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सारांशः समझ नहीं आ रहा कि एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड में निवेश करें या इंडेक्स फ़ंड का रास्ता चुनें? हमने लंबे समय में एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स के रिटर्न को परखा और यह जानने की कोशिश की कि निवेशकों के लिए कौन-सा विकल्प बेहतर हो सकता है.
क्या मुझे 10-15 साल के लिए लार्ज-कैप फ़ंड में निवेश करना चाहिए या इंडेक्स फ़ंड में? -
अनुज चौधरी
अगर आपने कभी अपने पोर्टफ़ोलियो के लिए लार्ज-कैप फ़ंड चुनने की कोशिश की है, तो शायद आपके मन में भी यह सवाल आया होगा. क्या ऐसा एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड चुनें, जिसमें फ़ंड मैनेजर बाज़ार से ज़्यादा रिटर्न कमाने की कोशिश करे? या फिर किसी लार्ज-कैप इंडेक्स फ़ंड में निवेश कर दें और बाज़ार जितना रिटर्न दे, उतना ही पा लें? यह सवाल बिल्कुल जायज़ है और इसका जवाब उतना साफ़ नहीं है, जितना पहली नज़र में लग सकता है.
एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स का पुराना रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा
लंबे समय के रिटर्न देखें, ज़्यादातर एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स लगातार 'अल्फ़ा' जेनरेट करने या मार्केट से बेहतर प्रदर्शन करने में संघर्ष करते रहे हैं.
पहले आंकड़ों को देखते हैं. रेगुलर प्लान वाले एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स की कैटेगरी ने पिछले 10 साल में सालाना 11.58 प्रतिशत रिटर्न दिया. वहीं, इसके बेंचमार्क BSE 100 TRI का रिटर्न 12.68 प्रतिशत रहा. पांच साल में भी तस्वीर लगभग ऐसी ही रही. इस दौरान लार्ज-कैप फ़ंड कैटेगरी ने सालाना 10.24 प्रतिशत रिटर्न दिया, जबकि बेंचमार्क ने 10.82 प्रतिशत रिटर्न दिया.
तस्वीर को और साफ़ समझने के लिए हमने अलग-अलग समय में इन फ़ंड्स के रोलिंग रिटर्न भी देखे. रोलिंग रिटर्न से यह समझने में मदद मिलती है कि किसी तय अवधि में फ़ंड ने बार-बार कैसा प्रदर्शन किया. पांच साल के रोज़ाना रोलिंग रिटर्न में हमने 28 एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स को देखा. इनमें से ठीक आधे यानी 14 फ़ंड अपने बेंचमार्क BSE 100 TRI से आगे रहे, जबकि बाक़ी 14 पीछे रह गए. आसान शब्दों में कहें, तो सही फ़ंड चुनने का नतीजा लगभग 50-50 रहा.
जब समय बढ़ाकर 10 साल किया गया, तो एक्टिव फ़ंड्स का प्रदर्शन और कमज़ोर दिखा. इस दौरान 23 लार्ज-कैप फ़ंड्स में से सिर्फ़ 10 फ़ंड इंडेक्स से ज़्यादा रिटर्न दे पाए. यानी केवल क़रीब 43 प्रतिशत फ़ंड ही बेंचमार्क को पीछे छोड़ सके. दूसरे शब्दों में कहें, तो 10 साल से मौजूद आधे से ज़्यादा फ़ंड उस ज़्यादा फ़ीस और मेहनत को सही नहीं ठहरा पाए, जो एक्टिव मैनेजमेंट के साथ आती है.
दिलचस्प बात यह है कि 15 साल की अवधि में तस्वीर थोड़ी बेहतर हुई. इस दौरान 22 लार्ज-कैप फ़ंड्स में से 12 फ़ंड BSE 100 TRI से आगे रहे. यानी क़रीब 55 प्रतिशत फ़ंड्स ने इंडेक्स से ज़्यादा रिटर्न दिया. इससे लगता है कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखने से कुछ मदद मिल सकती है. लेकिन यहां भी लगभग आधे फ़ंड अपने बेंचमार्क से पीछे ही रह गए.
इन सभी आंकड़ों को एक साथ देखें, तो एक बात साफ़ है. लार्ज-कैप कैटेगरी में लगातार बेंचमार्क से ज़्यादा रिटर्न देना मुश्किल है. चाहे पांच साल देखें, 10 साल या 15 साल, एक्टिव फ़ंड्स के बेहतर निकलने की संभावना बहुत ज़्यादा नहीं दिखती.
एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स के लिए बेहतर रिटर्न देना मुश्किल क्यों है?
इसकी वजह सिर्फ़ ख़राब फ़ंड मैनेजमेंट नहीं है. असली वजह इस कैटेगरी के नियम हैं. लार्ज-कैप फ़ंड्स को अपनी कम से कम 80 प्रतिशत रक़म मार्केट कैप के हिसाब से देश की 100 सबसे बड़ी कंपनियों में लगानी होती है. यानी फ़ंड मैनेजर के पास निवेश के लिए चुनने को बहुत ज़्यादा कंपनियां नहीं होतीं.
ये देश की सबसे बड़ी कंपनियां हैं. इन पर पहले से ही बहुत रिसर्च होती है और बड़ी संख्या में निवेशक इनके शेयर रखते हैं. हर बड़ी ब्रोकरेज, हर संस्थागत निवेशक और लगभग हर एनालिस्ट इन कंपनियों पर नज़र रखता है. इसलिए फ़ंड मैनेजर के लिए ऐसी कोई नई जानकारी खोजना बहुत मुश्किल होता है, जो बाक़ी बाज़ार को न पता हो. जो आसान मौक़े होते हैं, वे आम तौर पर पहले ही सबकी नज़र में आ चुके होते हैं.
इसके अलावा, बड़ी कंपनियों के लिए अपने भारी आकार की वजह से बहुत तेज़ी से बढ़ना भी आसान नहीं होता. कुछ लाख करोड़ रुपये के मार्केट कैप वाली कंपनी अपने कारोबार को उतनी आसानी से दोगुना नहीं कर सकती, जितना कोई स्मॉल या मिड-कैप कंपनी कर सकती है. इसका मतलब यह नहीं है कि इन कंपनियों के कारोबार अच्छे नहीं हैं. इनमें से कई बेहतरीन कंपनियां हैं. लेकिन कंपनी का आकार जितना बड़ा होता जाता है, उसी रफ़्तार से आगे बढ़ना उतना ही मुश्किल होता जाता है. और जब फ़ंड मैनेजर के पास चुनने के लिए ऐसी ही बड़ी कंपनियों का सीमित समूह हो, तो उसके लिए बेंचमार्क से बहुत अलग और बेहतर रिटर्न देना भी मुश्किल हो जाता है.
तो आपका पैसा कहां लगना चाहिए?
इन बातों को देखते हुए, पोर्टफ़ोलियो के लार्ज-कैप हिस्से के लिए इंडेक्स फ़ंड ज़्यादा समझदारी वाला विकल्प लगता है. यह अपने बेंचमार्क के रिटर्न के साथ चलता है, इसलिए आपको मोटे तौर पर पता रहता है कि आपको किस तरह का रिटर्न मिल सकता है. उतनी ही अहम बात यह है कि इसकी लागत एक्टिव फ़ंड के मुक़ाबले बहुत कम होती है.
दूसरी तरफ़, एक्टिव लार्ज-कैप फ़ंड्स का एक्सपेंस रेशियो ज़्यादा होता है. लेकिन आंकड़े बताते हैं कि ज़्यादा फ़ीस लेने के बाद भी बड़ी संख्या में ये फ़ंड इंडेक्स से बेहतर रिटर्न नहीं दे पाए. जब आप ज़्यादा फ़ीस चुका रहे हों और उसके बाद भी बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना कम हो, तो इस कैटेगरी में एक्टिव फ़ंड चुनने की वजह बहुत मज़बूत नहीं रह जाती.
क्या आपके पोर्टफ़ोलियो में लार्ज-कैप फ़ंड की ज़रूरत भी है?
इंडेक्स फ़ंड या एक्टिव फ़ंड में से किसी एक को चुनने से पहले थोड़ा रुककर यह सवाल भी पूछना चाहिए कि क्या आपके पोर्टफ़ोलियो में अलग से लार्ज-कैप फ़ंड होना ज़रूरी है. इसका जवाब आपके निवेश के लक्ष्य, निवेश की अवधि और पोर्टफ़ोलियो में पहले से मौजूद दूसरे फ़ंड्स पर निर्भर करेगा.
अगर आप अपनी ज़रूरत के हिसाब से सलाह चाहते हैं, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र को सब्सक्राइब करें. इससे आप जान सकते हैं कि आपके निवेश में लार्ज-कैप फ़ंड के लिए जगह बनती है या नहीं और अगर बनती है, तो कौन-सा फ़ंड आपके लिए सही हो सकता है.
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ये लेख पहली बार जुलाई 28, 2026 को पब्लिश हुआ.





