बड़े सवाल

अब अलग-अलग तरह के गोल्ड इन्वेस्टमेंट पर किस तरह लगेगा टैक्स?

ये भी जानें कि किस तरह का गोल्ड इन्वेस्टमेंट सबसे ज़्यादा टैक्स-एफिसिएंट है

gold-investment-tax-changes-2024

What is the tax rate on gold: निवेश के मामले में गोल्ड हमेशा से भारत में सबसे पसंदीदा विकल्प रहा है. जुलाई 2023 की वर्ल्ड गोल्ड कॉउंसिल की रिपोर्ट से पता चलता है कि भारतीय परिवारों के पास 25,000 टन तक गोल्ड है. ये कुछ विकसित देशों के ख़जाने में पड़े गोल्ड से भी ज़्यादा है.

भारत में गोल्ड की इस लोकप्रियता को देखते हुए, ये जानना ज़रूरी हो जाता है कि कैपिटल गेन टैक्स नियमों में हालिया बदलावों के बाद गोल्ड इन्वेस्टमेंट पर किस तरह से टैक्स लगेगा.

फिज़िकल गोल्ड (धातु के रूप में) पर टैक्स बदलाव

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
तीन साल के अंदर बेचने पर मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाता था और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता था. 2 साल के अंदर बेचने पर मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा.

नोट: होल्डिंग अवधि छोटी होने से कई निवेशकों पर असर पड़ने की संभावना नहीं है, क्योंकि फिज़िकल गोल्ड को आम तौर पर लॉन्ग-टर्म के लिए रखते हैं.

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
तीन साल के बाद बेचने पर मुनाफ़े पर 20 फ़ीसदी टैक्स और इंडेक्सेशन का फ़ायदा लागू. अगर दो साल बाद बेचा जाता है, तो मुनाफ़े पर 12.5 फ़ीसदी टैक्स देना होगा. हालांकि, इंडेक्सेशन का फ़ायदा लागू नहीं होगा.

नोट: हालांकि छोटी होल्डिंग अवधि से कुछ निवेशकों को फ़ायदा हो सकता है, लेकिन इंडेक्सेशन के फ़ायदे के हटने से टैक्स लाएबिलिटी बढ़ जाएगी.

गोल्ड म्यूचुअल फ़ंड पर टैक्स बदलाव

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
यूनिट्स को ख़रीदने के बाद तीन साल के अंदर बेचने पर मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाता था और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता था. अगर यूनिट्स को 1 अप्रैल, 2023 और 31 मार्च, 2025 के बीच ख़रीदा गया है, तो मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों (होल्डिंग अवधि के बावजूद) के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा.
अगर यूनिट्स को 31 मार्च, 2025 के बाद ख़रीदा जाता है और दो साल पूरे होने से पहले बेचा जाता है, तो मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा.

नोट: छोटी होल्डिंग अवधि से मीडियम-टर्म के निवेश को बढ़ावा मिलेगा.

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
अगर यूनिट 31 मार्च, 2023 से पहले ख़रीदी गई थीं और तीन साल बाद बेची जाती हैं, तो मुनाफ़े पर 20 फ़ीसदी टैक्स लागू होगा, साथ ही इंडेक्सेशन का फ़ायदा भी मिलेगा. अगर यूनिट 1 अप्रैल, 2023 और 31 मार्च, 2025 के बीच ख़रीदी गई हैं, तो मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों (होल्डिंग अवधि के बावजूद) के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा.
अगर यूनिट 1 अप्रैल, 2023 के बाद खरीदी गई हैं, तो मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा. अगर यूनिट 31 मार्च, 2025 के बाद ख़रीदी जाएंगी और दो साल बाद बेची जाएंगी, तो इंडेक्सेशन के फ़ायदे के बिना मुनाफ़े पर 12.5 फ़ीसदी टैक्स लगेगा.

नोट: होल्डिंग अवधि छोटी होने से म्यूचुअल फ़ंड ख़रीदना थोड़ा ज़्यादा फ़ायदेमंद हो जाएगा, लेकिन इंडेक्सेशन फ़ायदा हटने की वज़ह से सेल पर टैक्स लाएबिलिटी बढ़ जाएगी.

ये भी पढ़िए- क्या गोल्ड बॉन्ड (SGB) में SIP कर सकते हैं?

गोल्ड ETF (एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड) टैक्सेशन में बदलाव

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
यूनिट्स को तीन साल के अंदर बेचने पर मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाता था और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाता था. अगर यूनिट्स को 1 अप्रैल, 2023 और 31 मार्च, 2025 के बीच ख़रीदा गया है, तो मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों (होल्डिंग अवधि के बावजूद) के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा.
यदि यूनिट 31 मार्च, 2025 के बाद खरीदी जाती हैं, और 12 महीने से पहले बेची जाती हैं, तो मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के अनुसार टैक्स लगाया जाएगा.

नोट: ETF के लिए होल्डिंग अवधि म्यूचुअल फ़ंड की तुलना में कम हो गई है, इसलिए, मीडियम-टर्म के निवेशक ETF का रुख़ करने के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं.

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
अगर यूनिट 31 मार्च, 2023 से पहले ख़रीदी गई थीं और तीन साल बाद बेची जाती हैं, तो मुनाफ़े पर 20 फ़ीसदी टैक्स लागू होगा, साथ ही इंडेक्सेशन का फ़ायदा भी मिलेगा. अगर यूनिट्स को 1 अप्रैल, 2023 और 31 मार्च, 2025 के बीच ख़रीदा गया है, तो पूरे मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों (होल्डिंग अवधि के बावजूद) के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा.
अगर यूनिट 1 अप्रैल, 2023 के बाद खरीदी गई हैं, तो मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा. यदि यूनिट 31 मार्च, 2025 के बाद ख़रीदी जाएंगी और 12 महीने बाद बेची जाएंगी, तो इंडेक्सेशन के फ़ायदे के बिना मुनाफ़े पर 12.5 फ़ीसदी टैक्स लगेगा.

नोट: 'होल्डिंग अवधि में कमी' से जुड़े फ़ायदे से 'इंडेक्सेशन का फ़ायदा हटने' का असर कम हो जाएगा.

SGB (सेकेंडरी मार्केट में सेल)

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
तीन साल के अंदर बांड बेचने पर, मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाता था और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के हिसाब से टैक्स लगाया जाता था. 12 महीनों के अंदर बांड बेचने पर, मुनाफ़े को टैक्सेबल इनकम में जोड़ा जाएगा और लागू इनकम टैक्स स्लैब दरों के हिसाब से टैक्स लगाया जाएगा.

नोट: होल्डिंग अवधि में कमी से, SGB में शॉर्ट-टर्म निवेशकों को फ़ायदा हो सकता है.

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
तीन साल बाद बांड बेचने पर, इंडेक्सेशन के फ़ायदे के साथ कुल मुनाफ़े पर 20 फ़ीसदी टैक्स. अगर बांड 12 महीनों के बाद बेचे जाते हैं, तो इंडेक्सेशन के फ़ायदे के बिना कुल मुनाफ़े पर 12.5 फ़ीसदी टैक्स लागू होगा.

नोट: इंडेक्सेशन का फ़ायदा हटने से लॉन्ग-टर्म निवेश के प्रति रूचि कम हो सकती है.

SGB (RBI को रिडेम्शन)

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
मैच्योरिटी पर बेचने या RBI को रिडीम करने पर कोई टैक्स नहीं. मैच्योरिटी पर बेचने या RBI को रिडीम करने पर कोई टैक्स नहीं.

नोट: टैक्सेशन में कोई बदलाव नहीं.

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन

पुराना नियम नया नियम
मैच्योरिटी पर बेचने या RBI को रिडीम करने पर कोई टैक्स नहीं. मैच्योरिटी पर बेचने या RBI को रिडीम करने पर कोई टैक्स नहीं.

नोट: टैक्सेशन में कोई बदलाव नहीं.

संक्षेप में

  • हम हमेशा से कहते रहे हैं कि गोल्ड में लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट अच्छा विकल्प नहीं है. इक्विटी में लॉन्ग-टर्म में तुलनात्मक रूप से ज्यादा रिटर्न की संभावना होती है.
  • हालांकि, लॉन्ग-टर्म निवेशकों के लिए, मैच्योरिटी तक रखे गए या भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को बेचे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) सबसे अच्छा विकल्प बने हुए हैं. इनसे होने वाला मुनाफ़ा 100 फ़ीसदी टैक्स-फ़्री होता है.
  • मीडियम-टर्म के निवेशकों के लिए, गोल्ड ETF अब थोड़ा ज़्यादा आकर्षक हो गए हैं. अब, अगर कोई गोल्ड ETF 12 महीने के बाद बेचा जाता है, तो मुनाफ़े को लॉन्ग-टर्म माना जाएगा और उस पर 12.5 फ़ीसदी टैक्स लगाया जाएगा, हालांकि इंडेक्सेशन के बिना. इससे पहले, 'इंडेक्सेशन के साथ 20 फ़ीसदी टैक्स' के लिए निवेश को तीन साल तक रखना पड़ता था.
  • इस बीच, ज़्यादा होल्डिंग ख़र्च और मेकिंग चार्ज के कारण फिज़िकल गोल्ड अभी भी अच्छे फ़ायदे का सौदा नहीं है.

ये भी पढ़िए- SGB FAQs: स्टॉक एक्सचेंज पर कैसे ख़रीदें-बेचें?

ये लेख पहली बार अगस्त 28, 2024 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

आपके पास ₹50 लाख हैं. यह ग़लती बिल्कुल नहीं करना

पढ़ने का समय 6 मिनटउज्ज्वल दास

स्मॉल कैप के लिए मुश्क़िल रहा साल, फिर कैसे इस फ़ंड ने दिया 20% का रिटर्न?

पढ़ने का समय 4 मिनटचिराग मदिया

IEX का शेयर अपने पीक से 65% गिरा, क्या सबसे बुरा दौर बीत गया है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

एक एलॉय बनाने वाली कंपनी जो मेटल से ज़्यादा मार्केट से कमाती है

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

सस्ते में मिल रहा है इस कंपनी का शेयर, क्या ख़रीदारी का है मौक़ा?

पढ़ने का समय 4 मिनटमोहम्मद इकरामुल हक़

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

नाम में क्या रखा है!

नाम में क्या रखा है!

जब एक लेबल सब बताए और कुछ न बताए

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी