बड़े सवाल

क्या चीन में निवेश का ये सही समय है?

हम इस बात की जांच करते हैं कि क्या ये कॉन्ट्रेरियल व्यू या उलटा नज़रिया इस लायक़ है

हम इस बात की जांच करते हैं कि क्या ये कॉन्ट्रेरियल व्यू या उलटा नज़रिया इस लायक़ हैAI-generated image

मोटे तौर पर नंबर दिखाते हैं कि चीन में सब कुछ अच्छा चल रहा है. ये दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनी हुई है; इसकी GDP ने 2024 की पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर बढ़ोतरी दर्ज की; गोल्डमैन सैक्स के मुताबिक़, इसकी कंपनियों की कमाई - ख़ासतौर से इंडस्ट्रियल, यूटिलिटी और IT में - एक बार फिर बढ़ने की उम्मीद है; और इकोनॉमिक टाइम्स के मुताबिक़, पश्चिम की चीन + 1 नीति के बावजूद मैन्यूफ़ैक्चरिंग में इसकी वैश्विक हिस्सेदारी 2020 (क़रीब 35 फ़ीसदी) के मुक़ाबले में ज़्यादा (38 फ़ीसदी) हो सकती है.

हालांकि, बारीक़ी से पड़ताल करने पर आपको इस देश की कुछ सच्चाइयां पता चलेंगी. इसका रियल एस्टेट, जो इसकी आर्थिक गतिविधि का क़रीब 20 फ़ीसदी है, अभी भी मंदी में है; महामारी के बाद इसकी उछाल निराशाजनक रहा है; उपभोक्ता विश्वास(consumer confidence) और बेरोज़गारी कई दशकों के निचले स्तर पर है. पश्चिम और ताइवान के साथ इसके संबंध भी ख़राब हो गए हैं. आश्चर्य की बात नहीं है कि अप्रैल 2024 में विदेशी कैपिटल का आउट-फ़्लो 2016 के बाद सबसे ज़्यादा था.

मौजूदा बदलावों को देखते हुए, हाल के सालों में चीनी इक्विटी मार्केट में सुस्ती आई है. और इसी तरह चीनी इक्विटी मार्केट में निवेश करने वाले भारतीय फ़ंड भी सुस्त पड़े हैं. हाल में, क़रीब 15 चीन-केंद्रित फ़ंड, भारतीय निवेशकों के ₹3,400 करोड़ पूंजी की देखरेख करते हैं, जिसमें एडलवाइस ग्रेटर चाइना इक्विटी ऑफ़-शोर फ़ंड और निप्पॉन इंडिया ETF हैंग सेंग BSE कुल एसेट के 50 फ़ीसदी से ज़्यादा का मैनेज करते हैं. यहां हम बता रहे हैं कि भारत के इक्विटी मार्केट के मुक़ाबले में इन चीन-केंद्रित फ़ंड्स ने कैसा प्रदर्शन किया है.

  • भारतीय बाज़ार (S&P BSE 500 TRI) ने 2021 से चीन केंद्रित फ़ंड्स से बेहतर परफ़ॉर्म किया है. 11 जुलाई, 2024 तक BSE 500 TRI का पांच साल का CAGR 21 फ़ीसदी है, जबकि एडलवाइस के लिए ये 7 फ़ीसदी और निप्पॉन के लिए -2.7 फ़ीसदी है.
  • एडलवाइस ग्रेटर चाइना इक्विटी ऑफ-शोर ने 2019 और 2020 में बेहतर परफ़ॉर्म किया, लेकिन तब से ये BSE 500 TRI से काफ़ी पीछे है. निप्पॉन इंडिया ETF हैंग सेंग BSE का परफ़ॉर्मेंस भी कुछ ऐसा ही है, जो मोटे तौर पर भारत के बड़े इक्विटी इंडेक्स से कमतर परफ़ॉर्म कर रहा है.

चीन पर नज़र रखने वाले फ़ंड वैश्विक स्तर पर भी पिछड़ गए हैं. चीन पर केंद्रित दो सबसे पसंदीदा फ़ंड, MSCI वर्ल्ड इंडेक्स से काफ़ी पीछे हैं.

जिन्हें नहीं पता, उन्हें बता दें कि MSCI या मॉर्गन स्टेनली कैपिटल इंटरनेशनल एक बेंचमार्क है जो विकसित दुनिया में इक्विटी मार्केट का परफ़ॉर्मेंस ट्रैक करता है.

हमारी राय

हालांकि चीनी स्टॉक हाल में काफ़ी छूट पर उपलब्ध हैं, लेकिन उनमें निवेश करना ड्रैगन की सवारी करने जैसा है. वे रोमांचक हैं लेकिन अस्थिर रिटर्न की वजह से जोख़िम भरे हैं.

जहां ज्योग्राफ़िकल डाइवर्सिफ़िकेशन निवेशकों के लिए अच्छी चीज़ है, वहीं चीन के ख़ासतौर पर बनाए गए (country-specific) फ़ंड्स से बचें. इसके बजायअमेरिका जैसे ज़्यादा स्थिर और मैच्योर मार्केट में , डाइवर्सिफ़ाई करने का विकल्प चुनें. हम अंतरराष्ट्रीय निवेश के लिए नैस्डैक-100 की सलाह देते हैं, क्योंकि इसकी कंपनियों की मौजूदगी दुनिया भर में है, जिससे आपके निवेश में डाइवर्सिफ़िेकेशन आता है.

ये लेख पहली बार जुलाई 15, 2024 को पब्लिश हुआ.

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