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सारांशः सितंबर 2025 में, 13 “एक्टिव” म्यूचुअल फ़ंड्स ने चुपचाप अपने साइज़ में 1,000 करोड़ रुपए की बढ़त दर्ज की. हमने ये देखने के लिए हर ‘प्योर इक्विटी’ कैटेगरी को स्कैन किया कि किन स्कीमों में निवेशक लगातार रुचि ले रहे हैं. ये है पूरी लिस्ट…
अगर आप जानना चाहते हैं कि निवेशक अपने पैसे कहां डाल रहे हैं - तो म्यूचुअल फ़ंड इंडस्ट्री के एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) पर नज़र डालें. AUM मानो एक आइना है; ये न सिर्फ़ ये दिखाता है कि फ़ंड का प्रदर्शन कैसा है, बल्कि ये भी बताता है कि निवेशकों का भरोसा उस फ़ंड में कितना है.
AUM क्या है?
जब हम कहते हैं कि एक फ़ंड “साइज़ में बढ़ा”, तो हम उसके AUM की बात कर रहे हैं - यानि वो कुल रकम जो वह फ़ंड निवेशकों की तरफ़ से मैनेज कर रहा है. उदाहरण के लिए, अगर 10,000 निवेशकों में से प्रत्येक ₹5 लगाते हैं, तो फ़ंड का AUM = ₹50,000 होता है.
लेकिन AUM स्थिर नहीं रहती. ये लगभग रोज़ाना दो कारणों से बदलती है:
- मार्केट मूवमेंट: यदि फ़ंड की पोर्टफ़ोलियो में शामिल स्टॉक्स की क़ीमतें बढ़ें, तो उसकी होल्डिंग्स की वैल्यू बढ़ेगा और AUM बढ़ेगा.
- निवेशक फ्लोज़: जब नए निवेशक SIP या लम्पसम के ज़रिए धन जोड़ते हैं, AUM बढ़ती है; जब रिडेम्शन होता है तो AUM घटता है.
इसलिए यदि किसी फ़ंड का AUM बढ़ता है, तो इसका अर्थ हो सकता है कि उसका प्रदर्शन अच्छा रहा है या नए पैसे उसमें आ रहे हैं - अक्सर दोनों. इस कारण, AUM के ट्रेंड्स से निवेशकों की मानसिकता का पता चलता है.
और पिछले महीने, इसमें तेज़ हलचल दिख रही थी - 13 एक्टिव म्यूचुअल फ़ंड्स (सिर्फ़ डायरेक्ट प्लान) ने हर एक ने 1,000 करोड़ से अधिक की वृद्धि दर्ज की.
लार्ज-कैप फ़ंड
सितंबर में दो लार्ज-कैप फ़ंड्स ने ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा का इनफ़्लो दर्ज किया:
- Nippon India Large Cap Fund ने ₹1,451 करोड़ जोड़े (₹45,012 करोड़ से बढ़कर ₹46,463 करोड़)
- ICICI Prudential Large Cap Fund ने ₹1,195 करोड़ जोड़े (₹71,839 करोड़ → ₹73,034 करोड़)
HDFC Large Cap बहुत पीछे नहीं रहा - इसकी नेट एसेट ₹592 करोड़ से बढ़ी (₹37,659 करोड़ → ₹38,251 करोड़).
ये पहले से ही बड़े फ़ंड हैं, इसलिए आंकड़ों में बढ़ोतरी देखना प्रभावशाली है. लेकिन अलग-अलग साइज़ के फ़ंडों की तुलना करने के लिए प्रतिशत में बढ़ोतरी देखना ज़रूरी है. इस लिहाज़ से, DSP Large Cap (3.49%) और Invesco India Large Cap (3.35%) इस महीने के सबसे तेज़ बढ़ने वाले रहे.
मिड-कैप फ़ंड
अगर एक कैटेगरी है जिस पर भारतीय निवेशकों में जूनून है, तो वो है मिड-कैप्स. और आंकड़े इसे साबित करते हैं.
तीन मिड-कैप फ़ंड्स ने अकेले सितंबर में ₹900 करोड़ से अधिक जोड़े:
- HDFC Mid-Cap Opportunities: ₹1,750 करोड़ (₹83,104 → ₹84,854 करोड़)
- Kotak Emerging Equity: ₹1,311 करोड़ (₹56,988 → ₹58,299 करोड़)
- Nippon India Mid Cap: ₹943 करोड़ (₹38,385 → ₹39,328 करोड़)
प्रतिशत आधार पर देखें, तो Canara Robeco Mid Cap का AUM एक महीने में 11.3% बढ़ गया (₹3,179 → ₹3,538 करोड़), जबकि Edelweiss Mid Cap 3.8% बढ़ा.
स्मॉल-कैप फ़ंड
इस वर्ष पिछले उतार-चढ़ाव भरे दौर के बाद, निवेशकों की स्मॉल-कैप के प्रति दीवानगी थोड़ी कम हुई है.
लेकिन ₹1,176 करोड़ जोड़ने वाले Bandhan Small Cap Fund ने सिर्फ़ एक महीने में 8% से ज़्यादा वृद्धि (₹14,561 → ₹15,737 करोड़) दर्ज की.
इसके बाद HDFC Small Cap (₹533 करोड़) और Quant Small Cap (₹529 करोड़) ने लगातार निवेश आकर्षित किया.
प्रतिशत के लिहाज़ से, Mirae Asset Small Cap (11%) और Bajaj Finserv Small Cap (8.3%) छोटे फ़ंड्स में सबसे तेज़ बढ़ने वाले थे. स्पष्ट है कि small-cap की भूख खत्म नहीं हुई - बस वो सतर्क ज़्यादा हो गए हैं.
फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड
जब निवेशक लचीलापन चाहते हैं लेकिन विश्वसनीय प्रबंधन की उम्मीद रखते हैं, तो वे इस कैटेगरी की ओर रुख करते हैं और Parag Parikh Flexi Cap इस मामले में अभी भी काबिल-ए-तारीफ़ है. इसने सितंबर में ₹4,683 करोड़ जोड़े (₹1,15,040 → ₹1,19,723 करोड़).
HDFC Flexi Cap पीछे नहीं रहा, जिसने ₹3,624 करोड़ की ग्रोथ (₹81,935 → ₹85,559 करोड़) दर्ज की.
दोनों फ़ंड्स ने पिछले महीने 4% से अधिक की वृद्धि की - यह उनके आकार के लिए उल्लेखनीय है.
छोटे साइज़ वाले फ़ंड्स में, Helios Flexi Cap (10.7%) और Invesco India Flexi Cap (9%) सबसे तेज़ बढ़े, जबकि ICICI Prudential Flexi Cap ने ₹696 करोड़ जोड़ कर 4% की मज़बूत ग्रोथ दर्ज की.
निवेशकों के लिए संदेश स्पष्ट है: फ़्लेक्सी-कैप स्पेस में व्यापक निवेश बढ़ रहा है और नए तथा पुराने दोनों फ़ंड हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
फ़ोकस्ड फ़ंड्स
दो फ़ोकस्ड फ़ंड्स ने निवेश में ₹1,000 करोड़ से अधिक की ग्रोथ दर्ज की:
- SBI Focused Equity Fund: ₹1,153 करोड़ (3.05% वृद्धि)
- HDFC Focused 30 Fund: ₹1,088 करोड़ (4.85% वृद्धि)
ICICI Prudential Focused ने 2.8% की वृद्धि के साथ ₹350 करोड़ बढ़ाए. यहां अपील है भरोसे की - निवेशक उन फ़ंड मैनेजर्स पर भरोसा रखते हैं पर जो सिर्फ़ 25-30 स्टॉक्स चुनते हैं.
लार्ज एंड मिड-कैप्स फ़ंड्स
अगर आप सोचते हैं कि निवेशक केवल बड़े या छोटे फ़ंडों में ही रुचि रखते हैं, तो ये कैटेगरी आपको चौंका सकती है:
- Motilal Oswal Large & Midcap Fund: ₹1,149 करोड़ जोड़ (9.1% वृद्धि)
- SBI Large & Midcap: ₹817 करोड़
- Mirae Asset Large & Midcap: ₹802 करोड़
- HDFC Large & Midcap: ₹792 करोड़
- ICICI Prudential Large & Midcap: ₹727 करोड़
स्पष्ट है कि निवेशक “मध्यम संतुलन” को फिर से खोज रहे हैं - पिछले महीने पांच फ़ंड्स ने ₹700 करोड़ से ज़्यादा जोड़े.
मल्टी-कैप फ़ंड्स
दो मल्टी-कैप फ़ंड्स ने सितंबर में ₹1,000 करोड़ रेकॉर्ड पार किया:
- Nippon India Multi Cap: ₹1,079 करोड़ (₹46,215 → ₹47,294 करोड़)
- Kotak Multi Cap: ₹1,057 करोड़ (₹19,227 → ₹20,284 करोड़)
प्रतिशत के आधार पर, Union Multi Cap (11.1%) और UTI Multi Cap (7.2%) सबसे तेज़ बढ़े.
इसके अतिरिक्त, Kotak Multi Cap को इसलिए ख़ास माना गया क्योंकि उसने बड़े बेस के बावजूद 5.5% की ग्रोथ दर्ज की.
वैल्यू-ओरिएंटेड फ़ंड्स
भले ही, ये अक्सर सुर्खियों में नहीं रहते, लेकिन वैल्यू और कॉन्ट्रा फ़ंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी फिर से दिख रही है:
- ICICI Prudential Value Discovery: ₹1,694 करोड़ (₹53,750 → ₹55,444 करोड़)
- SBI Contra: ₹552 करोड़
- Kotak Contra: ₹222 करोड़ (4.9% - इस श्रेणी में सबसे तेजी)
इन आंकड़ों से क्या स्पष्ट होता है
बाज़ार की वोलैटिलिटी और ऊंची वैल्यूएशन्स के बावजूद, विभिन्न फ़ंड कैटेगरी ख़ासकर उन बेहतर प्रबंधन वाले फ़ंड्स में लगातार निवेश बना हुआ है. फिर भी, इन आंकड़ों को देखते समय याद रखें - एक बढ़ता हुआ AUM लोकप्रियता दर्शाता है, लेकिन ज़रूरी नहीं कि वह भविष्य के रिटर्न सुनिश्चित करे. फ़ंड का प्रदर्शन, निरंतरता और पोर्टफ़ोलियो की क्वालिटी अभी भी भीड़ के रुझान से ज़्यादा मायने रखते हैं.
निष्कर्ष
निवेशकों का पैसा खुद एक कहानी बयां करता है, और अभी वो कह रहा है कि भारतीय निवेशक आत्मविश्वासी, अनुशासित और धीरे-धीरे पोर्टफ़ोलियो को डाइवर्सिफ़ाई कर रहे हैं.
अगर आप जानना चाहते हैं कि इनमें से कौन से बढ़ते फ़ंड वास्तव में आपके पोर्टफोलियो के लिए उपयुक्त हैं और किनसे बचना चाहिए - वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपकी मदद कर सकता है.
व्यक्तिगत फ़ंड रेकमंडेशन, पोर्टफ़ोलियो इनसाइट्स और जोखिम व रिटर्न के संतुलन पर स्पष्ट गाइडेंस के साथ, ये आपको एक ऐसा पोर्टफ़ोलियो बनाने में मदद करता है जो सिर्फ़ ट्रेंड नहीं, बल्कि लंबे समय के विज़न के अनुरूप हो.
असल में, जब भीड़ हर दिशा में भागती है - आपको झुंड नहीं, कम्पास चाहिए.
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