Fund Advisor's Note

बाज़ार का ड्रामा आपकी समस्या नहीं है. आपको बस निवेश में बने रहना है.

जेन स्ट्रीट का मामला गंभीर है, लेकिन इससे एक सोच-समझकर लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले के लिए कुछ नहीं बदलता

जेन स्ट्रीट का मामला गंभीर है, लेकिन इससे एक सोच-समझकर लंबी अवधि के लिए निवेश करने वाले के लिए कुछ नहीं बदलताAditya Roy/AI-Generated Image

सेबी ने हाल ही में जेन स्ट्रीट के खिलाफ जो कार्रवाई की, उसने भारत में ट्रेडिंग करने वालों में हलचल मचा दी है. आरोप गंभीर हैं: कथित तौर पर बैंक निफ़्टी इंडेक्स को सुनियोजित ख़रीद-बिक्री की स्ट्रैटेजीस के जरिए हेरफेर करना, जिससे अरबों का मुनाफ़ा हुआ, जबकि रिटेल ट्रेडर्स को भारी नुक़सान उठाना पड़ा. गुस्सा जायज है. जब रेगुलेटर्स दावा करते हैं कि डेरिवेटिव्स मार्केट में 91 प्रतिशत व्यक्तिगत ट्रेडर्स को नुक़सान होता है और साथ ही बेहद तेज़ विदेशी ऑपरेटर्स द्वारा सिस्टमैटिक हेरफेर का खुलासा होता है, तो ये लगना स्वाभाविक है कि खेल में धांधली है. लेकिन बाज़ार में हेरफेर के बारे में एक बात है: ये वास्तविक है, ये होता है और ये ज़्यादातर एक सच्चे निवेशक के लिए अप्रासंगिक भी है. इसका मतलब जेन स्ट्रीट की कथित हरकतों की गंभीरता को कम करना या नियामकीय नाकामियों को नज़रअंदाज़ करना नहीं है. बल्कि ये बताना है कि हेरफेर उसी तरह के अल्पकालिक, सट्टेबाजी वाले ट्रेडिंग में पनपता है, जिससे समझदार निवेशकों को वैसे भी बचना चाहिए. जरा सोचिए कि जेन स्ट्रीट पर क्या आरोप है. कथित तौर पर उन्होंने ट्रेडिंग के शुरुआती घंटों में बैंक निफ़्टी स्टॉक्स ख़रीदकर इंडेक्स को ऊपर धकेला और साथ ही इंडेक्स ऑप्शंस में शॉर्ट पोजीशन बनाई. ये रणनीति इसलिए कामयाब रही क्योंकि वे ये अनुमान लगा सकते थे कि इंडेक्स दिन में बाद में कैसे हिलेगा, जिससे वे खुद के द्वारा बनाए गए प्राइस मूवमेंट्स से मुनाफ़ा कमा सकें. ये पुराने पंप-एंड-डंप घोटाले का एक परिष्कृत संस्कर

ये लेख पहली बार जुलाई 15, 2025 को पब्लिश हुआ.

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