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म्यूचुअल फ़ंड इनफ़्लो में गिरावट जारी; गोल्ड ETF चमके

इक्विटी और हाइब्रिड कैटेगरी में लगातार तीसरे महीने के इनफ़्लो में कमी, वहीं गोल्ड और सिल्वर ETF में क़ीमतों में बढ़ोतरी के चलते तेज़ी

इक्विटी और हाइब्रिड कैटेगरी में लगातार तीसरे महीने के इनफ़्लो में कमी, वहीं गोल्ड और सिल्वर ETF में क़ीमतों में बढ़ोतरी के चलते तेज़ीAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः AMFI के सितंबर 2025 के आंकड़ों के मुताबिक़, इक्विटी और हाइब्रिड म्यूचुअल फ़ंड स्कीमों में लगातार तीसरे महीने नेट इनफ़्लो में गिरावट दर्ज हुई, जबकि गोल्ड और सिल्वर ETF में तेज़ उछाल देखने को मिला.

सितंबर में म्यूचुअल फ़ंड इनफ़्लो में फिर गिरावट आई, जो लगातार तीसरे महीने गिरावट का संकेत है.

AMFI (एसोसिएशन ऑफ़ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया) के आंकड़ों के मुताबिक़, सितंबर में इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीमों में नेट इनफ़्लो ₹30,421 करोड़ रहा, जो अगस्त के ₹33,430 करोड़ और जुलाई के ₹42,702 करोड़ से कम है.

गिरावट के बावजूद, सितंबर मार्च 2021 के बाद से लगातार 55वां महीना है जब इक्विटी में पॉज़िटिव फ़्लो रहा. वहीं, SIP महीने के दौरान स्थिर रहीं, वहीं मासिक योगदान बढ़कर ₹29,361 करोड़ हो गया. इससे बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों के अनुशासन का पता चलता है.

हाइब्रिड स्कीमों में भी सुस्ती के संकेत दिखे. जून और जुलाई में पीक पर रहने के बाद, इनफ़्लो धीरे-धीरे कम हुए, जो जुलाई के ₹20,879 करोड़ और अगस्त के ₹15,294 करोड़ से घटकर सितंबर में सिर्फ़ ₹9,397 करोड़ रह गए. हालांकि बैलेंस्ड एडवांटेज और मल्टी-एसेट फ़ंड अभी भी पैसा लुभा रहे हैं, लेकिन घटते रुझान से संकेत मिलता है कि निवेशक नई पूंजी के एलोकेशन में और सतर्क हो रहे हैं.

इनफ़्लो में लगातार गिरावट क्यों?

इक्विटी और हाइब्रिड फ़ंड्स में इनफ़्लो की गिरावट का कारण बाज़ार का सुस्त प्रदर्शन माना जा रहा है.

हालांकि पिछले हफ़्ते बाज़ार में तेज़ रिकवरी देखने को मिली, पर एक साल की रिटर्न अब भी कमज़ोर बने हुए हैं. पिछले एक साल में BSE Sensex सिर्फ़ 1.33% बढ़ा है, जबकि BSE Midcap और BSE Smallcap इंडेक्स क्रमशः लगभग 4% और 5% नीचे हैं.

मेटल की चमक बरक़रार

जब इक्विटी और हाइब्रिड फ़ंड्स में इनफ़्लो धीमे पड़े हैं, तब गोल्ड और सिल्वर ETF (एक्सचेंज ट्रेडेड फ़ंड) ने मज़बूती दिखाई है.

सितंबर में गोल्ड ETF में रिकॉर्ड ₹8,363 करोड़ का इनफ़्लो रहा, जबकि सिल्वर ETF में ₹5,341 करोड़ के नेट इनफ़्लो दर्ज हुए - जो कीमती धातु-आधारित निवेशों में निवेशकों की तेज़ी से बढ़ती रुचि को दर्शाता है.

उनका हालिया प्रदर्शन भी निराशाजनक नहीं रहा. पिछले एक साल में औसतन गोल्ड फ़ंड्स 61.5% बढ़े हैं, जबकि सिल्वर फ़ंड्स ने 77% की बढ़त दर्ज की है.

रिटर्न एक अहम वजह है, पर बढ़ते उतार-चढ़ाव ने भी इनफ़्लो में तेज़ उछाल को बढ़ावा दिया. टाटा एसेट मैनेजमेंट के चीफ़ बिज़नेस ऑफ़िसर आनंद वर्धराजन के मुताबिक़, “कीमती धातुएं, ख़ासकर सोना और चांदी, पिछले कुछ महीनों में बेहद अच्छा प्रदर्शन कर रही हैं. ये उछाल मज़बूत प्रदर्शन और निवेशकों के द्वारा सुरक्षा और डाइवर्सिफ़िकेशन की तलाश दोनों से प्रेरित है. इसी वजह से, हाइब्रिड कैटेगरी के भीतर मल्टी-एसेट फ़ंड्स में भी मज़बूत फ़्लो देखने को मिले.”

डेट फ़ंड्स से आउटफ़्लो बढ़ा

डेट सेगमेंट में इंडस्ट्री ने ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा के आउटफ़्लो दर्ज किए, जो मुख्यतः लिक्विड और मनी मार्केट फ़ंड्स से थे, क्योंकि संस्थानों ने तिमाही के अंत की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए निवेश निकाले. ये एक साइक्लिकल ट्रेंड है, पर ये दोबारा दिखाता है कि डेट फ़्लो अब भी रिटेल की बजाय शॉर्ट-टर्म ट्रेज़री मूवमेंट से ज़्यादा प्रभावित रहते हैं.

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