
बचत और निवेश की दुनिया में टैक्स शायद सबसे डरावना शब्द है. असल में, महंगाई सबसे ज़्यादा नुक़सान करती है, मगर ज़्यादातर निवेशक इसके असर के बारे में उतना नहीं जानते. यही वजह है कि टैक्स लोगों को ज़्यादा डराते हैं. और ये बिना वजह नहीं है. ये होते भी ख़तरनाक हैं. अच्छे-खासे रिटर्न भी ख़राब लगने लगते हैं, और आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा उड़ा ले जाते हैं. कुछ केस तो ऐसे होते हैं कि लोग टैक्स से बचने के लिए ग़ैरकानूनी काम कर बैठते हैं, मगर ये हमारा विषय नहीं है. लंबे समय के लिए निवेश करने वालों को जो बात सबसे ज़्यादा चुभती है वो ये कि टैक्स आपके रिटर्न का एक हिस्सा तब भी ले जाते हैं जब आपका इरादा सिर्फ़ अपने निवेश को फ़ाइन-ट्यून करने का ही होता है (जैसे कि रि-बैलेंस करना), उनसे बाहर निकलने का नहीं. इसलिए, हर समझदार निवेशक का धर्म है कि वो टैक्स को लेकर जागरूक रहे. आप उनसे बच तो नहीं सकते, मगर ये ग़लत नहीं है कि आप टैक्स को अपने फ़ाइनांस पर प्रहार होने से बचाने के लिए मौजूद हर क़ानूनी तरीक़ा अपनाएं. हालांकि, मुश्किल तब खड़ी हो जाती है जब आप टैक्स बचाने को ही अपना आखिरी ध्येय समझ बैठते हैं, और ये सोच, आपके निवेश के फ़ैसलों पर हावी होना शुरू हो जाती है. हाल ही में, हमने देखा कि जब सरकार ने कुछ तरह के फ़ंड्स से इंडेक्सेशन के फ़ायदे ख़त्म करने का ऐलान किया, तो इस नियम के अमल में आने से पहले इन फ़ंड्स में निवेश की होड़ लग गई. इस बारे में काफ़ी कुछ लिखा जा चुका है, और हमने भी लिखा है, तो उसपर यहां बात
ये लेख पहली बार जुलाई 12, 2023 को पब्लिश हुआ.
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