
बेहद व्यस्त मानी जाने वाली मनी मैनेजमेंट इंडस्ट्री में, सोहिनी अंदानी असल में एक अलग ही व्यक्तित्व रखती हैं. एक दशक से ज़्यादा के ट्रैक रिकॉर्ड के साथ, वो देश की अकेली फ़ंड मैनेजर हैं, जिन्होंने दो मार्केट-कैप सेगमेंट से जुड़ी स्कीम्स की सफलता से अगुआई की है. अंदानी इस समय SBI फ़ंड्स मैनेजमेंट में फ़ंड मैनेजर के तौर पर, SBI के लार्ज और मिड-कैप फ़ंड्स की देखरेख कर रही हैं. उनके साथ हमारी बातचीत के दौरान, हम उनके सटीक जवाबों से प्रभावित हुए. इनमें चाहे एक्टिव-बनाम-पैसिव की बहस में शामिल होना हो या AMC के पुराने शॉर्ट-टर्म नज़रिए पर अपनी समझ को हमारे साथ शेयर करना हो, उनकी बातें कम शब्दों में कही गईं और हर तरह से सही लगीं. यहां इंटरव्यू का एक हिस्सा हम आपके लिए पेश कर रहे हैं. निकट भविष्य में SBI म्यूचुअल फ़ंड ने निवेशकों को इक्विटी से उम्मीदों के लिहाज से निराश किया है. क्या आप हमें अपना नज़रिया समझाने में मदद कर सकती हैं? लंबे समय के औसत की तुलना में मार्केट वैलुएशन औसत से ऊपर रही है. अब भी, हम पिछले दो महीनों से देख रहे हैं कि घरेलू (संस्थागत निवेशक) और FII (विदेशी निवेशक) दोनों बाज़ार में सिर्फ़ ख़रीदार रहे हैं. कोई बेचने वाला नहीं है, जिससे स्टॉक की क़ीमतों में मज़बूती दिख रही है. हमारा मानना है कि ऐसा ज़्यादा समय तक नहीं चलेगा. जब बाज़ार का वैश्विक हालात के साथ तालमेल न हो तो निवेशकों को क्या करना चाहिए? अपना सारा पैसा एक बार में ना लगाएं. इस तरह, आपको बाज़ार के उतार-चढ़ाव का कुछ फ़ायदा मिलता है. ये कम-से-कम इतना सा काम है जिसे कोई भी कर सकता है. आपको इक्विटी में अपने पूरे एलोकेशन को भी देखना होगा. अगर ये बहुत ज़्यादा है, तो संभवतः आपको इक्विटी में ज़्यादा एलोकेशन नहीं करना चाहिए; यदि यह कम है, तो आप संभवतः धीरे-धीरे निवेश कर सकते हैं. ये भी पढ़िए- एक रिटायर्ड व्यक्ति को इक्विटी में कितना निवेश करना चाहिए? मोटे तौर पर बैंकिंग और फ़ाइनेंशियल सर्विस सेक्टर की बात करें तो क्या आपके लगता है कि वो लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं? उनकी मौजूदा रैली पर क्या असर पड़ सकता है? अगर आप बै
ये लेख पहली बार जुलाई 06, 2023 को पब्लिश हुआ.
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