
हो सकता है आपने सुना हो, "मेरा कुत्ता मेरा होमवर्क खा गया", लेकिन क्या कभी सुना है "एक CA रिज़ल्ट लेकर ग़ायब हो गया?"
ये बेकार का मज़ाक लग सकता है, लेकिन BSE पर लिस्टिड एक कंपनी, माइलस्टोन फर्नीचर (Milestone Furniture) ने अपने अपडेट में यही दावा किया है.
BSE को दी इस आधिकारिक जानकारी के मुताबिक़, माइलस्टोन के मैनेजमेंट ने कहा कि वो SEBI के आदेश के तहत, फ़ाइनेंशियल ईयर 23 के नतीजे फ़ाइल नहीं कर पाएंगे, क्योंकि "उसके मौजूदा चार्टर्ड अकाउंटैंट यानी CA, भूपेंद्र गांधी लापता हो गए हैं और फ़ोन कॉल का कोई जवाब नहीं दे रहे हैं. इसलिए, फ़ाइनेंशियल डेटा के साथ-साथ उस डेटा के इंचार्ज की ग़ैर मौजूदगी में फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट अभी मिल नहीं सके हैं."
पहली बात ये है कि इस ख़बर को देने का श्रेय हेलियोस कैपिटल के फ़ाउंडर और फ़ंड मैनेजर समीर अरोड़ा को जाता है, जिन्होंने अपने हाल के एक ट्वीट के ज़रिये ये छोटी सी, लेकिन दिलचस्प ख़बर दी है.
उनका ट्वीट पढ़ने और काफ़ी देर तक हंसने के बाद, हमने इसकी तह में जाने का फ़ैसला किया. कौन उन घटनाओं के बारे में नहीं जानना चाहेगा जिनके कारण किसी कंपनी के CA ने उसे छोड़ दिया और ग़ायब हो गया? तो चलिए बात शुरू से शुरू करते हैं.
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मार्केट में आगाज़
इसकी मौजूदा स्थिति के उलट, मार्केट में माइलस्टोन की एंट्री साधारण रही थी. कंपनी 21 मार्च, 2018 को ₹45 प्रति शेयर के भाव पर BSE SME प्लेटफ़ॉर्म पर लिस्ट हुई थी. उसने वर्किंग कैपिटल और एक मैन्युफैक्चरिंग फ़ैसिलिटी के Capex के लिए IPO के ज़रिये लगभग ₹15 करोड़ जुटाए थे.
कंपनी ने फ़ाइनेंशियल ईयर 19 में अपने IPO से पहले के तीन वर्षों के दौरान अच्छा रेवेन्यू और टैक्स के बाद लाभ में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज की थी. इसे देखते हुए, प्रबंधन पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं था.
ग़ायब होते एसेट
हालांकि, उसकी प्रस्तावित मैन्युफ़ैक्चरिंग फ़ैसिलिटी कभी अस्तित्व में नहीं आई और कंपनी के किसी भी मौजूद सालाना रिज़ल्ट में, किसी भी तरह के कैपिटल एक्सपेंडिचर का कोई ज़िक्र नहीं किया.
इसके विपरीत, बीते तीन साल के दौरान कंपनी के लंबे समय की ठोस एसेट्स में लगातार गिरावट दर्ज की गई.
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दाल काली होने की शुरुआत
फ़ाइनेंशियल ईयर 21 में, कंपनी ने कुल ₹22 लाख का रेवेन्यू दर्ज किया, जबकि उसके अकाउंट में ₹4.5 करोड़ की प्राप्तियां रहीं.
कुछ तो गड़बड़ है
CA के भागने से पहले ही माइलस्टोन के खातों में गड़बड़ी के संकेत मिलने लगे थे
| फ़ाइनेंशियल्स | FY18 | FY19 | FY20 | FY21 |
|---|---|---|---|---|
| रेवेन्यू (करोड़ ₹ में) | 25.3 | 8.16 | 0.8 | 0.22 |
| कर बाद मुनाफ़ा (करोड़ ₹ में) | 1.16 | 0.09 | 0.01 | -1.25 |
| ट्रेड से जुड़ी प्राप्तियां (करोड़ ₹ में) | 5.75 | 5.34 | 4.68 | 4.48 |
| वास्तविक एसेट्स (करोड़ ₹ में) | 4.92 | 4.57 | 4.35 | 4.03 |
| प्रमोटर की स्टेक (%) | 100 | 64.54 | 64.54 | 64.54 |
इसे ख़तरे की घंटी कहना ग़लत नहीं होगा, क्योंकि रेवेन्यू की तुलना में अकाउंट में 37.5 गुनी रक़म जमा हुई. यहां तक कि आपका लोकल स्टोर भी आपको इस स्थिति में उधार बेचना बंद कर देगा, अगर आप उन्हें उसके सालाना रेवेन्यू की तुलना में 30 गुना से ज़्यादा का भुगतान करते हैं.
पहले कौन भागा
लिस्टिंग के समय प्रमोटर्स के पास कंपनी की 60 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी, और फ़ाइनेशियल ईयर 21 तक इसी स्तर के आसपास बनी रही. लेकिन, फिर कुछ ऐसा हुआ (SMEs के मामले में यही ख़तरा रहता है और आपको अक्सर मालूम ही नहीं चलता कि क्या हुआ है) और प्रमोटर्स ने बिज़नस का पूरा बोझ रिटेल इन्वेस्टर्स के ऊपर डालने का फैसला किया.
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फ़ाइनेंशियल ईयर 22 तक प्रमोटरों की हिस्सेदारी घटकर 37 फ़ीसदी रह गई और सितंबर 2022 तक रिटेल इन्वेस्टर्स के पास कंपनी की 100 फ़ीसदी हिस्सेदारी थी.
फ़ाइनेंशियल ईयर 22 में ज़ीरो हुए
अब, जब आप जानते हैं कि क्या हुआ था, तो आप महसूस कर सकते हैं कि वर्तमान में हुई घटनाओं के काफ़ी संकेत पहले ही मिलने लगे थे. आपका सोचना सही है, लेकिन हमने अभी तक एक बेहद दिलचस्प बात का ज़िक्र ही नहीं किया है.
फ़ाइनेंशियल ईयर 22 में कंपनी ने कुछ नहीं बेचा (sale)!
हम अक्सर बोलते हैं कि किसी बिज़नस को बनाए रखने के लिए मुनाफ़ा कितना अहम है. लेकिन अगर कोई कंपनी प्रोडक्ट्स या सर्विस की बिक्री नहीं कर रही है, तो क्या उसे बिज़नस कहा जा सकता है?
इस कहानी से क्या सीख मिली
माइलस्टोन फ़र्नीचर के मामले से इस बात की अहमियत पता चलती है कि हम क्यों अपने पाठकों से हमेशा
SME IPOs में निवेश से बचने
की बात कहते रहते हैं.
SME IPOs के बारे में हमें जो चिंताएं होती हैं, उसके सारे संकेत माइलस्टोन में मौजूद थे: अच्छे नतीजों के ठीक बाद IPO का आना, प्रमोटर का अचानक निकलना शुरू हो जाना, जानकारियों की भारी कमी, आदि इनमें शामिल हैं.
हम अपने पाठकों को इस कहानी के ज़रिये याद दिलाना चाहते हैं कि भले ही सभी निवेशों में जोख़िम होता है, लेकिन इस तरह के संदिग्ध प्रबंधन और जानकारियों की भारी कमी वाली कंपनियां स्टेरॉयड की तरह हैं, यानी उनमें निवेश करना ख़ासा ख़तरनाक है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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