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एक ऐसा स्मॉल-कैप जिसमें अषीष कचोलिया और मुकुल अग्रवाल ने Q2 में निवेश किया

भारत के दो अनुभवी निवेशकों के Q2 पोर्टफ़ोलियो पर गौर कीजिए और जानिए वो एक स्टॉक जो दोनों को पसंद आया

भारत के दो अनुभवी निवेशकों के Q2 पोर्टफ़ोलियो पर गौर कीजिए और जानिए वो एक स्टॉक जो दोनों को पसंद आयाAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः ऐसा बहुत कम होता है जब बाज़ार के दो सबसे कामयाब स्मॉल-कैप निवेशक एक ही कंपनी के स्टॉक पर सहमत नज़र आते हैं. लेकिन सितंबर तिमाही में ऐसा हुआ. जानिए कौन सा कारोबार इन दोनों को पसंद आया और इस तिमाही में इन्होंने अपने पोर्टफ़ोलियो में क्या बदलाव किए.

जब दलाल स्ट्रीट के दो चर्चित निवेशक एक ही कंपनी में हिस्सेदारी बढ़ाते हैं, तो उस पर नज़र डालना ज़रूरी हो जाता है. वजह ये नहीं कि वे कभी गलती नहीं करते, बल्कि इसलिए कि दोनों ने कई बार भीड़ से पहले मौक़ा पहचाना है.

इस बार, सितंबर तिमाही (Q2 FY26) में, उनके पोर्टफ़ोलियो में एक नई लिस्ट हुई स्मॉल-कैप कंपनी पर समानता दिखी - विकरन इंजीनियरिंग, जिसने 3 सितंबर 2025 को बाज़ार में अपनी शुरुआत की.

EPC कंपनी ने कैसे खींचा ध्यान

अषीष कचोलिया ने विकरन इंजीनियरिंग में 1.5% हिस्सेदारी ली, जिसकी क़ीमत ₹39 करोड़ रही, जबकि मुकुल अग्रवाल ने 1.2% यानी लगभग ₹30 करोड़ का निवेश किया, ट्रेंडलाइन के आंकड़ों के मुताबिक़.

विक्रान एक इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन (EPC) कंपनी है,  पावर ट्रांसमिशन, वॉटर डिस्ट्रीब्यूशन, रेल इलेक्ट्रिफ़िकेशन, सोलर EPC और स्मार्ट मीटरिंग जैसे प्रोजेक्ट्स में डिज़ाइन से लेकर इंस्टॉलेशन और कमीशनिंग तक पूरा काम करती है. कंपनी 22 राज्यों में लगभग 190 प्रोजेक्ट साइट्स पर काम करती है और ये 3,500 से ज़्यादा सप्लायर के नेटवर्क से प्रोक्योरमेंट व लॉजिस्टिक्स संभालती है.

कमाई के लिहाज़ से, विकरन ने पिछले कुछ सालों में मज़बूत ग्रोथ दिखाई है. FY23 से FY25 के बीच इसकी आय हर साल 32% बढ़ी, जबकि मुनाफ़ा 35% की दर से ऊपर गया. मार्जिन भी स्थिर रहे, FY25 में EBIT मार्जिन 17% रहा. जो इसके सेक्टर में सबसे ऊंचों में है.

कंपनी के पास FY25 की कमाई से 2.2 गुना की ऑर्डर बुक है, जिसमें NTPC और ट्रांसमिशन कॉर्प ऑफ़ तेलंगाना जैसे ग्राहकों से दोबारा मिले ऑर्डर शामिल हैं. हालांकि, लंबी देनदारियां और सरकारी प्रोजेक्ट्स पर ज़्यादा निर्भरता इसके कैश फ़्लो और कामकाज की गति के लिए जोखिम बन सकती है.

और क्या ख़रीदा और बेचा गया

विकरन इंजीनियरिंग इस तिमाही में उनका अकेला क़दम नहीं था. दोनों निवेशकों ने अपने पोर्टफ़ोलियो में कई बदलाव किए.

कचोलिया का सबसे बड़ा नया निवेश श्री रेफ़्रिज़रेशंस में रहा, जहां उन्होंने 3% से ज़्यादा हिस्सेदारी ली. इसके अलावा मैन इंडस्ट्रीज़ में उनकी हिस्सेदारी 1% बढ़ी.

कचोलिया के बड़े दांव (Q2 FY26)

कंपनी निवेश मूल्य (करोड़ ₹) कार्रवाई सितंबर 2025 की हिस्सेदारी (%) जून 2025 की हिस्सेदारी (%) बदलाव (%)
वी-मार्क* 39.5 नया 2.7 - 2.7
प्रतम EPC प्रोजेक्ट्स* 4 नया 1.2 - 1.2
श्री रेफ़्रिज़रेशंस* 27.8 नया 3.4 - 3.4
विकरन इंजीनियरिंग 38.9 नया 1.5 - 1.5
जैन रिसोर्स रीसाइक्लिंग 144.6 नया 1.1 - 1.1
मैन इंडस्ट्रीज़ 90 बढ़ाया 3 2 1
*डेटा: ट्रेंडलाइन
पुराने निवेशों में सिर्फ़ वही होल्डिंग शामिल हैं जिनमें 1% या उससे ज़्यादा बढ़ोतरी हुई.
नए नाम आने बाक़ी हैं जैसे-जैसे कंपनियां शेयरहोल्डिंग डेटा जारी करेंगी.|
*डेटा SME स्टॉक्स को दर्शाता है.

अग्रवाल का सबसे बड़ा नया निवेश ओसेल डिवाइसेज़ में रहा, जहां उन्होंने 7.6% हिस्सेदारी ली. इसके बाद यूनिफ़ाइड डेटा टेक सॉल्यूशंस में 5.3% हिस्सेदारी जोड़ी. मौजूदा निवेशों में उन्होंने ASM टेक्नोलॉजीज़ में अपनी हिस्सेदारी 6.5% से बढ़ाकर 10.7% कर दी.

ये बदलाव बताते हैं कि दोनों निवेशक स्मॉल और मिड-कैप कंपनियों में दिलचस्पी रखते हैं - ख़ासकर उन क्षेत्रों में जो मैन्युफैक्चरिंग, इंजीनियरिंग और नई तकनीक से जुड़े हैं, यानी वो हिस्से जहां भारत की पूंजी निवेश और डिजिटल ग्रोथ की लहर चल रही है.

अग्रवाल के बड़े दांव (Q2 FY26)

कंपनी निवेश मूल्य (करोड़ ₹) कार्रवाई सितंबर 2025 हिस्सेदारी (%) जून हिस्सेदारी (%) बदलाव (%)
IFB इंडस्ट्रीज़ 92.5 नया 1.2 - 1.2
किलिच ड्रग्स इंडिया 9.2 नया 1.3 - 1.3
एन आर अग्रवाल इंडस्ट्रीज़ 16.1 नया 2 - 2
प्रोटियन ई-गव टेक 51.4 नया 1.5 - 1.5
ओसेल डिवाइसेज़* 93.1 नया 7.6 - 7.6
सोलैरियम ग्रीन एनर्जी* 19.4 नया 2.9 - 2.9
यूनिफ़ाइड डेटा टेक सॉल्यूशंस* 49.7 नया 5.3 - 5.3
लक्ष्मी इंडिया फ़ाइनेंस 29.6 नया 3.8 - 3.8
विकरन इंजीनियरिंग 29.9 नया 1.2 - 1.2
ज़ेलियो ई-मोबिलिटी* 16.1 नया 2 - 2
ASM टेक्नोलॉजीज़ 574.9 बढ़ाया 10.7 6.5 4.2

दोनों निवेशकों ने कुछ शेयरों में हिस्सेदारी घटाई भी. कचोलिया ने फ़ाइनोटेक केमिकल, एक्सप्रो इंडिया और धाबरिया पॉलीवुड में 1% से कम कटौती की. उनकी हिस्सेदारी पहली बार ज्योति स्ट्रक्चर्स, यूनिवर्सल ऑटोफ़ाउंड्री, अकुटास केमिकल्स, NIIT लर्निंग सिस्टम्स और ऑफ़िस स्पेस सॉल्यूशंस में 1% से नीचे आई.

अग्रवाल ने वासा डेंटिसिटी, स्टैनली लाइफ़स्टाइल्स, वनसोर्स स्पेशलिटी फ़ार्मा जैसे शेयरों में कुछ मुनाफ़ा बुक किया. उनकी हिस्सेदारी पहली बार BSE, सुला वाइनयार्ड्स, राघव प्रोडक्टिविटी और MITCON कंसल्टेंसी में 1% से नीचे आई.

सिर्फ़ नकल से नहीं, समझ कर निवेश करें

दलाल स्ट्रीट में कचोलिया और अग्रवाल के पोर्टफ़ोलियो को कई लोग ऐसे नक्शे की तरह देखते हैं जिसमें मल्टीबैगर शेयर छिपे हों. दोनों ने अपनी पहचान ऐसे निवेशक के रूप में बनाई है जो नई कंपनियों को पहले पहचान लेते हैं.

लेकिन ये जानना ज़रूरी है कि बड़े निवेशकों की हर ख़रीद का मतलब आपके लिए संकेत नहीं होता. अनुभवी निवेशक भी कभी-कभी ग़लती करते हैं या अलग समय और रिस्क सोच के साथ निवेश करते हैं.

बेहतर यही है कि उनकी चालें देखने के बजाय, उन्हें अपनी रिसर्च की शुरुआत मानें - मंज़िल नहीं. हर निवेशक को अपने गोल , वैल्यूएशन और जोख़िम के अनुसार ही फ़ैसला लेना चाहिए.

समझदारी से जानिए क्या ख़रीदें, क्या रखें और क्या बेचें

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