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शुक्रवार, 16 मई 2025 की सुबह घरेलू फ्यूचर मार्केट में गोल्ड की कीमतों पर दबाव देखने को मिल रहा है. असल में, दूसरी करेंसीज की तुलना में डॉलर में उतार-चढ़ाव और ट्रेड वार के जोखिम में कमी के कारण निवेश के लिहाज से सुरक्षित मानी जाने वाली इस एसेट की डिमांड पर दबाव बना हुआ है.
MCX पर गोल्ड शुरुआती कारोबार में गिरकर ₹92,728 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर पहुंच गया. हालांकि सुबह 10.15 बजे गोल्ड ₹142 की मज़बूती के साथ ₹93,311 के स्तर पर कारोबार कर रहा था.
अमेरिका में महंगाई
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा यूके और चीन के साथ ट्रेड डील की घोषणा करने और आने वाले दिनों में कई अन्य प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के साथ समझौते के संकेत देने के बाद इस महीने गोल्ड की कीमतों में मुनाफावसूली देखी गई है. ट्रेड वार की की चिंताओं को कम करने के अलावा, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें कमजोर होने से भी गोल्ड की कीमतों पर दबाव बन रहा है.
उधर, फेडरल रिजर्व के गवर्नर माइकल बार ने कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है, जबकि मुद्रास्फीति केंद्रीय बैंक के 2 प्रतिशत लक्ष्य के करीब पहुंच रही है. हालांकि, अमेरिकी ट्रेड पॉलिसीज ने खासी अनिश्चितता पैदा की है.
अमेरिकी उपभोक्ता महंगाई में चार साल में सबसे कम सालाना बढ़ोतरी देखी गई. मार्च में 0.1 प्रतिशत की गिरावट के बाद अप्रैल में यूएस कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई. सालाना आधार पर, सीपीआई 2.3 प्रतिशत चढ़ा, जो फरवरी 2021 के बाद से सबसे कम बढ़ोतरी है. मार्च में, यूएस सीपीआई सालाना आधार पर 2.4 प्रतिशत बढ़ा.
गोल्ड की क़ीमतों को प्रभावित करने वाले 4 अहम फ़ैक्टर्स
1. भू-राजनीतिक तनाव में कमी: भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम होने पर घरेलू सोने की कीमतों में नरमी देखी गई. वहीं, अमेरिका-चीन के बीच व्यापारिक तनाव घटने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की मांग कम हुई.
2. अमेरिकी डॉलर की मजबूती: आमतौर पर सोने और अमेरिकी डॉलर के बीच विपरीत संबंध होता है. जब अमेरिकी डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए सोना महंगा हो जाता है, जिससे इसकी मांग घट सकती है और कीमतें नीचे आ सकती हैं.
3. आर्थिक आंकड़ों में सुधार और इक्विटी बाजारों में तेजी: जब वैश्विक अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन करती है और शेयर बाजार में तेजी रहती है, तो निवेशक सोने जैसे सुरक्षित निवेशों से हटकर अधिक जोखिम वाले साधनों की ओर बढ़ते हैं ताकि उन्हें बेहतर रिटर्न मिल सके. इससे सोने की मांग घटती है और कीमतें नरम होती हैं.
4. मुनाफावसूली: सोने की कीमतों में एकतरफा तेजी के बाद अक्सर बाजार विशेषज्ञ करेक्शन की उम्मीद करते हैं. ऐसे में जिन निवेशकों ने निचले स्तरों पर खरीदारी की होती है, वे मुनाफावसूली के लिए बिकवाली करते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है और उनमें गिरावट देखी जा सकती है.
डिस्क्लेमर: यहां केवल सामान्य जानकारी दी गई है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए. किसी भी निवेश निर्णय से पहले प्रमाणित विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें. यह समाचार विभिन्न वित्तीय स्रोतों और बाज़ार डेटा पर आधारित है.



