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फ़िनफ़्लुएंसरों का खेल

ब्रोकर अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसे फ़ीचर डाल रहे हैं , जिनसे लगता है कि इसका मक़सद सिर्फ़ अनरेग्युलेटेड एडवाइज़रों को नए शिकार बनाने में मदद करना है.

ब्रोकर अपने प्लेटफ़ॉर्म पर ऐसे फ़ीचर डाल रहे हैं , जिनसे लगता है कि इसका मक़सद सिर्फ़ अनरेग्युलेटेड एडवाइज़रों को नए शिकार बनाने में मदद करना है.Anand Kumar

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अपने हाल में लिखे कॉलम में, मैंने नसीम निकोलस तालेब के उस आइडिया के बारे में लिखा था कि कैसे निवेश की सलाह देने वाले एडवाइज़रों को अपनी क़ाबिलीयत दुनिया को साबित करनी चाहिए. मैंने लिखा था: अपनी क़िताब 'स्किन इन दे गेम', में तालेब ने इन्वेस्टमेंट एडवाइज़रों के लिए एक दिलचस्प सलाह दी है. "मुझे मत बताओ क्या करना है, बस अपना पोर्टफ़ोलियो दिखा दो," ये बात, वो उन लोगों के लिए कहते हैं जो दूसरों को सलाह देते हैं कि उन्हें कहां निवेश करना चाहिए. ये उन सभी इन्वेस्टमेंट एडवाइज़रों के लिए एक सीधी-सादी अमल करने वाली बात होगी कि वो अपने पोर्टफ़ोलियो का पब्लिक रिकॉर्ड रखें.

मैं जब ये लिख रहा था तब मुझे इसका एहसास नहीं था कि सोशल मीडिया के किसी 'फ़िनफ़्लुएंसर' (finfluencer) वाले कोने में, तालेब का सुझाया ये आइडिया कुछ समय से पक रहा है. जो लोग ट्रेडिंग एडवाइस का दावा करते हैं वो ऐसे स्क्रीनशॉट पोस्ट करते हैं जिसमें दिखे कि ये लोग ट्रेडिंग से कितना पैसा बना रहे हैं. और हां, सोशल मीडिया पर ये सामान्य बात है और काफ़ी समय से हो रही है. मुश्किल ये है कि नकली स्क्रीनशॉट बनाना काफ़ी आसान है. जब तक आप कोई एक्सपर्ट नहीं हैं, आपके लिए ये बताना मुश्किल होगा कि असली और नकली ट्रेडिंग परफ़ॉर्मेंस में क्या फ़र्क़ है. मगर आश्चर्य इस बात का है कि कुछ लोग, 'स्क्रीन शॉट का बिज़नस' करने वाले इन लोगों पर विश्वास कर लेते हैं. फिर भी, मुझे लगता है कि अगर आप दसियों हज़ार या कुछ हज़ार लोगों तक भी पहुंचते हैं, तो उनमें से कुछ तो ऐसे होंगे ही जो आसानी से धोखा खा जाएं या पैसे बनाने के लिए इतने आतुर हों कि किसी भी बात पर विश्वास कर लेंगे.

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समय के साथ, काफ़ी लोगों को समझ आने लगा कि स्क्रीनशॉट किसी व्यक्ति के ट्रेडिंग का धुरंधर होने का भरोसेमंद सुबूत नहीं है, और ट्रेडिंग परफ़ॉर्मेंस का भरोसा दिलाने के लिए बेहतर तरीक़े की ज़रूरत होगी. इसे नोट करें कि स्क्रीनशॉट पर ये अविश्वास तब पैदा हुआ जब इनमें से कई नकली साबित हो गए. तमाम फ़िनफ़्लुएंसरों ने दुनिया को जो अपने ट्रैक रिकॉर्ड दिखाए थे वो उनकी उस सलाह से ज़रा भी मेल नहीं खाते थे जिसे वो दुनिया भर में बांटते फिर रहे थे. ये 'मुश्किल' अब सुलझा ली गई है, अलबत्ता कुछ अजीबोगरीब तरीक़े से.

कुछ ब्रोकरों और ट्रेडिंग प्लेटफ़ॉर्म ने एक तरकीब निकाली है कि ट्रेडर अपनी ट्रेडिंग का प्रॉफ़िट और लॉस (P&L) एक वेरिफ़ाई किए जाने वाले तरीक़े से दिखा सकें. इसके लिए ट्रेडर, ट्रेडिंग वेबसाइट का लिंक जेनरेट करते हैं जो लोगों के बीच शेयर किया जाता है. लिंक पर क्लिक करने पर उस ट्रेडर का प्रॉफ़िट और लॉस देखा जा सकता है. अहम ये है कि लिंक लोगों के साथ साझा करने के पहले वो चुन सकते हैं कि क्या दिखाना है और क्या छुपाना है. टाइम पीरियड, एसेट टाइप, प्रिंसिपल अमाउंट दिखाया जाए या नहीं ये सभी बातें कस्टमाइज़ की जा सकती हैं.

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इसका नतीजा क्या होता है आसानी से समझा जा सकता है. ब्रोकर द्वारा वेरिफ़ाई किए P&L पर भरोसे की मुहर लगी होती है मगर उसे सावधानी से ट्यून किया जा सकता है. ठीक वैसे ही, जैसे भ्रम में डालने वाले स्क्रीनशॉट के साथ होता है. जब कोई फ़िनफ़्लुएंसर, स्क्रीनशॉट पोस्ट करता है तब आप जानते हैं कि ये पूरा सच नहीं है. हालांकि, जब किसी बड़े ब्रोकर की वेबसाइट पर आपको P&L दिखाया जा रहा होता है, तो इसमें सच का आभास होता है, जो इसे अनजान लोगों के मूर्ख बनाने का ज़्यादा असरदार तरीक़ा बना देता है.

असल सवाल है कि ब्रोकर अपनी सर्विस में इस फ़ीचर को क्यों जोड़ रहे हैं. ये किसकी ज़रूरत को पूरा कर रहा है? कौन इस फ़ीचर की मांग कर रहा है? दरअसल, ये सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर के रेग्युलेशन को गच्चा देने का और रेग्युलेटर के रडार से बचकर काम करने वाले सोशल मीडिया के ट्रेडिंग एडवाइज़रों को स्थापित करने का 'वेरिफ़ाइड P&L' एक तरीक़ा है. अगर SEBI अनरेग्युलेटेड ट्रेडिंग एडवाइज़रों (या कोच या ये ख़ुद को कुछ भी नाम देते हों) को हटाने के बारे में सीरियस है, तो उसे इन वेरिफ़ाइड P&L के फ़िनॉमिना को गंभीरता से लेना होगा. इन्हें क़ाबू में रखना ऐसे लोगों को निवेशकों से दूर रखने का अच्छा तरीक़ा हो सकता है.

कुछ लोग वेरिफ़ाइड P&L का इस्तेमाल करके, बिना कोई सर्विस बेचे दिखा रहे हैं कि वो क्या कर रहे हैं. इसकी एक मिसाल है ये ट्वीट: 5 साल पहले, मेरी सालाना सैलरी ₹25 लाख थी. अब मेरा रोज़ का स्टॉप-लॉस ट्रेड ₹25 लाख का है. ये गज़ब है कि कैसे ट्रेडिंग आपकी ज़िंदगी बदल देती है. शायद ये लोग भविष्य के लिए अपनी साख तैयार कर रहे हैं, या शायद सिर्फ़ दिखावा कर रहे हैं जो एक इंसानी स्वभाव है. दोनों ही मामले में ये बेकार की बात है और इससे किसी का भला नहीं होता.

मुझ जैसे इंसान के लिए, और मैं समझता हूं इस कॉलम को पढ़ने वाले ज़्यादातर लोगों के लिए, किसी अंजान एडवाइज़र से इंटरनेट पर ट्रेडिंग के टिप लेना एक अजीब बात होगी. इस लेख में मैंने ट्रेडर शब्द का इस्तेमाल बड़ी सोच समझ कर किया है क्योंकि एक निवेशक ये काम नहीं करेगा, और ट्रेडर और निवेशक के बीच का फ़र्क़ समझने का ये अच्छा तरीक़ा है.

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