इंटरव्यू

दूसरे क्वार्टर में कमाई कमज़ोर रही तो गिरेगा बाज़ार: निकेत शाह

मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फ़ंड के CIO से ख़ास बातचीत का वीडियो इंटरव्यू सुनिए (अंग्रेज़ी) या यहां पढ़िए (हिंदी)

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ऐसा बाज़ार जो क़रीब-क़रीब हर हफ़्ते रिकॉर्ड तोड़ रहा हो, उसमें निकेत शाह उन चंद लोगों में से हैं जिनकी आवाज़ की अहमियत अब भी क़ायम है. क़रीब 15 साल के तजुर्बे वाले फ़ंड मैनेजर शाह मोतीलाल ओसवाल म्यूचुअल फ़ंड में मुख्य निवेश अधिकारी (CIO) हैं, जहां वे क़रीब ₹43,800 करोड़ की नौ इक्विटी स्कीमों की देखरेख करते हैं. उनके फ़ंड, ख़ास तौर पर मोतीलाल ओसवाल फ्लेक्सी कैप फ़ंड ने 2023 से शानदार वापसी की है. मिड-कैप और लार्ज एंड मिडकैप फ़ंड भी शानदार प्रदर्शन करने वाले फ़ंड बनकर उभरे हैं

इस इंटरव्यू में, शाह अपने फ़ंड की वापसी के कारणों पर और बाज़ार की संभावित गिरावट के ख़याल पर हमसे चर्चा कर रहे हैं. उन्होंने ये भी बताया कि मौजूदा बाज़ार में अभी भी कितनी वैल्यू बाक़ी है.

नीचे बातचीत के संपादित अंश दिए गए हैं.

सेंसेक्स क़रीब हर हफ़्ते नई ऊंचाईयों को छू रहा है. क्या आपको लगता है कि यह तेज़ी बरक़रार रह सकती है? आपको क्या लगता है कि कौन से ख़ास फ़ैक्टर बाज़ार को आगे बढ़ा रहे हैं और आगे इसे क्या बढ़ा सकता है?
हम बाज़ारों में दो फ़ैक्टर पर विचार करते हैं: बुनियादी बातें और फ़्लो या लिक्विडिटी, पिछले तीन सालों में, बाज़ार तेज़ी से ऊपर गए हैं, लेकिन मुझे लगता है कि किसी ने भी अर्निंग्स पर ध्यान देने के लिए वक़्त नहीं निकाला है. पिछले चार सालों में निफ़्टी कंपनियों की अर्निंग ग्रोथ क़रीब 22 फ़ीसदी रही है. मिड-कैप के लिए कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 36 फ़ीसदी के क़रीब रहा है, और स्मॉल-कैप कंपनियों के लिए ये क़रीब 48 फ़ीसदी है. इसलिए जब आपके पास इस तरह का ग्रोथ रेट होता है, जो हमने इंडेक्स के बनने के बाद से मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियों के लिए कभी नहीं देखा है, तो ये निश्चित है कि हम उन शेयरों में काफ़ी मात्रा में दोबारा रेटिंग होते हुए देखेंगे.

अगर आप उन इंडेक्स के रिटर्न को देखें, तो ये हक़ीकत में अर्निंग्स को प्लस या माइनस 2 फ़ीसदी दिखाता है. इसी तरह, लिक्विडिटी पक्ष में सबसे बड़ा बदलाव रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी की वजह से हुआ है. डीमैट खातों की संख्या हर महीने बढ़ रही है, और म्यूचुअल फ़ंड फ़्लो काफ़ी मज़बूत है. घरेलू संस्थागत निवेशक और रिटेल निवेशक बाज़ार का 85 फ़ीसदी हिस्सा रखते हैं, जबकि विदेशी संस्थागत निवेशक बाक़ी का 15 फ़ीसदी हैं. इसलिए जब बाज़ार का 85 फ़ीसदी हिस्सा ख़रीदता रहता है, और 15 फ़ीसदी हिस्सा बेचता रहता है, तो पूरे बाज़ार पर कोई असर नहीं पड़ता है.

इन दो बातों ने बाज़ार के लगातार होने वाले उछाल में योगदान दिया है. अतीत में, निवेशक शुरुआत में मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में जाने से पहले लार्ज-कैप शेयरों में निवेश करते थे. लेकिन अब हम ग़ैर-लिस्टिड इक्विटी के लिए इतना उत्साह और जुनून देख रहे हैं. इसलिए, घरेलू पक्ष पर रिटेल/HNI/संस्थागत निवेशकों की रिस्क लेने की क्षमता में बढ़ोतरी ही हुई है.

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क्या आपको लगता है कि ये तेज़ी जारी रह सकती है?
पिछली 16 तिमाहियों में, पिछली तिमाही (जून 2024-25) सबसे धीमी रही. हमने लार्ज-कैप कंपनियों के लिए क़रीब 4-5 फ़ीसदी और मिड-कैप कंपनियों के लिए 7-8 फ़ीसदी की अर्निंग देखी है. अब, हम इसका श्रेय चुनावी मौसम को दे सकते हैं, यही वजह है कि मेरा मानना ​​है कि दूसरी तिमाही की अर्निंग एक टेस्ट का काम करेगी. अगर हम दूसरी तिमाही में कमज़ोर अर्निंग देखना जारी रखते हैं, तो मेरा मानना ​​है कि बाज़ार में कुछ सुधार होने लगेंगे. हमने पहले ही कई सेक्टर्स में कुछ बिकवाली देखी है, जहां वैल्यूएशन महंगा था और अर्निंग का कोई समर्थन नहीं था. इसलिए, हम एडस्टमेंट के दौर की उम्मीद करते हैं, जिससे सेक्टर्स और थीम के भीतर ज़रूरी मंथन की ज़रूरत होती है. नही तो, हर स्थिति में बेहतर प्रदर्शन बेहद मुश्किल है.

इसके अलावा, मुझे लगता है कि हर कोई कह रहा है कि वैल्यूएशन महंगा है, इसलिए बाज़ार को सही होना चाहिए. बाज़ार इसलिए सही नहीं होते क्योंकि वैल्यूएशन महंगा है. वे तब सही होते हैं जब अर्निंग में गिरावट की सायकल होती है, या वैश्विक स्तर पर कोई गड़बड़ होती है. पिछले 18 महीनों से क़ीमतें महंगी रही हैं. ये कल महंगा नहीं हुआ था; उस नज़रिए से, बाज़ार में तेज़ी जारी है. मेरा मानना ​​है कि जब तक मज़बूत आय बढ़ोतरी और उचित मात्रा में लिक्विडिटी मौजूद नहीं होगी, तब तक बाज़ार में गिरावट नहीं आएगी.

ऐसा कहा जा रहा है कि अमेरिका से आए मैक्रो डेटा कुछ चिंतित करने वाले हैं और साथ ही भारत में अर्निंग में मंदी का दौर चल रहा है, इसलिए हमारा मानना ​​है कि बाज़ार मज़बूत होगा. हमें इक्विटी बाज़ारों में बड़ी तेज़ी की उम्मीद नहीं है, लेकिन हमें बड़ी गिरावट की उम्मीद भी नहीं है. हम 25-30 फ़ीसदी की तेज़ गिरावट नहीं देखेंगे, लेकिन हां, बाज़ार में 8-10 फ़ीसदी की गिरावट की उम्मीद से इंकार नहीं किया जा सकता. अगर आप 2004-2007 की तेज़ी को भी देखें, तो हमारे यहां सात सुधार हुए थे, जिनमें से दो 30 फ़ीसदी के क़रीब थे. फिर भी, ऐसा होने से पहले, हम सभी जानते थे कि ये सबसे बड़ा बुल मार्केट था. गिरावट का मतलब ये नहीं कि बुल मार्केट ख़त्म हो गया है. मेरा मानना ​​है कि इस समय भारत में एक संरचनात्मक, 10-साल की बुल सायकल चल रही है. मेरा मानना ​​है कि हमें बुल मार्केट के अंत का ऐलान नहीं करनी चाहिए और बाज़ार में गिरावट की भविष्यवाणी नहीं करनी चाहिए.

रिकॉर्ड ऊंचाई पर वैल्यूएशन के साथ, क्या अच्छे निवेश के अवसर तलाशना मुश्किल हो रहा है? आप इस तरह के बाज़ार में वैल्यू की पहचान कैसे करते हैं?
मेरा मानना ​​है कि बाज़ार में हमेशा वैल्यू और ग़लत प्राइस मौजूद होता है. हमारा मानना ​​है कि आपको उन सेक्टर पर ध्यान लगाना चाहिए जहां वैल्यूएशन काफ़ी कम है और साथ ही अर्निंग पर भी विचार करना चाहिए.

हमारा मानना ​​है कि अमेरिकी चुनाव ख़त्म होने के बाद IT ग्रोथ फिर से शुरू हो जानी चाहिए. कुछ IT कंपनियों के लिए ग्रोथ में मामूली बढ़ोतरी मानते हुए, मौजूदा वैल्यूएशन ज़्यादा किफ़ायती लगेंगे. यही वजह है कि हमने कुछ तिमाहियों पहले IT सेक्टर में ओवरवेट पोज़ीशन ली थी, जिसका हमें अब फ़ायदा मिल रहा है. हमने फ़ार्मा सेक्टर में भी ओवरवेट पोज़ीशन ली है और इससे हमें कुछ सेक्टर में फ़ायदा हो रहा है. हम रियल एस्टेट, कैपिटल गुड्स और बैंकिंग जैसे कुछ बड़े बीटा स्टॉक से बाहर निकल गए हैं. हमारा बैंकिंग एक्सपोज़र क़रीब ज़ीरो है और हमने नॉन-बैंकिंग फ़ाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) में निवेश किया है, जहां हमारा वेट बहुत ज़्यादा है.

इसलिए, मैं तर्क दूंगा कि हमारे पोर्टफ़ोलियो बेहद अच्छी स्थिति में हैं. वर्तमान में, हमारे पोर्टफ़ोलियो का वेट IT और दूरसंचार, उपभोक्ता विवेकाधीन और कुछ विनिर्माण सेक्टर पर है, जहां हम भविष्य में ख़ास अर्निंग बढ़ने की उम्मीद करते हैं. हम इस समय ज़्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते हैं और क्वालिटी कर्व को ऊपर ले जाना चाहते हैं. हक़ीक़त में, पिछले दो से तीन महीनों में, हमने स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश किया है, जो हमारे ख़रीदने के बाद से 60-70 फ़ीसदी तक बढ़ गए हैं. जबकि वैल्यूएशन महंगा है और कुछ सेक्टरों में ज़्यादा तेज़ी है, हमें पूरे बाज़ार पर ऐसा नहीं करना चाहिए.

बाज़ार में अभी भी बहुत ज़्यादा वैल्यू है, बहुत सारे शेयर हैं जिनके बारे में हमारा मानना ​​है कि वे आपको अगले दो से तीन सालों में दो से तीन गुना रिटर्न दे सकते हैं, और वे अभी भी हमारी आंखों के सामने मौजूद हैं.

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मोतीलाल ओसवाल फ़्लेक्सी कैप को 2018 से 2022 तक मुश्किल दौर से गुज़रना पड़ा, लेकिन 2023 और 2024 में इसने ज़ोरदार वापसी की. पिछले कुछ साल के दौरान मिडकैप और लार्ज एंड मिडकैप फ़ंड भी शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. इस बदलाव में किन बातों का योगदान रहा? क्या किसी ख़ास सेक्टर में निवेश ने इस प्रदर्शन में योगदान दिया?
ये सब 2020 में शुरू हुआ. शुरुआत में, हमने कोविड के बाद IT पर ज़्यादा भरोसा किया क्योंकि हमें नहीं पता था कि कौन से सेक्टर अच्छा प्रदर्शन करेंगे. दुनिया भर में लोग ज़ूम के ज़रिए मीटिंग कर रहे थे और ऐसा लग रहा था कि तकनीक के बिना कोई रास्ता नहीं है, क्योंकि दुनिया कब खुलेगी इस पर कुछ साफ़ नहीं था. हमें लगा कि यह सेक्टर अच्छा प्रदर्शन कर सकता है, इसलिए हमने IT सेक्टर पर दांव लगाकर आनुपातिक रिटर्न कमाया.

दिसंबर 2021 में, हमने थीसिस पर फिर से विचार किया और पाया कि कोई लागत नहीं थी क्योंकि हर कोई घर पर बैठा था, इसलिए कोई वीज़ा और यात्रा लागत नहीं थी, जबकि रेवेन्यू ठोस था और मार्जिन बहुत बढ़िया. लेकिन हमने सोचा कि अर्थव्यवस्था खुलने के बाद चीज़ें बदल जाएंगी, क्योंकि लोग यात्रा करना और कार्यालयों में जाना शुरू कर देंगे, और टॉपलाइन बढ़ोतरी धीमी हो जाएगी, और इसलिए, वैल्यू और अर्निंग में गिरावट का सायकल होगा. 2021 में, IT सेक्टर का वैल्यूएशन महंगा होने लगा था. इसलिए, हमने IT में ज़ीरो वेट रखा और बैंकिंग और कैपिटल गुड्स सेक्टर में काफ़ी ज़्यादा वेट रखा. जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था खुली, बैंकों ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया. एक साल बाद, हमने बैंकों से बाहर निकलकर NBFC, उपभोक्ता विवेकाधीन और रियल एस्टेट पर ज़्यादा वेट रखा क्योंकि हमें लगा कि ब्याज दर सायकल अपने चरम पर है.

चालू वर्ष की शुरुआत में, हमने रियल एस्टेट से बाहर निकलकर टेलीकॉम पर ओवरवेट किया. अब, हम कैपिटल गुड्स से बाहर निकलकर IT0 और फ़ार्मा पर वापस आ गए हैं. तो इस तरह से हमने इस पूरी सायकल को नेविगेट किया है. सेक्टर और थीम का सही चुनाव, उस सेक्टर और थीम के भीतर कौन से स्टॉक ख़रीदने हैं, उस स्टॉक में मुनाफ़ा बुक करना और फिर अगले सेक्टर या थीम पर जाना और अगली थीम के भीतर कौन से स्टॉक खरीदने हैं. अगर आप इस सायकल को बार-बार दोहराते रहेंगे, तो मुझे लगता है कि आप समय के साथ इंडेक्स को मात दे देंगे.

आपके ELSS फ़ंड में इस कैटेगरी में सबसे ज़्यादा कॉन्सनट्रेटेड पोर्टफ़ोलियो है, जिसमें फ़ंड का क़रीब आधा हिस्सा मिड और स्मॉल कैप को एलोकेट किया गया है. यह देखते हुए कि इन सेगमेंट में पहले ही 30 फ़ीसदी से ज़्यादा की तेज़ी आ चुकी है, क्या आप आगे बढ़ते हुए अपनी एलोकेशन स्ट्रैटजी में बदलाव करने पर विचार कर रहे हैं?
हम ELSS फ़ंड में स्मॉल कैप और मिड कैप के लिए एलोकेशन कम कर रहे हैं, जबकि लार्ज कैप के लिए एलोकेशन थोड़ा बढ़ा रहे हैं. हालांकि, इसका मतलब ये नहीं है कि पूरा पोर्टफ़ोलियो लार्ज-कैप स्टॉक की ओर झुका हुआ है. हम मूल रूप से मानते हैं कि मिड-कैप की तरफ हमारे पास जो बिज़नस हैं, वे 50,000-70,000 करोड़ रुपये के मार्केट कैप की रेंज में हैं, उनकी बैलेंस शीट बहुत मज़बूत है. इसलिए मामूली सुधार से उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

हमारा मानना ​​है कि इनमें से कुछ मिड-कैप या स्मॉल-कैप कंपनियां बुनियादी तौर पर मज़बूत हैं, उनका ग्रोथ रेट बहुत अच्छा है, और वे अलग अलग मार्केट सायकल में बहुत अच्छा प्रदर्शन करना जारी रखेंगी. इसलिए, हम सिर्फ़ इसलिए लार्ज कैप की ओर नहीं जाना चाहते क्योंकि हमें लगता है कि वैल्यूएशन महंगा है. मुझे नहीं लगता कि ऐसा होने वाला है. हम लार्ज कैप की ओर ज़्यादा जाकर पोर्टफ़ोलियो के रिस्क को ज़रूर कम करेंगे, लेकिन हम लंबी अवधि के लिए क्वालिटी वाले मिड कैप का स्वामित्व बनाए रखेंगे.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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