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सारांशः इस कॉलम की आम सलाह यही होती है कि ख़बरें बंद कर दीजिए. फिर एस्टेरॉयड (उल्कापिंड) से खनन, अंतरिक्ष में बनी चीज़ों और धरती पर भारी उद्योग के ख़त्म होने पर हुई एक बातचीत ने उसी सलाह पर चलना मेरे लिए पहले से कहीं मुश्किल कर दिया.
इस कॉलम के पाठक मेरी आम सलाह अच्छी तरह जानते हैं: ख़बरें बंद कर दीजिए.
मैंने कई बार लिखा है कि दिन भर की हेडलाइन आपके पोर्टफ़ोलियो की दोस्त नहीं होतीं. आज रात आपकी स्क्रीन पर जो बात सबसे ज़रूरी लग रही है, एक साल बाद वो कुछ भी नहीं दिखेगी. और जो निवेशक हर छोटी-बड़ी ख़बर पर रिएक्ट करता रहता है, अक्सर सबसे बुरा हाल उसी का होता है. मैं आज भी इन सब बातों पर वैसे ही क़ायम हूं. इसीलिए यह क़बूल करना थोड़ा अटपटा लग रहा है कि कुछ हफ़्ते पहले मेरे सामने एक ऐसी बात आई, जिसे मैं हमेशा की तरह टाल नहीं पाया. और आज वही आपसे बांटना चाहता हूं, भले ही उसका आपके पैसे से कोई सीधा नाता न हो.
बात शुरू हुई एलन मस्क की कंपनी SpaceX के शेयर बाज़ार में लिस्ट होने से. इस महीने यह ऐसी क़ीमत पर आई कि मस्क काग़ज़ों पर दुनिया के पहले ट्रिलियनेयर बन गए. अख़बार उसी एक नंबर से भरे पड़े हैं. समझदार लोगों ने पूरे दम से यह दलील भी दी है कि कंपनी की असल क़ीमत, बाज़ार जो दे रहा है उससे कहीं कम है. शायद वो सही हों, और वैल्यूएशन पर मेरे पास जोड़ने को कुछ है भी नहीं. पर सच कहूं तो वो सब एक छोटा खेल है. जिस बात ने मुझे सच में रोका, वो कहीं बड़ी थी. और वो फ़ाइनेंस से जुड़े पन्नों से नहीं, बल्कि एक दोस्त के साथ हुई बातचीत से निकली.
मेरा वो दोस्त ता-उम्र साइंस फ़िक्शन का दीवाना रहा है और मस्क का ऐसा खुला प्रशंसक कि जिस उम्र में हम बाक़ी लोग खेल के पन्ने पलट रहे थे, वो रॉबर्ट हाइनलाइन पढ़ रहा था. एक शाम उसने मुझे समझाया कि उसकी नज़र में यह पूरा रास्ता आख़िर में कहां जाकर रुकता है. और उस शाम के बाद से यह बात मेरे ज़हन से निकली ही नहीं.
शुरुआत होती है एस्टेरॉयड की माइनिंग से. और यहीं उसने मुझे एक ऐसी बात बताई, जिसके बारे में मैं तब से सोचता ही रह गया हूं. उसने कहा कि धरती पर भारी धातुओं की हर खान, सोने, निकल और लोहे का हर वो स्रोत जो हमने कभी खोदा, असल में किसी बहुत पुराने एस्टेरॉयड के टकराने की जगह है. उसी का एक छोटा-सा टुकड़ा, सदियों पहले, यहां आकर ज़मीन में दफ़न हो गया था. ये धातुएं कभी शुरू से हमारी थीं ही नहीं. ये तो आसमान से गिरी थीं. और वहां अंतरिक्ष में, जहां से ये आईं, यही चीज़ें इतनी बेहिसाब मात्रा में मौजूद हैं कि धरती की सबसे अमीर खान भी उनके आगे कुछ नहीं ठहरती.
यहां से यह पूरी बात एक-एक करके आगे बढ़ती है. जब आप ऊपर उन चट्टानों से कच्चा माल निकालने ही लगे हैं, तो उसे इतनी दूर से, धरती की गुरुत्वाकर्षण की गहरी खाई में नीचे तक ढोकर लाने का कोई ख़ास तुक नहीं बनता. तो अगला क़दम है, अंतरिक्ष में ही चीज़ें बनाना, जहां सूरज के ज़्यादा क़रीब होने की वजह से ऊर्जा लगभग मुफ़्त है और बेहिसाब भी. और चूंकि हम जो कुछ बनाते हैं, उसका ज़्यादातर हिस्सा तो सिर्फ़ इसलिए बनता है ताकि उससे हम कुछ और बना सकें, इसलिए यह नतीजा टालना मुश्किल हो जाता है: पूरी औद्योगिक कड़ी को ऊपर अंतरिक्ष में ही रहने दो, और सिर्फ़ तैयार चीज़ों को हम तक नीचे आने दो.
पर कहानी का अंत वो हिस्सा है जो सबसे ज़्यादा मेरे मन में बैठ गया. अगर भारी उद्योग धरती के मुक़ाबले धरती के बाहर सस्ते में चलाया जा सके, तो फिर धरती को चीज़ें बनाने की जगह बने रहने की ज़रूरत ही नहीं रहती. यह दोबारा वही जगह बन सकती है जहां हम फ़सलें उगाते हैं और जहां हम सुकून से रहते हैं. खदानें, भट्टियां और धुआं, सब यहां से पूरी तरह हट चुके होंगे और सिर्फ़ तैयार चीज़ें चुपचाप ऊपर से उतरती रहेंगी. मेरे दोस्त का कहना है कि असल में यही वो मंज़िल है, जिसकी तरफ़ यह पूरा सिलसिला बढ़ रहा है.
सच कहूं तो मुझे ख़ुद समझ नहीं आ रहा कि इस बात का करूं क्या. मेरी तो पूरी कामकाजी ज़िंदगी ऐसे बड़े-बड़े सपनों की हवा निकालने में ही बीती है. क्योंकि बचत और निवेश की दुनिया में, एक भव्य सपना अक्सर किसी घटिया प्रोडक्ट की चमकदार पैकिंग भर होता है. और जिस पल कोई चीज़ ज़रूरत से ज़्यादा भव्य लगने लगती है, मैं अपना बटुआ टटोलकर देख लेता हूं कि वो अपनी जगह सलामत तो है. लोग हमें बहुत लंबे समय से भविष्य के सपने दिखाते आए हैं. उड़ने वाली कारें और चांद की छुट्टियां हमेशा एक दशक दूर ही रहीं. और ऐसी किसी भी भविष्यवाणी पर सबसे सुरक्षित दांव यही होता है कि वो या तो बहुत जल्दी है, या बहुत महंगी, या फिर बस ग़लत है. फिर भी, अजीब बात यह रही कि मैं इस एक बातचीत को शोर के खाते में नहीं डाल पाया, जबकि मैं क़रीब-क़रीब हर चीज़ उसी खाते में डाल देता हूं. और यही बात इतनी अलग है कि मुझे लगा, आपसे कहनी चाहिए.
मैं एकदम साफ़ कह दूं कि यह कॉलम इस बारे में नहीं है कि अपने पैसे का क्या करें. मैं आपसे यह बिल्कुल नहीं कह रहा कि आप यह शेयर या कोई और शेयर ख़रीदें. बल्कि मैं तो ऐसे किसी भी शख़्स से सावधान रहने को कहूंगा जो इस तरह का कोई सपना दिखाकर आपको कुछ बेचने की कोशिश करे, क्योंकि सपनों का इस्तेमाल आमतौर पर ठीक इसी काम के लिए होता है. मेरे लिखने की वजह कुछ और ही है. कभी-कभी अपने पोर्टफ़ोलियो को थोड़ी देर एक तरफ़ रखकर यह याद कर लेना अच्छा होता है कि जो कुछ आने वाला है, उसके आगे यह कितनी छोटी-सी बात है. हम नए टैक्स रिज़ीम पर और इस पर बहस करते हैं कि पोर्टफ़ोलियो में कितने म्यूचुअल फ़ंड होने चाहिए. और यह ठीक भी है, क्योंकि यही चीज़ें हमारे अगले कुछ साल तय करती हैं. लेकिन अगर मेरे दोस्त की बताई बातों का एक छोटा-सा हिस्सा भी सच निकला, तो हम एक ऐसे बदलाव की तरफ़ बढ़ रहे हैं जो औद्योगिक क्रांति से भी बड़ा होगा, उसी क्रांति ने वो सब कुछ बदल डाला था जिसे हमारे पर-परदादा हमेशा के लिए पक्का मान बैठे थे.
हममें से कोई भी इतनी दूर तक नहीं देख सकता. और आज जो लोग इस शेयर की क़ीमत तय कर रहे हैं, वो भी नहीं देख सकते, उनके मॉडल चाहे जो भी कहें. इतने बड़े भविष्य के सामने खड़े होकर ईमानदार रवैया आत्मविश्वास नहीं, बल्कि एक तरह की ख़ुशमिज़ाज विनम्रता है. तो इस एक बार, मेरी सलाह का आपकी बचत से कोई नाता नहीं. ख़बरों को नज़रअंदाज़ करते रहिए, क्योंकि वो आज रात भी आपके पोर्टफ़ोलियो का कोई भला नहीं करेंगी. पर कभी-कभार, अपने खाते के ब्योरे से नज़रें उठाकर ज़रा यह सोचिएगा कि आपके पोते-पोतियां आगे चलकर किस चीज़ को बिल्कुल आम और रोज़मर्रा की बात मान बैठेंगे. मैं आपको यक़ीन से नहीं कह सकता कि मेरा दोस्त कोई भविष्यवक्ता है या बस एक ख़्वाब देखने वाला. मैं तो बस इतना कह सकता हूं कि मुझे पक्का यक़ीन नहीं कि वो ग़लत है.
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