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वॉरेन बफ़े की चिट्ठी से क्या सीख सकते हैं निवेशक

Warren Buffett के निवेश के बेहतरीन तरीक़े समझिए सीधे उनके 2024 के लेटर से

Warren Buffett के निवेश के बेहतरीन तरीक़े समझिए सीधे उनके 2024 के लेटर सेAI-generated image

अनुभवी निवेशकों के लिए वॉरेन बफ़े का शेयरहोल्डर्स को लिखा जाने वाला सालाना लेटर किसी पवित्र ग्रंथ से कम नहीं है. ये ओरेकल ऑफ ओमाहा (Oracle of Omaha) यानि बफ़े से मिलने वाला एक साल का ज्ञान है, जिसमें निवेश की फ़िलॉसफ़ी, बिज़नेस के उतार-चढ़ाव और जीवन के सबक़ शामिल होते हैं. ये साल भी कुछ अलग नहीं रहा. 2024 का लेटर भी वैसा ही है, जिसमें Buffett ने फिर से अपनी इन्वेस्टिंग फ़िलॉसफ़ी शेयर की है.

94 साल के Buffett अब Greg Abel को कंपनी की ज़िम्मेदारी सौंपने की तैयारी में हैं, ऐसे में उन्होंने ग़लतियों को स्वीकार करने (हां, बर्क़शायर को ख़रीदना भी उनके लिए एक बड़ी ग़लती थी) और लंबे समय में कंपाउंडिंग के फ़ायदों के बारे में बताया. इसके अलावा, उन्होंने ये भी बताया कि क्यों अभी भी उनको इक्विटी में पूरा भरोसा है, भले ही बर्क़शायर के पास अच्छा ख़ासा कैश पड़ा है.

तो चलिए जानते हैं इस साल के लेटर में हमारे लिए क्या ख़ास है:

1. ग़लतियां करो मगर उनसे सीखो

Buffett अपनी ग़लतियों को छिपाते नहीं बल्कि उन्हें खुले दिल से स्वीकारते हैं. और ग़लती से कुछ न कुछ सीखने के ऊपर ध्यान देते हैं. जैसे, वे खुद अक्सर बताते हैं कि उनकी सबसे बड़ी ग़लती थी Berkshire Hathaway ख़रीदना.

ये एक टेक्सटाइल कंपनी थी जो उस समय सस्ती लगी, जैसा कि चार्ली मुंगेर ने तुरंत ग़ौर किया कि ये धीरे-धीरे ख़त्म हो रहा बिज़नेस था.

Buffett ख़ुद मानते हैं कि ये उनकी सबसे बड़ी ग़लतियों में से एक थी, जिसने हमें दो दशक तक परेशान किया. हालांकि, बर्क़शायर के लिए मैंने जो क़ीमत चुकाई वो सस्ती लग रही थी, लेकिन उसका बिज़नेस ख़त्म होने की कगार पर था.

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इस ग़लत क़दम ने बफे़ को उनकी इन्वेस्टिंग फ़िलॉसफ़ी पर दोबारा से सोचने पर मजबूर किया, जिससे उन्हें सिर्फ़ "सस्ते" शेयर ख़रीदने के बजाय मज़बूत, स्थायी आर्थिक लाभ वाले ऐसे बिज़नेस पर फ़ोकस किया, जो लंबे समय तक टिके रह सकें. उन्होंने "अंगूठा चूसने" (thumb-sucking) की ख़तरनाक आदत के ख़िलाफ़ भी चेतावनी दी, एक शब्द जिसे चार्ली मुंगेर ने सुधार के लिए ज़रूरी कठिन फ़ैसलों में देरी के लिए गढ़ा था.

इससे क्या सबक़ मिला? निवेश में, जीवन की तरह, ग़लतियों की कोई गुंजाइश नहीं है. ज़रूरी ये है कि आप कितनी जल्दी इन्हें स्वीकार करते हैं और खुद में सुधार करते हैं. उन्होंने ये भी बताया कि जब कोई इन्वेस्टमेंट ग़लत नज़र आए, तो तुरंत कदम उठाकर अपने नुक़सान को कम करें और आगे बढ़ें. और हां, सबसे ज़रूरी बात सस्ते दाम के चक्कर में न पड़ें, क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया जा सकता.

2. लीडरशिप में डिग्री नहीं, कैरेक्टर देखो

बफे़ के मुताबिक़ किसी का बैकग्राउंड या उसकी डिग्री मायने नहीं रखती. वो कहते हैं, "मैंने कभी नहीं देखा कि कोई कहां से और कितना पढ़ा है. कभी नहीं!"

लीडरशिप चुनने का उनका तरीक़ा शानदार डिग्री या बेहतरीन रिज़्यूमें चुनने से जुड़ा नहीं है. बल्कि ईमानदारी और कॉमन सेंस है. इसका सबसे अच्छा उदाहरण है Pete Liegl, जिन्होंने Forest River कंपनी बनाई थी और फिर उसे बर्क़शायर को बेच दी थी. हालांकि, Pete ख़ुद उसकी लीडरशिप में बने रहे. जिससे शेयरहोल्डर को अरबों डॉलर की वैल्यू मिली.

सही कम्पंसेशन के लिए Pete की सरलता और व्यक्तिगत फ़ायदे पर अपने परिवार की फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी को प्राथमिकता देने का उनका ये फ़ैसला दर्शाता है कि Buffett ऐसे लोगों को पसंद करते हैं जो अक्सर फ़ॉर्मल एजुकेशन और पैसा बनाने से ज़्यादा अपने बिज़नेस और लोगों की ज़िम्मेदारी को अहमियत देते हैं.

इससे क्या सबक़ मिला? कंपनी का अनालेसिस करते समय, उसके फ़ाउंडर, डिग्री या ग्लैमर मत देखो. बल्कि इससे परे जाओ. बड़े बिज़नेस अक्सर ज़मीनी, दमदार लीडर द्वारा चलाए जाते हैं. भले ही उनके पास बड़ी डिग्रियां न हों, लेकिन उनके पास अपनी इंडस्ट्री की समझ के साथ विज़न और ईमानदारी होती है.

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3. कैश से ज़्यादा पॉवरफ़ुल है इक्विटी

बफे़ के पास बर्क़शायर के अरबों डॉलर कैश में होने के बावजूद, उनका पैसा इक्विटी में लगा है. बफे़ ने सबसे बेहतर लॉन्ग टर्म एसेट क्लास के तौर पर इक्विटी पर अपना भरोसा दोहराया है और शेयरहोल्डर्स को ये यक़ीन दिलाया है कि "उनका ज़्यादातर पैसा इक्विटी में ही लगा रहेगा."

महंगाई के चलते लंबे समय में कैश की वैल्यू कम हो सकती है. वहीं, अच्छे बिज़नेस में इन्वेस्ट करके पैसे को बढ़ाया जा सकता है. बफे़ ने बर्क़शायर की ऐपल, कोका-कोला और अमेरिकन एक्सप्रेस जैसी महान कंपनियों के शेयरों के ख़रीदने पर फ़ोकस किया.

वो कहते हैं, "चाहे कंट्रोल हासिल करना हो या आंशिक तौर पर ख़रीदना हो, बर्कशायर हैथवे ने एक अच्छे बिज़नस की तुलना में कैश के समान एसेट्स (cash-equivalent assets) ख़रीदने को तरजीह नहीं दी."

बफे़ की इन्वेस्टर्स के लिए सीधी बात

इन्वेस्टिंग में ग़लती होना नॉर्मल है, लेकिन उससे सीखना ज़रूरी है. अगर किसी इन्वेस्टमेंट में दिक्क़त दिखे, तो उसे जल्दी छोड़ दो.

तो, अगली बार इन्वेस्टमेंट करने से पहले ख़ुद से ये सवाल पूछें कि क्या मैं सिर्फ़ सस्ते के पीछे भाग रहा हूं? और, क्या मेरा इन्वेस्टमेंट महंगाई को मात दे पाएगा?

बफे़ की सलाह साफ़ है: इक्विटी > कैश. महंगाई कैश की वैल्यू को ख़त्म कर सकती है. वहीं, इक्विटी, जो असल बिज़नेस ग्रोथ से जुड़ी है वो पैसा बनाने के लिए बेहतर है.

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