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अबेकस के सुनील सिंघानिया की तरह मल्टीबैगर्स कैसे तलाशें

सुनील सिंघानिया की मल्टीबैगर ढूंढ निकालने वाले तरीक़े जिसका बहुत कम लोगों को पता है

सुनील सिंघानिया की मल्टीबैगर ढूंढ निकालने वाले तरीक़े जिसका बहुत कम लोगों को पता हैAI-generated image

हमारी पिछली स्टोरी में, हमने मल्टीबैगर्स तलाशने के लिए अबेकस एसेट मैनेजर (Abakkus Asset Manager) के संस्थापक सुनील सिंघानिया की रणनीति का पता लगाया, जिसमें मैनेजमेंट में बदलाव, लगातार अर्निंग बढ़ाने और बिज़नस को रीस्ट्रक्चर करने जैसी रणनीतियों को शामिल किया गया. हम आगे कुछ और फ़ैक्टर्स का पता लगाते हैं जिनके बारे में सिंघानिया मानते हैं कि ये मल्टीबैगर्स को पहचाने में निवेशकों की मदद कर सकते हैं.

फ़िक्स्ड कॉस्ट का फ़ायदा

सिंघानिया के मुताबिक़, मल्टीबैगर्स की तलाश करते समय एक महत्वपूर्ण संकेत ऑपरेटिंग लीवरेज है. वो इसे सरल शब्दों में कहते हैं: "फ़िक्स्ड कॉस्ट फ़िक्स रहती हैं. जब फ़िक्स्ड कॉस्ट के इसी तरह बढ़े बिना रेवेन्यू बढ़ता है, तो आप ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट और EBITDA मार्जिन में भारी उछाल देखते हैं." ये कॉन्सेप्ट इस आइडिया को दिखाता कि एक बार कंपनी की फ़िक्स्ड कॉस्ट को कवर कर लेने के बाद, किसी भी एक्सट्रा रेवेन्यू का प्रॉफ़िट में असंगत यानि बिना किसी तारत्मय के होने वाली ग्रोथ का कारण बन सकता है.

सिंघानिया ABB की ओर इशारा करते हैं, जिसने 2016 और 2019 के बीच संघर्ष किया. इसके रेवेन्यू में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई, जबकि कर्मचारियों की लागत में भी कोई बदलाव नहीं आया. मार्जिन कम रहा क्योंकि कर्मचारी लागत ने ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट को खा लिया. हालांकि, जब कोविड-19 महामारी कम हुई और रेवेन्यू बढ़ने लगा, तो ये फ़िक्स्ड कॉस्ट उसी रेट से नहीं बढ़ीं. असल में, रेवेन्यू के प्रतिशत के रूप में, कर्मचारी लागत 9.8 से 7.4 प्रतिशत तक गिर गई. नतीजा काफ़ी बड़ा था - मुनाफ़े में चार गुना बढ़ोतरी और शेयर की क़ीमत में दस गुना उछाल.

सिंघानिया के लिए, ये केवल कंपनी के प्रॉफ़िट मार्जिन को देखने के बारे में नहीं है, बल्कि ये समझने के बारे में है कि रेवेन्यू बढ़ने पर वे मार्जिन कैसे बढ़ेंगे. "किसी कंपनी का मूल्यांकन करते समय, अपने आप से पूछें: अगर रेवेन्यू दोगुना हो जाता है, तो क्या फ़िक्स्ड कॉस्ट दोगुनी हो जाएगी? अगर नहीं, तो कंपनी के पास एक बड़ा ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट हो सकता है."

कैपेक्स साइकल का पूरा चक्कर

सिंघानिया की मल्टीबैगर रणनीति में एक और अहम फ़ैक्टर कैपेक्स साइकल समझना है. वे बताते हैं, "जब बिज़नस बढ़ते हैं, तो कैपेक्स साइकल आमतौर पर 3-4 साल लंबा होता है. इस दौरान, ख़र्च बढ़ता है, क़र्ज़ बढ़ता है और प्रॉफ़िटेबिलिटी या लाभप्रदता पर असर पड़ता है. लेकिन एक बार जब वो क्षमता ऑनलाइन हो जाती है और असरदार ढंग से इस्तेमाल की जाती है, तो रेवेन्यू में बढ़िया उछाल आता है".

सिंघानिया दीपक नाइट्राइट को इस बात का स्पष्ट उदाहरण बताते हैं कि कैपिटल एक्सपेंडिचर किसी बिज़नस के लिए किस तरह से महत्वपूर्ण हो सकता है. वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2018 के बीच, कंपनी ने अपनी क्षमता बढ़ाने में भारी निवेश किया. इसी अर्से में सालाना रेवेन्यू और प्रॉफ़िट में क्रमशः 12 और 10 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी हुई. हालांकि, वित्त वर्ष 2019 में नई क्षमता के चालू होने के बाद, कंपनी ने रेवेन्यू में 61 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी, जबकि टैक्स के बाद के प्रॉफ़िट में 120 प्रतिशत की आश्चर्यजनक बढ़ोतरी हुई. केमिकल इंडस्ट्री की फ़ेवरेबल साइकल ने इस बढ़ोतरी को और बढ़ाया, जिससे शेयर की क़ीमत में भारी उछाल आया.

सिंघानिया के लिए कैपिटल एक्सपेंडिचर साइकल के आख़िर में कंपनियों पर नज़र रखने से बेहतरीन मौक़े सामने आ सकते हैं. निवेश के शुरुआती सालों में इन बिज़नस में अक्सर धीमी ग्रोथ होती है, लेकिन जब क्षमता का इस्तेमाल बढ़ता है, तो रिटर्न बहुत ज़्यादा हो सकता है.

सोच में बदलाव

सिंघानिया बाज़ार की सोच को एक और अहम फ़ैक्टर मानते हैं. किसी बिज़नस या उसके मैनेजमेंट के बारे में नकारात्मक नज़रिया अक्सर ग़लत प्राइस तय करने की ओर ले जाता है, लेकिन जब वो सोच बदल जाती है, तो स्टॉक की वैल्यू अनलॉक की जा सकती है. "हम सभी के पास कंपनियों के बारे में पूर्वाग्रह होते हैं. किसी बिज़नस या प्रमोटर के साथ पिछले बुरे अनुभव अक्सर हमें उसका सही मूल्यांकन करने से रोकते हैं. लेकिन जब सोच बदलती है, तो स्टॉक में बहुत ज़्यादा रिटर्न मिल सकता है."

उन्हें APL अपोलो का मामला याद आता है. एक बार कम मार्जिन वाली कमोडिटी स्टील कंपनी मानी जाने वाली कंपनी को स्पष्ट प्रतिस्पर्धी लाभ (competitive advantage) की कमी के कारण डिस्काउंट पर मूल्यांकित (valued) किया गया था. हालांकि, समय के साथ, APL अपोलो की म़जबूत ग्रोथ की शुरुआत, बेहतर ब्रांडिंग और इक्विटी पर रिटर्न (ROE) और रिटर्न ऑन कैपिटल इंप्लॉइड (ROCE) जैसे अहम फ़ाइनेंशियल मीट्रिक पर बेहतर ध्यान केंद्रित करने से बाज़ार की धारणा बदलने लगी. नतीजा, स्टॉक को फिर से रेट किया गया - स्टील कंपनी के तौर पर नहीं, बल्कि FMCG बिज़नस जैसी एक जैसे हाई-ग्रोथ वाली कंपनी के तौर पर.

जब कोई बिज़नस बुनियादी तौर से बेहतर होता है, तो बाज़ार उसका पुनर्मूल्यांकन करना शुरू कर सकता है, और धारणा में बदलाव के नतीजे में बड़े पैमाने पर दोबारा रेटिंग हो सकती है.

साइक्लिकल मंदी से बचना

साइक्लिकल स्टॉक को होल्ड करना सबसे चुनौती भरा हो सकता है, लेकिन सिंघानिया का मानना ​​है कि सही समय पर, वे असाधारण रिटर्न दे सकते हैं. "साइक्लिकल स्टॉक निराश करने वाले होते हैं," वे कहते हैं, "लेकिन जब सही समय पर, वे असाधारण रिटर्न दे सकते हैं. चाल ये है कि उन्हें तब ख़रीदें जब उन्हें पूरी तरह से नज़रअंदाज कर दिया गया हो, लेकिन वे अभी भी प्रॉफ़िटेबिलिटी बनाए रखते हों." वे सुप्रीम पेट्रोकेम की मिसाल देते हैं. एक चुनौती भरी इंडस्ट्री में मंदी के दौरान, कंपनी कम मांग के स्तर पर भी प्रॉफ़िट में बने रहने में क़ामयाब रही. जैसे ही इसके उत्पादों की क़ीमत 20-30 रुपये प्रति किलोग्राम बढ़ी, इसका EBITDA बढ़ गया, और स्टॉक में तेज़ उछाल आया.

सिंघानिया सलाह देते हैं, "साइक्लिकल स्टॉक के साथ धीरज रखें." "अगर वे मंदी से बच जाते हैं, तो वे साइकल बदलने पर असाधारण रिटर्न दे सकते हैं." संक्षेप में मल्टीबैगर को पहचानने के लिए सिंघानिया के नज़रिए में ऑपरेटिंग लीवरेज, कैपेक्स साइकल का पूरा होना या बाज़ार की धारणा में बदलाव जैसे अनदेखे इंडीकेटर पर ध्यान देना शामिल है. ये छोटे फ़ैक्टर कुल बाज़ार का ध्यान आकर्षित करने से बहुत पहले विस्फोटक बढ़ोतरी की क्षमता वाले अवसरों को सामने लाने के लिए असरदार संकेत हो सकते हैं.

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ये लेख पहली बार मार्च 27, 2025 को पब्लिश हुआ.

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