिव इक्विटी फ़ंड मैनेजर हैं और उनका व्यक्तित्व की ख़ूबियां, उनके फ़ंड के प्रदर्शन में झलकती हैं. हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में, उन्होंने AMC की GARP फ़िलॉसफ़ी के बारे में बताया और साथ ही ये भी बताया कि वो अपने फ़ंड्स कैसे मैनेज करते हैं, जिनमें से कुछ हमारी रेकमेंडेशन की लिस्ट में भी शामिल हैं. क्या आप हमें वो फ़्रेमवर्क और पैरामीटर समझने में मदद कर सकते हैं जिनका इस्तेमाल आप अपने पोर्टफ़ोलियो को बनाने और मैनेज करने के लिए करते हैं? हमारी निवेश की फ़िलॉसफ़ी सही कीमत पर ग्रोथ या GARP (growth at a reasonable price) पाने की है. हमारे पोर्टफ़ोलियो का झुकाव ग्रोथ कंपनियों की तरफ़ होता है, मगर हम उनके वैल्युएशन को लेकर भी सचेत रहते हैं. हम मोमेंटम या घटनाओं को आधार बनाने वाले पोर्टफ़ोलियो मैनेजर नहीं हैं; हमारी अप्रोच ज़्यादातर ख़रीदो-और-होल्ड करो की होती है. असल में, हमारा पोर्टफ़ोलियो टर्नओवर इंडस्ट्री में सबसे कम टर्नओवर वालों में से है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि हमारी फ़िलॉसफ़ी और अनुशासन हमारे पूरे निवेश के प्रोसेस की जड़ में है. और यही हमें उतार-चढ़ाव को मैनेज करने के लिए अच्छी स्थिति में रखता है. निवेश का प्रोसेस साफ़-साफ़ डिफ़ाइन किया हुआ है, और हर पोर्टफ़ोलियो मैनेजर को उसे मानना होता है ताकि अगर टीम में कोई बदलाव आता भी है तो भी, हमारे निवेशकों को हमारी निवेश की अप्रोच में कोई बदलाव न महसूस हो. जब हम स्टॉक्स का चुनाव करते हैं तो हमारा फ़ोकस तीन पैरामीटर पर रहता है: बिज़नस, मैनेजमेंट और वैलुएशन. हम कंपनी के बिज़नस परफ़ॉर्मेंस और इंडस्ट्री में उसकी स्थिति को देखते हैं. हम कंपनी के बढ़ने की क्षमता, लगातार बने रहने की क्षमता और प्रतिद्वंदियों के मुक़ाबले मज़बूत बढ़त को भी जांचते हैं. इसके अलावा, हम ऐसे फ़ैक्टर का अध्ययन भी करते हैं जो उस बिज़नस को ग्रोथ और मुनाफ़ा दे सकें. दूसरी बात कि हम प्रमोटर का विज़न चेक करते हैं और ये भी कि क्या उनके हित माइनॉरिटी शेयर-होल्डरों के साथ मेल खाते हैं या नहीं. हम कैपिटल एलोकेशन के फ़ैसलों को लेकर उनकी सोच को समझने क

ये लेख पहली बार अप्रैल 05, 2023 को पब्लिश हुआ.

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