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म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री के अंतर्राष्ट्रीय फ़ंड्स में निवेश पर हमारी राय बदली है, जानिए क्यों

म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री के अंतर्राष्ट्रीय फ़ंड्स में निवेश पर हमारी राय बदली है, जानिए क्यों

इंटरनेशनल म्यूचुअल फ़ंड थम गए हैं. हालांकि इस कैटेगरी में मुश्किलों को शुरू हुए दो साल से ज़्यादा हो गए हैं, लेकिन फ़ॉरेन ETF में इन्वेस्ट करने वाले फ़ंड्स पर सेबी (SEBI) की ताज़ा रोक ने ताबूत में आख़िरी कील का काम किया है, जो हमें सभी इंटरनेशनल फ़ंड्स को 'बेस्ट बाय' (best buy) और 'बाय' (buy) से निकाल कर 'होल्ड' (hold) में डालने के लिए मजबूर कर रहा है. माजरा क्या है? आप में से ज़्यादातर लोग जानते होंगे, भारतीय म्यूचुअल फ़ंड्स द्वारा पैसा विदेश भेजने पर (foreign remittance) पर एक रेगुलेटरी सीमा लागू है. आइए जनवरी 2022 की स्थिति पर नज़र डालते हैं. पहली बार म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री ने ओवरसीज़ सिक्योरिटी (ETF को छोड़कर) में इन्वेस्टमेंट के लिए 7 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लिमिट को पूरा कर दिया था. जिसका नतीजा ये हुआ कि कई फ़ंड्स को नियमों का पालन करने के लिए नए निवेशों को रोकना पड़ा. हालांकि, जून 2022 में ग्लोबल मार्केट में एक बड़ी गिरावट दिखी, जिसके कारण इंटरनेशन फ़ंड्स से बड़े पैमाने पर धन निकाला गया. इससे विदेशों में निवेश करने के लिए भारतीय इन्टरनेशनल फ़ंड्स के लिए निवेश स्वीकार करने की एक अस्थायी गुंजाइश बन गई. तब से, कई फ़ंड्स अपने सब्सक्रिप्शन स्टेटस के साथ चूहे-बिल्ली का खेल, खेल रहे हैं. हालांकि, विदेशी ETF में निवेश करने वाले फ़ंड्स की उपलब्ध छूट (जो US$1 बिलियन की एक अलग सीमा के अधीन है) ने ये पक्का किया कि निवेशकों के पास अभी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डाइवर्सिटी लाने का एक विकल्प और रास्ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए, हमने आपको अमल किए जाने लायक़ निवेश के विकल्प देने के लिए इस कैटेगरी की अपनी रेकमेंडेशन लिस्ट में पिछले कुछ समय में बदलाव किए हैं. हालांकि, अब, US$1 बिलियन की यह सीमा भी ख़त्म हो गई है. सेबी ने अंतर्राष्ट्रीय ETF में निवेश करने वाले फ़ंड्स से 01 अप्रैल, 2024 से नया निवेश नहीं लेने के लिए कहा है. यह पूछे जाने पर कि क्या ओवरसीज इन्वेस्टमेंट की लिमिट बढ़ाई जाएगी, RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने हाल ही में मीडिया से बात करते हुए में कहा था: "यह रिक्वेस्ट समय-समय पर म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री से हमारे पास आती रही है. हम उनकी रिक्वेस्ट के आधार पर सवाल नहीं उठाते. यह हमारे लिए ऐसा करने के सही समय का सवाल है. हम अभी रुपये के एक्सचेंज रेट को लेकर दबाव (stress) से बाहर आए हैं. हमने बड़े पैमाने पर धन बाहर जाते देखा है. अब चीज़ें संभली हुई हैं, और रुपया स्थिर बना हुआ है. बेशक़, कुछ ल

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