फ़र्स्ट पेज

निवेशक का असली काम

क्या आप निवेश के ग़लत लक्ष्य पर फ़ोकस कर रहे हैं?

क्या आप निवेश के ग़लत लक्ष्य पर फ़ोकस कर रहे हैं?
Anand Kumar

back back back
6:27

यहां एक बयान है जो कई निवेशकों को उकसाने वाला लगेगा: पैसा कमाना एक निवेश प्रबंधक का असली काम नहीं है. पैसा कोई भी कमा सकता है क्योंकि, ज़्यादातर समय, बाज़ार ऊपर ही जाते हैं. निवेशकों और निवेश प्रबंधकों का असली काम है रिस्क कंट्रोल करना.

हॉवर्ड मार्क्स ने कुछ साल पहले एक सम्मेलन में यही बात कही था. मार्क्स, जिनका ज़िक्र मैने इस कॉलम में पहले भी किया है, एक सफल फ़ंड मैनेजर और निवेश पर लिखने वाले सम्मानित लेखक हैं. बड़े पैमाने पर पढ़े जाने वाले उनके मेमो इतने बेशक़ीमती समझे जाते हैं कि वॉरेन बफ़े ने भी कहा है कि वो उन्हें पढ़ना ज़रूरी समझते हैं. संयोग से, उसी भाषण में, मार्क्स ने ये भी कहा था कि "हमारा बिज़नस ऐसे लोगों से भरा है जो लगातार सही होकर प्रसिद्ध हुए," लेकिन मैं इसके विषय में फिर कभी लिखूंगा.

इसके अलावा, जो बात निवेश प्रबंधकों के लिए सच है, वो एक आम निवेशक के लिए भी उतनी ही सच होती है. भारत में सभी इक्विटी-आधारित निवेशों की मौजूदा स्थिति इसका एक आदर्श उदाहरण है. मोटे तौर पर अप्रैल 2020 के बाद से लगभग सभी ने और हर चीज़ ने पैसा कमाया है. यहां-वहां कुछ छोटी-मोटी रुकावटें ज़रूर आई हैं, लेकिन कुल मिलाकर, कई साल से, हम ऐसी स्थिति में हैं जहां पैसा कमाना इतना मुश्किल नहीं रह गया है. अब हम बहस कर सकते हैं कि ये कब तक जारी रहेगा वगैरह, वगैरह. लेकिन जैसा कि मार्क्स ने बताया, सभी बाज़ारों में एक सायकल (चक्रीयता) होता है जिससे इनकार नहीं किया जा सकता.

मार्क्स की समझ, निवेश के एक अहम पहलू पर रोशनी डालती है जो अक्सर तुरंत फ़ायदा पाने के आकर्षण से ढका होता है और ये है - रिस्क मैनेजमेंट का महत्व. ये सिद्धांत न केवल किसी अनुभवी निवेश प्रबंधक के लिए बल्कि इक्विटी-आधारित निवेश के जटिल परिदृश्य को समझने वाले एक आम निवेशक के लिए भी सच है. मार्केट वैल्यू में उछाल रोमांचक होता है, लेकिन ये उसकी अस्थिरता और फ़ाइनेंशियल मार्केट की विशेषता वाली मंदी, जो आती ही है, उसको नज़रों से छिपा देता है. इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता कि अर्थव्यवस्था और व्यवसाय, आने वाले सालों में कितना अच्छा प्रदर्शन करते हैं - या नहीं करते हैं, मगर ये पक्का है कि इक्विटी में गंभीर गिरावट का दौर आएगा ही आएगा. इसलिए, उस रिस्क को समझना और कम करना, कोई विकल्प की बात नहीं है - ये एक ज़रूरत है. इन शब्दों को पहचानें; 'पक्का' और 'ज़रूरत'. मैं इनका इस्तेमाल यूं ही नहीं कर रहा हूं.

ये इस बात को दिखाता करता है कि निवेश में सफलता केवल विजेताओं को चुनने की बात नहीं है, बल्कि पूंजी को संरक्षित करने के बारे में है.मार्क्स की फ़िलॉसफ़ी एक आसान गाइड की तरह काम करती है कि बाज़ार बढ़ सकते हैं और गिर सकते हैं, मगर रिस्क मैनेजमेंट एक सफल निवेश की आधारशिला है, जो हमेशा क़ायम रहती है.ये समझ, आज के माहौल में ख़ासतौर पर प्रासंगिक है, जहां अतीत के मुनाफ़े का उत्साह आसानी से सबसे चालाक निवेशक के फ़ैसलों को भी धूल में मिला सकता है.अजीब बात ये है कि ये उत्साह लगभग हर किसी में होता है, भले ही वो इस सायकल से कितनी बार गुज़रे हों.इसका एकमात्र इलाज इसके बारे में जानना और सजग रह कर इससे बचाव करना है. जब ये सायकल ऊपर की ओर बढ़ रहा हो, तो ये सोचना एक आम भ्रम है कि ये उलटा नहीं होगा.हालांकि, जो लोग जानते हैं कि ये उलट जाएगा, वो लोग कभी-कभी इससे भी बड़ी भ्रांति का सामना करते हैं, और वो ये कि ऐसी भविष्यवाणी करना संभव है कि कब और कैसे ये उलटफेर होगा.मार्क्स 19वीं सदी के अमेरिकी हास्यकार, मार्क ट्वेन की बात कहते हैं, "ऐसा नहीं है कि आप जिसे नहीं जानते हैं, वो आपको परेशानी में डालता है. परेशानी में डालने वाली वो चीज़ होती है जिसे आप निश्चित तौर पर जानते हैं कि वो ऐसी नहीं है."

ये भविष्यवाणियों का व्यवसाय ही लोगों को परेशानी में डालता है. बाज़ारों की अनिश्चितता ही है जो हॉवर्ड मार्क्स की सलाह को इतना महत्वपूर्ण बनाती है. हाई रिटर्न के वादे से आकर्षित निवेशक, अक्सर सूक्ष्म स्तर पर बुनियादी सिद्धांतों को नज़रअंदाज़ कर देते हैं कि बाज़ार में एक ही चीज़ स्थिर और सतत है, और वो है इसका अंतर्निहित रूप से अप्रत्याशित होना. हालांकि, ये बात बेहद आक्रामक रणनीतियों को जन्म दे सकती है, जहां पैसे की सुरक्षा और रिस्क को कम करने के बजाय मुनाफ़े की संभावना पर ज़्यादा ध्यान केंद्रित किया जाता है.

रिस्क मैनेजमेंट पर ज़ोर होना, निवेशकों को ज़्यादा अनुशासित और सतर्क नज़रिया अपनाने पर मजबूर करेगा, ये पहचानते हुए कि रिस्क को असरदार ढंग से मैनेज करने की क्षमता ही सफल निवेशकों को दूसरों से अलग करती है. इसके अलावा, ये समझ इस विचार के लिए एक और चुनौती है कि बाज़ार के बेहतर प्रदर्शन का कोई समय तय कर लेना, एक व्यावाहारिक रणनीति है.बाज़ार कब और क्या करेगा इसके निश्चित होने की भ्रांति, निवेशकों को ख़तरे की ओर ले जाती है.इसके बजाय, रिस्क मैनेजमेंट, डावर्सिफ़िकेशन और लंबे समय पर आधारित रणनीति से ज़्यादा अमीर बनने की संभावना भी ज़्यादा होती है.

ये भी पढ़िए: शिकार मत बनिए

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

31 जुलाई की ITR डेडलाइन मिस करने से क्या-क्या नुक़सान हो सकते हैं?

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

Manipal Hospitals IPO: साइज़ में सबसे बड़ी, पर रिटर्न में पीछे

पढ़ने का समय 9 मिनटLekisha Katyal

HUL एक बेहतरीन बिज़नेस तो है, लेकिन क्या यह एक बेहतरीन स्टॉक भी है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

अपने गोल्स को ख़ुद से बचाइए

पढ़ने का समय 4 मिनटधीरेंद्र कुमार

HDFC Bank vs ICICI Bank: 10 साल में कैसे बदली लीडरशिप?

पढ़ने का समय 4 मिनटअभिनव गोयल

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

ज़्यादातर दिखावा, कभी-कभार टैक्स

नए टैक्स रिज़ीम ने मार्च में टैक्स बचाने की पुरानी भागदौड़ ख़त्म कर दी; लेकिन इसके पीछे की सोच बस अब ज़्यादा वेल्थ वाले लोगों के बीच पहुंच गई है

अन्य एपिसोड

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी