बड़े सवाल

जानें कब और क्यों डेट फ़ंड नेगेटिव रिटर्न दे सकते हैं?

आइए उन की कारणों ओर ग़ौर करें जब हाल के साल में डेट फ़ंड्स में गिरावट आई है

आइए उन की कारणों ओर ग़ौर करें जब हाल के साल में डेट फ़ंड्स में गिरावट आई हैAI-generated image

बहुत से निवेशक सोचते हैं कि डेट म्यूचुअल फ़ंड बिल्कुल सुरक्षित हैं - लगभग FD (फ़िक्स्ड डिपॉज़िट) की तरह. आख़िरकार, "डेट" शब्द सुनते ही "कम रिस्क और स्थिर रिटर्न" का अहसास होता है.

लेकिन डेट म्यूचुअल फ़ंड्स इस तरह से काम नहीं करते हैं.

ये निगेटिव रिटर्न दे सकते हैं - और कभी-कभी देते भी हैं. यहां तक ​​कि कभी-कभार इन सेफ़ फ़ंड्स की वैल्यू भी लॉस हो जाती है.

ऐसा हर बार नहीं होता, लेकिन ये जानना ज़रूरी है कि ऐसा कब और क्यों हो सकता है, ताकि आप तैयार रहें.

डेट म्यूचुअल फ़ंड्स FD की तरह क्यों नहीं हैं?
डेट म्यूचुअल फ़ंड सरकारी ट्रेजरी बिल, बॉन्ड और कॉर्पोरेट डेट जैसी चीज़ों में निवेश करते हैं. ये सुरक्षित लगते हैं, और कई मामलों में ये हैं भी. लेकिन एक बड़ा फ़र्क है: ये बॉन्ड मार्केट में ट्रेड होते हैं, इसलिए इनकी क़ीमतें रोज़ बदलती हैं.

और चूंकि फ़ंड के NAV (नेट एसेट वैल्यू) इन बॉन्ड की मौजूदा क़ीमतों पर निर्भर करती है, इसलिए NAV ऊपर भी जा सकता है और नीचे भी.

ये FD से बिल्कुल अलग है, जहां आपका रिटर्न तय होता है और पहले से ही पता होता है.

डेट फ़ंड कब नेगेटिव रिटर्न दे सकते हैं?

1. जब ब्याज दरें बढ़ती हैं
बॉन्ड निवेश का एक सरल नियम है: जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो मौजूदा बॉन्ड की क़ीमतें गिरती हैं.

क्यों? क्योंकि नए बॉन्ड अब ज़्यादा रिटर्न देते हैं, जिससे पुराने बॉन्ड कम आकर्षक हो जाते हैं.

2022 में, जब RBI ने ब्याज दरें तेज़ी से बढ़ाईं, तो कई लॉन्ग-ड्यूरेशन डेट फ़ंड्स , ख़ासतौर पर गिल्ट फ़ंड्स को शॉर्ट-टर्म में नुक़सान हुआ. ये ख़राब मैनेजमेंट या क्वालिटी की कमी नहीं थी; बल्कि रेट बढ़ने का नेचुरल रेस्पॉन्स था.

2. जब कोई कंपनी डिफ़ॉल्ट आ जाए
कुछ डेट फ़ंड कम रेटिंग वाली कंपनियों द्वारा जारी बॉन्ड में निवेश करके ज़्यादा रिटर्न पाने का लक्ष्य रखते हैं. लेकिन अगर वो कंपनी डिफ़ॉल्ट करती है या डाउनग्रेड हो जाती है, तो उन बॉन्ड की वैल्यू गिर जाती हैं—कभी-कभी बहुत तेज़ी से.

इसका एक जाना-माना उदाहरण है 2020 का फ्रैंकलिन टेंपलटन संकट. उसके छह डेट फ़ंड्स ने लो-रेटेड सिक्योरिटीज़ रखी थीं, जो इलिक्विड और रिस्की साब़ित हुईं. फ़ंड्स बंद करने पड़े, और निवेशकों को भारी नुक़सान उठाना पड़ा.

3. जब बाज़ार में दहशत हो
यहां तक कि सेफ़, हाई-क्वालिटी बॉन्ड भी गिर सकते हैं अगर मार्केट में अचानक डर फै़ल जाए और कोई उन्हें ख़रीदने को तैयार न हो.

ये मार्च 2020 के Covid-19 क्रैश के दौरान हुआ था. लिक्विडिटी खत्म हो गई, और कुछ फ़ंड्स अपनी होल्डिंग्स बेच नहीं पाए. यहां तक कि लिक्विड फ़ंड्स, जिन्हें सबसे सुरक्षित माना जाता है—ने भी मामूली पर असल नुक़सान दिखा.

मामला कितना बुरा हो सकता है?
डेट फ़ंड्स आमतौर पर अपनी स्थिरता के लिए जाने जाते हैं, लेकिन लेकिन कभी-कभी उनमें भी एक-दिन का नुक़सान देखा गया है—जो ब्याज दरों में उछाल, क्रेडिट इवेंट्स या अचानक मार्केट तनाव के कारण होता है.

नीचे दी गई टेबल में 20 साल के डेटा पर कैटेगरी-वाइज़ सबसे ख़राब एक-दिन रिटर्न और नेगेटिव रिटर्न्स की फ़्रीक्वेंसी दी गई है:

डेट फ़ंड्स में कितनी बार और कितनी गिरावट आई है?

*पिछले दो दशकों में दैनिक आधार पर शुरू की गई रेग्युलर प्लान का कैटेगरी ऐवरेज. नई कैटेगरी के लिए, आंकड़े उनकी शुरुआत के बाद से उपलब्ध दैनिक रिटर्न इंस्टेंस की संख्या पर आधारित हैं.

ये घटनाएं मामूली नहीं हैं, लेकिन वो दिखाती हैं कि डेट फ़ंड रिस्क-फ़्री नहीं हैं. सही फ़ंड चुनना और ये समझना कि इसमें क्या है, आपको हैरत से बचने में मदद कर सकता है.

तो, आपको क्या करना चाहिए?
रिस्क के बावजूद, सही फ़ंड चुनें तो डेट म्यूचुअल फ़ंड अभी भी बैंक FD से बेहतर हो सकते हैं—ख़ासतौर पर अगर आप समझदारी से चुनें. ये टैक्स के बाद बेहतर रिटर्न, ज़्यादा लिक्विडिटी और जल्दी बाहर निकलने के लिए कोई जुर्माना नहीं देते हैं. लेकिन इनका फ़ायदा उठाने के लिए रिस्क समझना और समझदारी से फै़सला लेना ज़रूरी है.

निवेशकों को ये स्वीकार करना चाहिए कि डेट फ़ंड्स में रिस्क असल में होता है. ये हर किसी के लिए सही कहे जाने वाला प्रोडक्ट नहीं है.

डेट फ़ंड में भी, कुछ फ़ंड एक्सट्रा रिटर्न पाने के लिए ज़्यादा रिस्क उठाते हैं, जबकि और दूसरे कंज़रवेटिव रहते हैं और कैपिटल को बचाने पर ज़्यादा ध्यान देते हैं. ये जानना ज़रूरी है कि आपका फ़ंड इस स्पेक्ट्रम पर कहां आता है.

वैल्यू रिसर्च में, हमने हमेशा यही कहा है: अपने डेट फ़ंड निवेश में बहुत ज़्यादा रिस्क न लें. फ़िक्स्ड इनकम में, आपका लक्ष्य सबसे पहले सुरक्षा और फिर रिटर्न होना चाहिए. अगर आप बेहतर रिटर्न के लिए ज़्यादा जोखिम उठाना चाहते हैं, तो इसके बजाय इक्विटी फ़ंड पर विचार करें.

निवेश से पहले डेट फ़ंड के बारे में पता कैसे लगाएं:

1. क्रेडिट क्वालिटी देखें: http://www.dhanak.valueresearchonline.com/ पर फ़ंड सर्च करें, 'Portfolio' टैब पर क्लिक करें और 'Rating-wise Holdings' तक स्क्रॉल करें. कम रेटिंग वाले पेपर में जितना ज़्यादा निवेश होगा, उतना ही रिस्की होगा.

2. YTM देखें: कैटेगरी एवरेज मुक़ाबले हाई यील्ड टू मेच्योरटी का मतलब हो सकता है कि फ़ंड रिटर्न पाने के ज़्यादा कोशिशों में जुटा है. इसे क्रेडिट क्वालिटी और पोर्टफ़ोलियो के ज़रिए जांचा जा सकता है.

3. होल्डिंग्स रिव्यू करें: किसी एक इशूअर में भारी एक्सपोज़र ख़तरे का निशान हो सकता है.

4. सबसे ख़राब रिटर्न पर ग़ौर करें: 'रिटर्न' टैब के तहत उपलब्ध सबसे बेस्ट और सबसे ख़राब प्रदर्शन फ़ीचर का इस्तेमाल करें. तेज़ गिरावट के इतिहास वाले फ़ंड पर क़रीब से नज़र डालना सही है - ख़ासकर शॉर्ट या लिक्विड फ़ंड जैसी कैटेगरी में, जहां स्थिरता की उम्मीद की जाती है.

अगर यह आपके लिए बहुत ज़्यादा काम लगता है, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र पर जाएं. हमारे एनेलिस्ट ने आपके लिए अपना होमवर्क़ पहले ही कर रखा है.

ये भी पढ़ें: क्यों डेट फ़ंड सिर्फ़ रिटायर्ड और बोरिंग लोगों के लिए नहीं है? जानें 3 वजह

ये लेख पहली बार अप्रैल 22, 2025 को पब्लिश हुआ.

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