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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बुलियन की क़ीमतों की तर्ज पर सोमवार, 12 मई 2025 को गोल्ड की क़ीमतों में ₹2,400 की भारी गिरावट देखने को मिल रही. असल में, भारत-पाक के बीच गतिरोध कम होने और अमेरिका-चीन ट्रेड डील से जुड़ी उम्मीदों के चलते निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ और पीली धातु के लिए सुरक्षित निवेश की अपील कम हो गई.
MCX पर गोल्ड के भाव शुरुआती कारोबार में लगभग ₹2,400 गिरकर ₹94,094 प्रति 10 ग्राम के निचले स्तर पर पहुंच गए हैं. सुबह 9:30 बजे, MCX पर गोल्ड ₹2,351 यानी 2.44 फ़ीसदी कमज़ोर होकर ₹94,167 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है.
वहीं, MCX पर सिल्वर का भाव ₹497 या 0.51% की गिरावट के साथ ₹96,232 प्रति किग्रा के स्तर पर कारोबार कर रही है. शुरुआती कारोबार में सिल्वर ने ₹95,753 का निचला स्तर छूआ था.
सोने की क़ीमतों पर असर डालने वाले 5 प्रमुख फ़ैक्टर्स (H2)
1. अमेरिका-चीन व्यापार वार्ता में सकारात्मक परिणाम: अमेरिका और चीन के बीच व्यापार वार्ता में सकारात्मक प्रगति का असर गोल्ड की क़ीमतों पर दिख रहा है. इससे बाजार में जोखिम उठाने की क्षमता बढ़ सकती है. ऐसी स्थिति में निवेशक गोल्ड जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों से हटकर शेयर बाज़ार जैसे जोखिम वाले विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे गोल्ड की कीमतों में गिरावट आ सकती है.
2. अमेरिकी डॉलर में मजबूती: आमतौर पर अमेरिकी डॉलर और सोने की कीमतों में विपरीत संबंध होता है. यदि किसी कारणवश अमेरिकी डॉलर अन्य प्रमुख मुद्राओं की तुलना में मजबूत होता है, तो सोने की कीमतें गिर सकती हैं. डॉलर के मजबूत होने से अन्य मुद्रा वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग कम हो सकती है.
3. केंद्रीय बैंकों की नीतियां: यूएस फेडरल रिज़र्व सहित दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियां सोने की कीमतों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालती हैं.
4. भू-राजनीतिक तनाव में कमी: सोना अक्सर भू-राजनीतिक अस्थिरता के समय एक सुरक्षित निवेश माना जाता है. भारत- पाकिस्तान के बीच गतिरोध, यूक्रेन युद्ध या मध्य-पूर्व के संकटों में कमी के चलते गोल्ड की सुरक्षित निवेश से संबंधित मांग घट सकती है, जिसका असर कीमतों में गिरावट के तौर पर दिख रहा है.
5. मुनाफावसूली: यदि सोने की कीमतें हाल ही में काफी बढ़ी हैं, तो निवेशक संभवतः मुनाफावसूली कर रहे हैं. जब बड़ी संख्या में निवेशक ऊंचे स्तरों पर सोना बेचना शुरू करते हैं, तो इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ जाती है और कीमतों पर दबाव पड़ता है, जिसका असर कीमतों पर दिख रहा है.
डिस्क्लेमर: यहां केवल सामान्य जानकारी दी गई है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें. यह समाचार विभिन्न वित्तीय स्रोतों और बाज़ार डेटा पर आधारित है.



