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45 की उम्र में रिटायरमेंट

आप अगर 30-32 साल के हैं और 45 की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं, तो ये प्लान आपके बड़े काम का है.

आप अगर 30-32 साल के हैं और 45 की उम्र तक रिटायर होना चाहते हैं, तो ये प्लान आपके बड़े काम का है.

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गोकुल 32 साल के हैं और एक बड़ी IT फ़र्म में प्रोजेक्ट मैनेजर हैं. उन्होंने 45 साल की उम्र में रिटायर होने का लक्ष्य तय किया है. वो अपने कॉर्पोरेट करियर से आगे की बात सोच रहे हैं और अपना ब्लॉग शुरू करना चाहते हैं.

उनके प्लान के केंद्र में उनकी पत्नी और पांच साल का बेटा है. पत्नी घर संभालती हैं. परिवार में, गोकुल अकेले कमाने वाले हैं और उनकी मंथली सैलरी ₹1.2 लाख है, जिसमें से क़रीब ₹80,000 ख़र्च हो जाते हैं और बाक़ी बचा पैसा उनके ऊपरी ख़र्च के लिए काफ़ी है. लेकिन क्या आर्थिक तौर पर वो समय से पहले रिटायर होने के लिए तैयार हैं? आइए देखते हैं.

बेटे की हायर एजुकेशन
माता-पिता अपने बच्चों को अपनी हैसियत के हिसाब से सबसे अच्छी एजुकेशन देना चाहते हैं. गोकुल की स्थिति भी कुछ अलग नहीं है. वो अपने बेटे की हाइयर एजुकेशन के लिए ₹15 लाख एलोकेट करना चाहते हैं. हालांकि, भारत में 6 फ़ीसदी की औसत महंगाई दर को देखें, तो अगले 13 साल में, ₹15 लाख के कोर्स का ख़र्च क़रीब ₹32 लाख हो जाएगा.

खुशक़िस्मती से गोकुल के पास इस ख़र्च को कवर करने के लिए दूसरे साधन भी हैं. उसके पास कुछ टैक्स सेविंग म्यूचुअल फ़ंड स्कीम्स में ₹7.5 लाख जमा हैं. अगर निवेश में हर साल 12 फ़ीसदी की बढ़ोतरी मान लें, तो ये रक़म उनके बेटे के स्कूल जाने तक ज़रूरत के मुताबिक़ बढ़ जाएगी.

कितना रिटायरमेंट कॉर्पस चाहिए
गोकुल का हर महीने का ख़र्च ₹80,000 है, और वो 45 साल की उम्र में रिटायर होना चाहता है, इसलिए उसे ₹5 करोड़ से कुछ ज़्यादा की जरूरत होगी. हमने तीन धारणाओं के आधार पर ये आंकड़ा निकाला है:

  • वो और उनकी पत्नी 85 की उम्र तक जीवित रहेंगे.
  • उनके रिटायरमेंट के बाद के साल में औसत महंगाई दर 6 फ़ीसदी रहेगा.
  • वो इस बात को पक्का करेंगे कि उनका पैसा (क़रीब ₹5 करोड़) रिटायरमेंट के दौरान 9 फ़ीसदी की दर से बढ़े.
25 साल उम्र 30 साल उम्र 35 साल उम्र
आज का मंथली ख़र्च ₹50,000 -₹75,000 - ₹1 लाख ₹50,000 -₹75,000 - ₹1 लाख ₹50,000 -₹75,000 - ₹1 लाख
45 की उम्र में रिटायरमेंट पर कितने पैसे की ज़रूरत होगी ₹ 4.7 करोड़ -₹7.05 करोड़ -₹ 9.4 करोड़ ₹3.51 करोड़-₹5.27 करोड़- ₹7.03 करोड़ ₹2.63 करोड़-₹3.94 करोड़- ₹5.25 करोड़
आपकी SIP कितने पैसे की होनी चाहिए ₹27,000 -₹40,000 - ₹54,000 ₹45,000 -₹68,000 - ₹90,000 ₹85,000 -₹1.28 lakh - ₹1.71 lakh
नोटः मान लिया गया है कि हर साल SIP कॉन्ट्रीब्यूशन 10% बढ़ाया गया; महंगाई सालाना 6% रही; रिटर्नः 12%; लाइफ़ एक्सेपेंटेसीः 85 साल; रिटायरमेंट के बाद रिटर्नः 9%

रिटायरमेंट के लिए अगले 13 साल में ₹5 करोड़ की रक़म जमा करना ख़ासा चुनौतीपूर्ण है, लेकिन हमने इस पर विचार किया है कि क्या इसे हासिल किया जा सकता है. जब हमने गोकुल के मौजूदा निवेशों पर ध्यान दिया, तो हमने पाया कि उसके पास ₹7 लाख का प्रॉविडेंट फ़ंड है, और ₹7,200 का मंथली EPF कॉन्ट्रीब्यूशन है - जिसके बराबर रक़म उसके इम्प्लॉयर द्वारा जमा की जाती है.

ये भी पढ़िए- रिटायरमेंट के बाद का संकट

मान लीजिए कि EPF हर साल 10 फ़ीसदी की दर से बढ़ता है और गोकुल के मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन में 10 फ़ीसदी की बढ़ोतरी होती है, तो वो 45 साल की उम्र तक ₹60 लाख जमा कर लेंगे.

इसके अलावा, उन्हें अपने लिए भी कुछ पैसा बचाना चाहिए. चूंकि, उनकी हर महीने की सेविंग ₹40,000 है, इसलिए उनके लिए दो फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में निवेश करना सही होगा, जो डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी म्यूचुअल फ़ड्स हैं.

इतना ही काफ़ी नहीं. (आखिरकार, जल्द रिटायर होने की महत्वाकांक्षा के साथ एक क़ीमत भी चुकानी होती है) गोकुल को हर साल अपना निवेश 10 फ़ीसदी बढ़ाना होगा. अगर वो सफलतापूर्वक ऐसा कर सके और फ़्लेक्सी-कैप सालाना 12 फ़ीसदी की दर से बढ़े, तो वो ₹2.19 करोड़ का कॉर्पस तैयार कर लेंगे. लेकिन फिर भी ₹5 करोड़ बहुत दूर की बात लगती है.

हमारा सुझाव
अगर गोकुल और उनकी पत्नी हर महीने अपने ख़र्च में सिर्फ़ लगभग ₹10,000 की कमी लाते हैं, तो इससे उन्हें दो मोर्चों पर फ़ायदा होगा:

  • उनका रिटायरमेंट कॉर्पस ₹4.38 करोड़ तक घट जाएगा.
  • वो फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में अतिरिक्त पैसा निवेश करना शुरू कर सकेंगे. इसका मतलब है कि वो हर महीने कुल ₹50,000 का निवेश शुरू कर सकते हैं.

ऐसा करके वो 45 की उम्र में रिटायर हो सकते हैं. अगर EPF और फ़्लेक्सी-कैप के पैसे को जोड़ लें तो गोकुल को अपना रिटायरमेंट का टारगेट हासिल करने में मदद मिलेगी.

ये भी पढ़िए- जल्दी रिटायर होने पर आपके प्रॉविडेंट फ़ंड का क्या होगा?

इक्विटी का जादू
गोकुल को लंबे समय के दौरान वेल्थ पैदा करने वाले फ़्लेक्सी कैप फ़ंड्स में निवेश करना चाहिए. आम धारणा के विपरीत, लंबे समय में इक्विटी का जोख़िम कम हो जाता है. यहां 'लंबा समय' बेहद अहम है.

दूसरी ओर, अगर गोकुल डेट ओरिएंटेड फ़ंड्स में निवेश करते हैं, तो अपने रिटायरमेंट के टारगेट को हासिल करना असंभव नहीं, तो मुश्किल ज़रूर होगा.

अंत में ज़रूरी बात
एक बार, गोकुल के रिटायर होने के बाद ये अहम होगा कि वो फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में से कुछ पैसा ज़्यादा कंजरवेटिव डेट ओरिएंटेड फ़ंड में ट्रांसफ़र करें. दरअसल, रिटायरमेंट के दौरान, कैपिटल की सुरक्षा सबसे ज़्यादा अहम है.

साथ ही, उन्हें डेट ओरिएंटेड फ़ंड्स में ज़्यादा निवेश नहीं करना चाहिए. उन्हें अभी भी अपना 35-50 फ़ीसदी पैसा इक्विटी फ़ंड में रखना होगा. इस समय भी फ़्लेक्सी-कैप एक अच्छा विकल्प बना हुआ है. इससे ये सुनिश्चित होगा कि उनके जीवनकाल के दौरान उनके रिटायरमेंट का फ़ंड समाप्त नहीं होगा.

अंतिम लेकिन अहम बात, गोकुल को अपने विदड्राल रेट पर नज़र रखनी चाहिए. हर साल होने वाले विदड्राल को रिटायरमेंट कॉर्पस के 4-6 फ़ीसदी तक सीमित करने से भविष्य का जोख़िम खत्म हो जाएगा.

ध्यान रखने की बात

  • गोकुल के पास लाइफ़ इंश्योरेंस और मेडिकल इंश्योरेंस होना चाहिए. गंभीर बीमारी से सबंधित राइडर्स पर विचार करना चाहिए.
  • उनके पास एक इमरजेंसी फ़ंड होना चाहिए, जो छह महीने के ख़र्चों को कवर करता हो. इसके लिए, उन्हें लिक्विड फ़ंड और एक स्वीप-इन डिपॉजिट के कॉम्बिनेशन को इस्तेमाल करना चाहिए.

ये भी पढ़िए- रिटायरमेंट के बाद PF पर मिलेगा ब्याज?

ये लेख पहली बार अगस्त 29, 2023 को पब्लिश हुआ.

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