इन्वेस्टमेंट प्लान

क्या मुनाफ़ा कमाने का वक़्त आ गया है?

बाज़ार में जब इतना बढ़िया समय चल रहा हो, तब मौक़े का हाथ से निकलना आपके लिए अच्छा नहीं

बाज़ार में जब इतना बढ़िया समय चल रहा हो, तब मौक़े का हाथ से निकलना आपके लिए अच्छा नहीं

आंचल ने बाज़ार की तेज़ी से फ़ायदा पाया है. अप्रैल 2020 में, उसने इक्विटी फ़ंड में ₹25,000 का निवेश किया था, जो साल के आख़िर तक ₹39,000 हो गया. मुनाफ़े से उत्साहित होकर, उसने जनवरी 2021 से ₹5,000 महीने की मासिक SIP (सिस्टमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान) भी शुरू कर दी.

उसका ₹2.4 लाख का निवेश अब बढ़कर ₹3.4 लाख हो गया है. आंचल अपने निवेश को बढ़ता देखकर ख़ुश है, लेकिन अब वो सोच रही है कि क्या मुनाफ़े को भुनाने का यानी अपने निवेश से बाहर निकलने का वक़्त आ गया है.

जब तक पैसों की ज़रूरत न हो निवेश से न निकलें

  • सिर्फ़ तभी पैसे निकालें जब आपको पैसों की ज़रूरत हो. ऐसा इसलिए, क्योंकि कम समय के दौरान इक्विटी मार्केट में क्या होगा इसका पहले से अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता.
  • पैसों की ज़रूरत पड़ने से कम से कम 12 से 18 महीने पहले चरणबद्ध (phased manner) तरीक़े से पैसे निकालने चाहिए (अगर किसी ऐसे मक़सद के लिए निवेश किया गया है जिसे टाला नहीं जा सकता).

बाज़ार को टाइम मत करें

  • टाइम करना यानी, बाज़ार में आगे क्या होगा इस बात का अंदाज़ा लगाना और फिर उसके होने से पहले ही निवेश करने या बाहर निकलने का फ़ैसला करना. तो, अभी अगर आप बाज़ार की संभावित गिरावट के चलते पैसा बाज़ार गिरने पर दोबारा निवेश करने की सोच रहे हैं, तो ऐसा न करें!
  • कोई भी इंसान हर बार बाज़ार का सही अंदाज़ा नहीं लगा सकता. ऐसा करना क़रीब क़रीब नामामुकिन है. और अगर बाज़र लगातार ऊपर ही उठता रहा तब आप क्या करेंगे? आप मुनाफ़ा कमाने का मौक़ा चूक जाएंगे.
  • हक़ीकत में, लॉन्ग टर्म में इक्विटी से होने वाले फ़ायदे के बड़े हिस्से के लिए सिर्फ़ कुछ ही दिन ज़िम्मेदार होते हैं. उन दिनों को मिस करने से आपके निवेश की वैल्यू कम कर सकते हैं. इस ग्राफ़ में भी आप यही बात देख सकते हैं.

अब आंचल को क्या करना चाहिए

  • एसेट एलोकेशन: एसेट एलोकेशन आपको कम क़ीमत पर ख़रीदने और ज़्यादा क़ीमत पर बेचने में मदद करता है. यहां बताया गया है कि ऐसा कैसे होता है. मान लीजिए, आंचल 75:25 इक्विटी-डेट एलोकेशन तय करती है. अगर बाज़ार में उछाल आता है और आंचल का इक्विटी घटक 85 फ़ीसदी तक बढ़ जाता है, तो उसे अपने इक्विटी (equity) निवेश का 10 फ़ीसदी बेचकर डेट (debt) में निवेश करना चाहिए. इससे उसे इक्विटी को तब बेचने में सहूलियत होती है जब वो ऊंचे स्तर पर हो.
    इसके उलट, मान लीजिए बाज़ार में गिरावट आ जाती है, और उसका इक्विटी-डेट एलोकेशन 70:30 हो जाता है. ऐसे में, आंचल को अपने डेट का 5 फ़ीसदी बेचना चाहिए और अपने मूल 75:25 के एलोकेशन पर वापस जाने के लिए कम क़ीमत पर इक्विटी ख़रीदनी चाहिए.
  • अपनी इनकम का कम से कम 20 फ़ीसदी निवेश करें: हर महीने SIP के ज़रिए से नियमित तौर से निवेश करें, क्योंकि इसमें चूक करने से आपके लॉन्ग टर्म में पैसा बनाने पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है.
  • अपने SIP योगदान को बढ़ाएं: अपनी सालाना सैलरी में बढ़ोतरी के हिसाब से अपने SIP को बढ़ाएं. ये आपकी संपत्ति में बहुत बड़ा अंतर ला सकता है.
  • अलग-अलग इक्विटी फ़ंड में निवेश करें: इनमें फ़्लेक्सी-कैप और मल्टी-कैप फ़ंड शामिल हैं.

हमेशा याद रखें

  • इक्विटी निवेश कम से कम पांच साल के लिए होना चाहिए.
  • हमेशा चरणबद्ध (phased manner) तरीके से निवेश करें. इससे बाज़ार में तेज़ी का जोख़िम कम हो जाता है.
  • अपने ख़र्चों के कम से कम छह महीने के बराबर एक इमरजेंसी फ़ंड बनाए रखें.
  • अगर आपके पास कोई वित्तीय आश्रित है तो लाइफ़ इनश्योरेंस (टर्म प्लान) ख़रीदें.
  • परिवार के सभी सदस्यों के लिए स्वास्थ्य बीमा ज़रूरी है.

ये भी पढ़िए - आसमान छूते बाज़ार: क्या करें और क्या नहीं

ये लेख पहली बार जुलाई 16, 2024 को पब्लिश हुआ.

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