मैनेजर स्पीक

'हमारा पोर्टफ़ोलियो लगातार प्रदर्शन करने वाला होगा, जिसमें 15% उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा'

मिराए के फ़ंड मैनेजर और इक्विटी रिसर्च प्रमुख हर्षद बोरावाके के साथ स्टॉक सलेक्शन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बातचीत.

मिराए के फ़ंड मैनेजर और इक्विटी रिसर्च प्रमुख हर्षद बोरावाके के साथ स्टॉक सलेक्शन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर बातचीत.

हर्षद बोरावाके, जो मिराए एसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर (इंडिया) के फ़ंड मैनेजर और इक्विटी प्रमुख हैं. वो फ़ंड हाउस के साथ 2016 से बने हुए हैं. क़रीब दो दशकों के अनुभव के साथ बोरावाके, मिराए एसेट हाइब्रिड इक्विटी फ़ंड और साथ ही AMC के बैलेंस्ड अडवांटेज और इक्विटी सेविंग्स को भी देखते हैं. हाल ही में उन्होंने हमसे कई अहम विषयों पर बात की. उन्होंने मार्केट के बारे में, मिराए के निवेश और उनकी अगुआई वाले हाइब्रिड फ़ंड (मिराए एसेट हाइब्रिड इक्विटी फ़ंड) के प्रदर्शन में आई गिरावट आदि पर अपने विचार साझा किए. यहां उनके साथ बातचीत के कुछ अंश दिए जा रहे हैं. विकसित अर्थव्यवस्थाएं या तो मंदी में हैं या उनके मंदी की चपेट में आने की आशंका है. हम ये भी देख रहे हैं कि हाल के दौर में जिओ-पॉलिटिकल संघर्ष बार-बार होने लगे हैं. क्या आप इसे भारतीय अर्थव्यवस्था और बाज़ार के लिए एक मौक़े या फिर एक चिंता के तौर पर देखते हैं? वैश्विक संदर्भ काफ़ी हद तक मुद्रास्फ़िति से प्रेरित है, जो बदले में सप्लाई चेन के मुद्दों, महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से उभर रहे हैं. मुद्रास्फ़ीति पर अंकुश लगाने के लिए, वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दर में जबरन बदलाव किया. इसलिए, 10-11 साल की अवधि में (वैश्विक वित्तीय संकट से 2020-21 तक), हमने ब्याज दरों में बड़े पैमाने पर गिरावट देखी है, जो पिछले डेढ़ से दो साल में ही उलट गई है. ब्याज दरों में इस तेज़ उलटफेर की पृष्ठभूमि में, अपेक्षित मंदी/मंदी एक मजबूरी है. अगर आप ध्यान दें, तो ऐसा नहीं है कि अंतर्निहित आर्थिक गतिविधि मंदी का संकेत दे रही है, ये हेडलाइन के स्तर पर ज़्यादा है कि हम GDP नंबर नेगेटिव होने जैसी बातें सुन रहे हैं. अब, महामारी के असर की बात को लेकर वैश्विक अर्थव्यवस्था के संदर्भ में भारत का संदर्भ थोड़ा अलग है. सरकार की ओर से दी गई आर्थिक मदद के कारण विकसित देशों की एक बड़ी आबादी पर उतना ज़्यादा असर नहीं पड़ा. हालांकि, भारत में आर्थिक प्रभाव कुछ ज़्यादा था, मुख्य रूप से सर्विस सेक्टर पर. और हम देख सकते हैं कि ये सेक्टर वापसी करने वाला आखिरी सेक्टर था. हम अभी भी सामान्य होने की प्रक्रिया में हैं, कुछ सेक्टरों में आर्थिक गतिविधियां महामारी से पहले वाले स्तर पर वापस आना बाक़ी हैं. इसलिए, भारत के लिए, ये कहानी नॉर

ये लेख पहली बार अक्तूबर 31, 2023 को पब्लिश हुआ.

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